एजुकेशन हब डलहौजी

पर्यटकों के साथ-साथ देश-प्रदेश के अभिभावकों की पसंद बना जिला चंबा का डलहौजी शहर हर रोज नई बुलंदियां छू रहा है। करीब चार हजार छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रहे डलहौजी ने इस अरसे में एक ऐसी क्रांति लाई कि शिक्षा के साथ-साथ खुले रोजगार के दरवाजों से प्रदेश ने तरक्की की राह पकड़ ली। हिमाचली ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के होनहारों का कल संवार रहे डलहौजी में क्या है शिक्षा की स्थिति, बता रहे हैं

हमारे संवाददाता —दीपक शर्मा, कुलदीप भारद्वाज

पर्यटन नगरी डलहौजी जिला में देश-प्रदेश के कई नामी शिक्षण संस्थानों का बेहतर तरीके से संचालन हो रहा है। डलहौजी शहर के पांच किलोमीटर के दायरे में डलहौजी पब्लिक स्कूल, गुरुनानक पब्लिक स्कूल, डलहौजी हिल टॉप स्कूल व सेक्रेड हार्ट सरीखे नामी निजी शिक्षण संस्थानों के अलावा सरकारी क्षेत्र में नेता जी सुभाष चंद्र बोस राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के अलावा प्राथमिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। शहर के निजी शिक्षण संस्थानों में हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा व दिल्ली सरीखे राज्यों के बच्चे शिक्षा ग्रहण कर जीवन में निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति को अग्रसर हैं। इन स्कूलों से अब तक सैकड़ों प्रतिभाशाली बच्चे पढ़ाई कर आईएएस, आईपीएस व सेना आदि में बडे़ पदों पर आसीन होकर देश सेवा कर रहे हैं। इन स्कूलों में गुणात्मक व प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा देने के अलावा छात्रों के व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। चंबा जिला में डलहौजी ही एकमात्र ऐसी जगह है, जो अब पर्यटन के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में विशेष पहचान बना रही है। डलहौजी के निजी स्कूलों ने जहां इसे विश्वव्यापी पहचान दिलवाई है, वहीं कारोबार में भी अहम रोल अदा कर रहे हैं।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला

नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेमोरियल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डलहौजी हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। इस स्कूल में 454 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिन्हें 32 शिक्षक अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

हर बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल

चंबा जिला में डलहौजी की एकमात्र जगह है, जहां सीबीएसई, आईसीएसई और प्रदेश शिक्षा बोर्ड पैटर्न की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। डलहौजी शहर में कई नामी निजी शिक्षण संस्थानों के अलावा सरकारी क्षेत्र में एक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला व केंद्रीय तिब्बतियन विद्यालय के अलावा पांच प्राथमिक पाठशाला संचालित हो रही है। इन पाठशालाओं में करीब 3500 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इसमें नेता जी सुभाष चंद्र बोस राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में 454 और केंद्रीय तिब्बतियन विद्यालय में 50 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूलों के बेहतरीन शैक्षणिक वातावरण को देखते हुए हिमाचल के अलावा पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व जम्मू-कश्मीर के छात्र भी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

सेक्रेड हार्ट स्कूल के क्या कहने

आईसीएसई से मान्यता प्राप्त इकलौते स्कूल सेके्रड हार्ट डलहौजी वर्ष 1901 में स्थापित किया गया था।  990 छात्र इस वक्त यहां अपना भविष्य संवार रहे हैं। सुभाष चौक में स्थापित यह स्कूल शुरू में लड़कियों और लड़कों के लिए एक आवासीय विद्यालय था, लेकिन वर्तमान में अब इस स्कूल में शिक्षा ले रही केवल लड़कियों के लिए आवसीय सुविधा है, जबकि डे-स्कालर्स के तौर में काफी संख्या में लड़के व लड़कियां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, वहीं देश के विभिन्न राज्यों से छात्रावास में रहकर छात्राएं अपने भविष्य निर्माण के लिए अध्ययनरत हैं। सेक्रेड हार्ट डलहौजी में सबसे पुराना स्कूल है। वर्ष 1901 में स्थापित यह कान्वेंट स्कूल आईसीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त एकमात्र स्कूल है और तब से लेकर आज तक यह स्कूल डलहौजी के प्रतिष्ठित स्कूलों में शुमार है।

