कमांडो सुभाष की बहादुरी को सलाम…कारगिल में रचा इतिहास

 कठलग में याद किए शहीद; बच्चों को सुनाए जांबाजी के किस्से, ऐ मेरे वतन के लोगो से गूंजा स्कूल, परिजनों को सौंपा चेक

घुमारवीं –कारगिल की दुर्गम पहाडि़यों में दुश्मनों को खदेड़कर अदम्य साहस का परिचय देने वाले हिंद के जवान सेना मेडल से अलंकृत शहीद कमांडो सुभाष चंद को कठलग में नमन किया। सोमवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल कठलग में प्रिंसीपल रविकांत शर्मा की अध्यक्षता में शहीदी दिवस पर समारोह का आयोजन किया। इसमें सेना की ओर से एनएसजी कमांडो प्रदीप कुमार विशेष तौर पर उपस्थित हुए। समारोह में शहीद कमांडो सुभाष चंद के फोटो पर मार्ल्यापण व पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। शहीद की माता विद्या देवी को 50 हजार रुपए का चेक देकर सम्मानित किया। स्कूल के बच्चों को कमांडो सुभाष चंद की वीरता की शौर्य गाथा सुनाई। समारोह में उपस्थित शिक्षकों, बच्चों व लोगों ने शहीद कमांडो सुभाष चंद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। समारोह में स्कूल के बच्चों ने एक से बढ़कर देशभक्ति से ओत-प्रोत गीत प्रस्तुत कर समां बांधा। बच्चों ने तेरी मिट्टी में मिल जावां, ऐ मेरे वतन के लोगों व मेरा मुल्क मेरा देश सहित अन्य देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। हिंदी प्रवक्ता नवेंद्र शर्मा ने नफरत की लाठी तोड़ो गीत सुनाया। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य रवि कांत शर्मा एवं वरिष्ठ प्रवक्ता शशिपाल चौहान ने देश के लिए दिए शहीद कमांडो सुभाष चंद के सर्वश्रेष्ठ योगदान के बारे बताया। एनएसजी कमांडो प्रदीप कुमार ने बच्चों को देश सेवा का मार्ग चुनने के लिए प्रेरित किया। जानकारी के मुताबिक 1999 में कारगिल की पहाडि़यों में घुसपैठियों को मार गिराने के बाद उपमंडल घुमारवीं के करयालग गांव के कमांडो सुभाष चंद ने शहादत का जाम पिया था। कारगिल की पहाडि़यों में छिड़ी जंग में कमांडो सुभाष चंद ने अद य सहास का परिचय देकर दुश्मनों को खदेड़ दिया था, लेकिन लड़ाई के बाद घुसपैठियों की तलाश को भारतीय सेना के छेड़े सर्च आपरेशन में कमांडो सुभाष चंद शहीद हो गए थे। कारगिल की दुर्गम पहाडि़यों में दिखाई वीरता के लिए शहीद कमांडो सुभाष चंद को सेना मेडल से अलकृंत किया था। करयालग गांव के सपूत कमांडो सुभाष चंद ने कारगिल की पहाडि़यों पर अपनी बहादुरी की ऐसी इबारत लिखी, जिसे 20 साल बाद भी लोग याद करते हैं। कमांडो सुभाष चंद की बहादुरी के किस्से युवाओं के लिए प्ररेणा स्रोत बने हुए हैं। जेएके राइफल के इस जवान एनएसजी कमांडो की स्पेशल टीम में था। बहादुरी से लगातार लड़ाई करने के बाद भी पीछे न हटने वाले कमांडो सुभाष चंद देश के भीतर घुसे एक-एक घुसपैठियों को मार गिराने के बाद ही वापस घर आने चाहते थे। ज मू-कश्मीर बारामूल्ला सेक्टर के बनिहाल में आठ सितंबर 1999 को भारतीय सेना ने छिपे हुए घुसपैठियों को बाहर निकालने के सर्च आपरेशन शुरू कर रखा था। इसमें जेएके रायफल का जवान कमांडो सुभाष चंद भी रात को अपने साथियों सहित सर्च आपरेशन में जुटा हुआ था। करीब 12 से एक बजे के बीच उग्रवादियों ने जवानों पर घात लगाकर हमला कर दिया। हमले में कमांडो सुभाष चंद घायल हो गए। घायल होने के बावजूद भी कमांडो सुभाष चंद ने अदम्य साहस का परिचय दिया। कमांडो सुभाष चंद ने शहादत का जाम पीने से पहले तीन घुसपैपिठयों को मार गिराया था। इसके बाद जवान शहीद कमांडो सुभाष चंद की वीरता को याद करने तथा शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए शहीदी दिवस का आयोजन किया। इसके लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल कठलग में समारोह का आयोजन किया। इसमें सेना के जवानों, शिक्षकों, बच्चों तथा लोगों ने शहीद कमांडो सुभाष चंद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। स्कूल के बच्चों को शहीद सुभाष चंद की वीरता सुनाई। शहीद की माता को सेना द्वारा 50 हजार रुपए का चैक देकर सम्मानित किया गया।  इस मौके पर प्रधानाचार्य रविकांत शर्मा, स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अमरजीत चौधरी, शशिपाल चौहान, दलेल सिंह, नरेंद्र शर्मा, कुलदीप चंदेल, मीना, अनुराधा, अनुपमा, शारदा, राकेश चौधरी, सुरजीत गौतम, रिंकू जसवाल व अनिल शर्मा सहित स्कूल के बच्चे व अन्य उपस्थित थे।

 

 

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