कल संवारता कुल्लू

By: Oct 14th, 2019 12:20 am

टॉप-टेन में हमेशा जगह बनाने वाला शिक्षा हब कुल्लू हर रोज नई बुलंदियां छू रहा है। 1336 स्कूलों में करीब डेढ़ लाख छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रहे कुल्लू ने इस अरसे में एक ऐसी क्रांति लाई कि शिक्षा के साथ-साथ खुले रोजगार के दरवाजों से प्रदेश ने तरक्की की राह पकड़ ली। हिमाचली ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के होनहारों का कल संवार रहे जिला कुल्लू में क्या है शिक्षा की स्थिति, बता रहे हैं  हमारे संवाददाता   

—शालिनी राय भारद्वाज, मोहर सिंह पुजारी

पर्यटन के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर उभरकर सामने आई पर्यटन नगरी कुल्लू-मनाली आज शिक्षा का भी हब बनती जा रही है। 1970 के दशक के बाद से आज सरकारी स्कूलों के मुकाबले में जिला कुल्लू में निजी स्कूलों की संख्या भी काफी बढ़ गई है। छात्रों को शिक्षा क्वालिटी सहित बेहतर सुविधाएं भी स्कूलों में मिल रही हैं। यही कारण है कि आज सरकारी की जगह निजी स्कूलों में अभिभावक बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए लंबा इंतजार भी कर लेते हैं। देवभूमि कुल्लू आज शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी आगे निकलते जा रही है। सरकारी स्कूलों के मुकाबले आज निजी स्कूलों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। साल भर की बात करे तो जहां कम संख्या वाले सरकारी स्कूल बंद करने की बात सरकार करती है, तो वहीं एक साल के भीतर जिला भर में लगभग एक दर्जन नए स्कूल भी खुल जाते हैं। फिर भले ही उन स्कूलों के पास बच्चों को खेलने के लिए परिसर भी न हो। निजी स्कूल आज गली-मोहल्लों में खुल रहे हैं। फिर भी इन निजी स्कूलों के पास अगर छात्रों की एवरेज देखें, तो करीब 30 से कम नहीं होती, जो कि कई सरकारी प्राइमरी स्कूलों से अधिक है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज सरकारी स्कूलों का कहीं न कहीं स्तर गिरने से अभिभावकों का रूझान निजी संस्थानों की ओर बढ़ गया है। यही नहीं, आज यह भी होड़ अभिभावकों में देखने को मिलती है कि कौन सा स्कूल सबसे महंगा है। उस स्कूल में बच्चों को महंगे फीस में भी पढ़ाने में कई अभिभावक प्रवेश दिलाने के लिए लंबा इंतजार करते हैं।

जिला में कुल 1336 स्कूल

शिक्षा हब जिला कुल्लू में अभाव है, तो सरकारी स्कूलों में अध्यापकों का। शिक्षा के क्षेत्र में यहां के बच्चे आगे पहुंच रहे हैं। हर वर्ष मैरिट में जिला कुल्लू चाहे दसवीं कक्षा की बात हो, चाहे जमा दो की, टॉप-10 में जिला कुल्लू जगह बनाता है। सत्र 2018-19 की बात करें, तो इस वर्ष जहां सरकारी स्कूलों की बेटियों ने टॉप किया है। वहीं, निजी स्कूल के छात्र भी मैरिट की सूची में आगे रहे हैं। जिला कुल्लू में कुल 1336 स्कूल हैं। वहीं, निजी स्कूल 181 के करीब हैं। 1217 सरकारी स्कूल हैं। इसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की बात करें, तो कुछेक केंद्रीय स्कूल भी हैं। जिला में प्राथमिक स्कूल सरकारी 760 हैं। मिडल स्कूल 124, हाई स्कूल 56 और सीनियर सेकेंडरी स्कूल 96 हैं। निजी और सरकारी स्कूलों को देखें, तो परीक्षा परिणाम के साथ-साथ अन्य खेलकूद सहित सांस्कृतिक गतिविधियों में कंपीटीशन रहता है, लेकिन सरकारी स्कूलों में दिक्कत यह हो गई है कि प्राथमिक स्तर पर अध्यापकों का भारी टोटा चल रहा है। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई थोड़ी गड़बड़ा रही है। हालांकि सरकार ने खराब परीक्षा परिणामों को लेकर सख्त रवैया तो अपना लिया है। सरकारी स्कूलों में अध्यापक न होने से सरकारी स्कूलों के बच्चे निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं।

सरकारी स्कूलों में गिरा छात्रों का ग्राफ

जिला कुल्लू में ही कई स्कूल खुल चुके हैं, लेकिन अगर बात सबसे पहले खुले निजी स्कूलों की करें, तो यहां आज भी छात्रों की संख्या में कमी नहीं आई है, बल्कि छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी ही देखने को मिली है, जबकि सरकारी स्कूलों में छात्रों का ग्राफ गिरा है। सरकारी स्कूलों में आज बच्चों को वर्दी, किताबें व खाने तक की सुविधा है। बावजूद इसके निजी स्कूलों में ही भारी-भरकम फीस देकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

देश-विदेश में भी चमक बिखेर रहे छात्र

प्राइवेट सेक्टर का अहम रोल

आज प्राइवेट सेक्टर की सहभागिता से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। कुल्लू जिला भी शिक्षा का हब बना है, जहां पहले चंद निजी स्कूल हुआ करते थे, वहीं आज अनेक हैं। अभिभावकों के पास बच्चों को बेहतर तालीम कहां देनी है, उसके भी कई ऑप्शन है। आज बेहतर शिक्षा के लिए बच्चे भारत के विभिन्न कोनों सहित विदेशों में भी पढ़ाई के लिए जा रहे हैं     