1971 से चल रहा डलहौजी पब्लिक स्कूल

डलहौजी पब्लिक स्कूल की स्थापना वर्ष 1971 में हुई थी। इस स्कूल में छात्र-छात्राओं को आवासीय सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। इसमें विभिन्न राज्यों के छात्र एक शांत वातावरण में रहकर पढ़ाई करते हैं। इस स्कूल में 1300 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिनमें से करीब 1000 बॉर्डर और शेष डे-स्कालर हैं। स्टाफ में लगभग 85 प्रशिक्षित शिक्षक हैं, जिनमें अधिकांश स्कूल में ही रहते हैं। छात्रों और शिक्षकों दोनों को भारत के विभिन्न हिस्सों से भी चुना जाता है और इस प्रकार गुणात्मक शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक विविधता का वातावरण प्रदान किया जाता है। यह स्कूल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीबीएसई से मान्यता प्राप्त है।

हिल टॉप स्कूल भी ऊंचे मुकाम पर

शहर से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित सीबीएसई से मान्यता प्राप्त रेजिडेंशियल व डे-बोर्डिंग डलहौजी हिल टॉप स्कूल भी खूब नाम कमा रहा है।  स्कूल बच्चों में प्रगतिशील सोच के विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए प्रयासरत है, इसके अलावा नवीन दृष्टिकोणों को नियोजित करके शिक्षा में नए गुणात्मक मानक स्थापित करने के साथ साथ सन 1979 में स्थापित यह स्कूल न केवल गुणात्मक शिक्षा बल्कि अन्य सामाजिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेता है।

बड़ा नाम कमा रहे यहां के छात्र

पर्यटन नगरी डलहौजी में संचालित स्कूलों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए, तो निजी स्कूलों से पढ़ाई कर निकले कई बच्चे आज विभिन्न उच्च पदों पर आसीन होकर देश की सेवा कर रहे हैं। चंबा के डीसी विवेक भाटिया भी डलहौजी पब्लिक स्कूल के छात्र रह चुके हैं। नेता जी सुभाष चंद्र बोस राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला से भी कई बच्चे विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत होकर नाम कमा रहे हैं। इन स्कूलों का रिजल्ट भी बेहतर रहता है। इस वर्ष सीबीएसई व आईसीएसई के घोषित रिजल्ट में डीपीएस, गुरुनानक पब्लिक व सेक्रेड हार्ट के छात्रों ने उपस्थिति दर्ज करवाई है।

यहां हर तरह का संस्थान

डलहौजी शिक्षा का केंद्र यहां मिलने वाली समय की मांग के अनुसार लोगों को दी जाने वाली सुविधाओं की वजह से बन रहा है। यहां आने वाला हर छात्र अपनी इच्छानुसार भविष्य तय करता है। यहां सभी तरह के संस्थान होने के कारण छात्रों को प्रतिभा निखारने का अवसर मिलता है

            -डा. जीएस ढिल्लों, चेयरमैन, डीपीएस

संस्थानों का मुख्य उद्देश्य बच्चों के सुखद जीवन के लिए उनके गुणात्मक शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक व मानसिक विकास और संस्कार जैसे विषयों पर कार्य करना है। उन्हें इसके लिए विभिन्न सामाजिक गतिविधियों व खेलों के लिए प्रेरित किया जाता है। इस कारण विद्यार्थी न केवल शिक्षा, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी प्रतिभा प्रदर्शित कर नाम रोशन कर रहे हैं

            -नवदीप भंडारी, प्रिंसीपल, गुरु नानक पब्लिक स्कूल

स्कूल ग्रामीण तथा शहरी दोनों वर्गों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान कर बच्चों का भविष्य संवारने में अहम भूमिका निभा रहा है और यह उद्देश्य पूरा करने के लिए स्कूल का योग्य व कुशल स्टाफ दिन-रात मेहनत कर रहा है

