उन्नत तकनीक बढ़ाएगी विकास

नीति आयोग का कृत्रिम मेधा-डाटा एनालिटिक्स पर जोर

नई दिल्ली – कृत्रिम मेधा (एआई) और डाटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में विकास को देखते हुए भारत के लिए बीमारियों के इलाज में सुधार लाने के लिए काफी संभावना है। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढि़या ने सोमवार को यह कहा। अमरीका-भारत रणनीतिक भागीदारी मंच पर कोलंबिया विश्विविद्यालय में भारतीय राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर पनगढि़या ने कहा कि कृत्रिम मेधा, डाटा एनालिटिक्स और अन्य सभी प्रौद्योगिकी को देखते हुए आने वाले समय में भारत में इलाज बेहतर हो सकता है। उन्होंने कहा कि इन प्रौद्योगिकी में बदलावों को देखते हुए भारत देश के कहीं भी बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध करा सकता है। श्री पनगढि़या ने कहा कि भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र अभी भी विकसित हो रहा है। इस क्षेत्र पर निजी क्षेत्र का दबदबा है और सरकार की भूमिका चिकित्सा कालेज लगाने पर रही है। कुछ बड़े अस्पताल हैं लेकिन उनमें से ज्यादातर का संचालन निजी क्षेत्र द्वारा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार ने पूरा बुनियादी ढांचा लगाया है। उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी समस्या यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों और यहां तक कि छोटे एवं मझोले शहरों में योग्य डाक्टर नहीं जाते ज्यादातर काम वे लोग करते हैं, जिन्होंने काम सीखा है या जिसने डाक्टर के साथ सहायक के रूप में काम किया है। श्री पनगढि़या ने कहा कि ये चुनौतियां हैं जिससे भारत को पार पाना होगा। क्षेत्र में बदलाव आएगा क्योंकि भारतीय चिकित्सा परिषद (संशोधन) कानून, 21019 के जरिये सुधार पेश किए गए हैं।

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