            -नरेश चंदेल, प्रिंसीपल, डलहौजी पब्लिक स्कूल

स्कूल पाठ्यक्रम के माध्यम से छात्रों की शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए वचनबद्ध हैं। इस लक्ष्य की कुंजी गुणात्मक आधारित शिक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाना हैं।

            -सिस्टर मैरी एपिन, प्रिंसीपल, सेक्रेड हार्ट स्कूल

गुरु नानक पब्लिक स्कूल का जिक्र लाजिमी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीबीएसई से मान्यता प्राप्त गुरु नानक पब्लिक स्कूल डलहौजी गुरु नानक पब्लिक स्कूल का जिक्र होना लाजिमी है। शहर के साथ ही बसे 1999 में स्थापित यह रेजिडेंशियल व डे-बोर्डिंग स्कूल बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहा है। 43 विद्यार्थियों के साथ स्कूल की एक विनम्र शुरुआत की गई। आज इन होनहार विद्यार्थियों की संख्या लगभग एक हजार के करीब पहुंच गई है, जिसमें 52 प्रशिक्षित अध्यापक बच्चों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इस स्कूल में भी बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ भारतीय संस्कारों से जोड़ा जाता है। लिहाजा स्कूल का काबिल स्टाफ बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ उच्च संस्कारों की दीक्षा भी प्रदान कर रहा है।

शिक्षकों की कमी नहीं

शहर में संचालित स्कूलों में स्टाफ की संख्या छात्रों के अनुरूप पूरी है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस पाठशाला में 32 प्रशिक्षित अध्यापक बच्चों को पढ़ाई का जिम्मा संभाले हुए हैं, डलहौजी पब्लिक स्कूल में 85 और गुरु नानक पब्लिक स्कूल में 52, डलहौजी हिलटॉप में 25 और सेक्रेड हार्ट में 50 अध्यापक तैनात हैं।

शिक्षा संसाधनों की कोई कमी नहीं

वर्तमान में शहरी क्षेत्र के स्कूलों में आधुनिक शिक्षा संसाधनों की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त संसाधन मौजूद होने के चलते विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनकर जीवन में नई ऊंचाइयां प्राप्त करने के अवसरों का लाभ ले सकते हैं

            -रितु महाजन, अभिभावक

एजुकेटिड स्टाफ, बच्चों का फ्यूचर ब्राइट

आज के दौर में निजी स्कूलों में प्रतिस्पर्धा का दौर भी बढ़ा है, वहीं संस्थान कुशल स्टाफ को तरजीह देते हैं, ताकि उनके स्कूल का परिणाम बेहतर हो सके। इस कारण अभिभावक भी निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने से संतुष्ट हैं

            -विक्त्रांत महाजन, अभिभावक

बेहतर स्टाफ का काम बेहतरीन

शहरी स्कूलों में आधारभूत ढांचा काफी विकसित होता है। पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के लिए खेल सहित अन्य गतिविधियों की सुविधा भी प्रदान की जाती है। योग्य व अनुभवी स्टाफ की बदौलत भी शिक्षा का स्तर ऊपर उठाया जाता है       

   -विक्रम जरयाल, अभिभावक

छात्रों को हर क्षेत्र में मिल रहा मौका शिक्षा ही नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में अव्वल

प्रतिस्पर्धा के युग में शिक्षा के अलावा स्कूलों में कई प्रकार की गतिविधियां भी समय-समय पर आयोजित की जाती हैं। इस कारण विद्यार्थियों को न केवल शिक्षा, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मौका मिलता है

            -सुनील कुमार, अभिभावक

कंपीटीटिव एक्टीविटीज़ उठा रहीं लेवल

निजी स्कूलों में नियमित आधुनिक शिक्षण व प्रतियोगी गतिविधियों को अधिमान दिया जाता है। इसके माध्यम से स्कूलों के बच्चों का मानसिक व बौद्धिक स्तर बढ़ता है। प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा से ओत-प्रोत बच्चे अपना स्वर्णिम भविष्य चुनने के लिए प्रयासरत रहते हैं     

            -राजेश चौभियाल, अभिभावक

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