 — योगराज ठाकुर, शिक्षक

प्रतिभा निखारने का मिल रहा मौका

जिला कुल्लू आज शिक्षा का केंद्र यहां निजी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं की वजह से भी बना है। यहां आने वाला हर छात्र अपनी इच्छा के अनुसार अपना भविष्य तय करता है। जिला में सभी तरह के संस्थान होने के चलते छात्रों को भी प्रतिभा निखारने का मौका मिलता है। ऐसे में उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा समय की मांग भी है। आज कई पुराने शिक्षा संस्थानों में पढ़ रहे छात्र देश-विदेश में भी अपना नाम कमा रहे हैं                               

 — नीलम उपाध्याय, बुद्धिजीवी

नौकरी के लिए तैयार कर रहे कोचिंग सेंटर

जिला में आज बेहतर निजी स्कूलों के अलावा कई बेहतर कोचिंग सेंटर भी खुल चुके हैं। बच्चों को कोचिंग के लिए भी बाहरी राज्यों में जाने की जरूरत नहीं रही है। शिक्षा का हब बने कुल्लू जिला में भी आज बेहतर शिक्षा बच्चों को मिल पा रही है। वहीं, निजी स्कूलों का स्तर देखते हुए कई सरकारी स्कूलों में भी काफी अधिक सुधार देखने को मिल रहा है। जिला में शिक्षा का केंद्र बनाने में प्रतिस्पर्धा भी मुख्य कारण रही है                

— विनोद मिश्रा, सेवानिवृत्त अधिकारी

कोई कमी नहीं रख रहे संस्थान

यह सही है कि जिला कुल्लू शिक्षा का हब बन चुका है। आज निजी संस्थान भी बेहतर सुविधा देने में कोई कमी नहीं रख रहे। कोचिंग सेंटर खुलने से भी बच्चों को उच्च स्तर की पढ़ाई के लिए काफी आसानी रहती है  

— दीपक शर्मा, बुद्धिजीवी

निजी संस्थान दिला रहे नौकरी

शिक्षा का हब बनने के बाद से निजी संस्थानों में कई बेरोजगारों को भी नौकरी के अवसर प्राप्त हुए हैं, जो सरकारी के मुकाबले कई गुना आगे भी हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के छात्र भी आज निजी संस्थानों में शिक्षा ग्रहण कर हैं, जिस कारण कहीं न कहीं सरकारी स्कूलों की कमी कहीं न कहीं दिखती है। उसे भी दर्शाता है, जिसे बदलने की जरूरत भी है

— करतार ठाकुर, सेवानिवृत्त शिक्षक

सरकारी स्कूलों में हुआ सुधार, पर दौड़ अभी भी निजी को

मनाली में भी काफी अधिक निजी शिक्षा संस्थान खुल चुके हैं। इसी के साथ सैंज, बंजार, आनी जैसे उपमंडलों में भी जहां कई गांवों के बच्चे भी सरकारी स्कूल की अपेक्षा निजी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों को कुछ वर्षों में बेहतर भी किया गया है, लेकिन फिर भी निजी स्कूल खुलने और यहां प्रवेश लेने वाले छात्रों की कमी नहीं दिख रही। सरकार की और से हालांकि कई जिलों में तो प्ले-वे स्कूल सुविधाओं से लैस खोले गए हैं, लेकिन फिर भी निजी स्कूलों की तुलना इनसे नहीं की जा सकती।

खुलते जा रहे निजी स्कूल

कुल्लू शहर की अगर बात करें, तो 15 से अधिक निजी स्कूल ऐसे हैं, जो कई साल से चल रहे हैं। जहां अभी तक छात्रों की संख्या में भी कमी नहीं देखने को मिली है। स्कूल भवन सहित छात्रों की पढ़ाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। कई स्कूल तो ऐसे हैं, जहां छात्र के कमजोर होने पर शिक्षकों की सैलरी कटने के साथ-साथ कई बार उन्हें स्कूल से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है, क्योंकि इन निजी स्कूल के प्रबंधकों का भी मानना है कि अगर छात्र को बेहतर सुिवधा स्कूल में देने का दावा किया जाता है, तो अभिभावक की उम्मीद बच्चों की पढ़ाई को लेकर रहती है। उसमें किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए। ऐसे में आज भी निजी स्कूलों का क्रेज़ कुल्लू जिला में देखने को मिल रहा है। इसी के चलते अभी तक कुल्लू में निजी स्कूल खुलते ही जा रहे हैं। कुछ सालों से निजी स्कूलों की संख्या घटने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। 70 के दशक में जहां चंद ही निजी स्कूल हुआ करते थे, वहीं आज जिला भर में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 1336 स्कूल खुल चुके हैं। वहीं, सरकारी स्कूलों की अगर बात करें, तो कुल्लू में 1217 सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या निजी स्कूल के मुकाबले अधिक है। 

निजी स्कूलों में शिक्षकों की नहीं कोई कमी

शहरी क्षेत्रों के निजी स्कूलों सरकारी की अपेक्षा शिक्षकों की संख्या काफी अधिक है। जिला के कई सरकारी स्कूल ऐसे में भी हैं, जहां शिक्षकों की कमी के चलते एक अध्यापक पर ही दो से तीन कक्षाओं का भार है। यदि छात्र-शिक्षक अनुपात देखें, तो ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों के निजी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात बेहतर हैं। जिला के ग्रामीण क्षेत्र के निजी स्कूलों में पांच से लेकर 15 छात्रों पर एक अध्यापक तैनात है, जबकि शहरी क्षेत्र के निजी स्कूलों में भी 20 छात्रों पर तीन अध्यापक कार्यरत हैं। ऐसा ही हाल सरकारी स्कूलों का भी कई जगह ठीक है, लेकिन फिर भी शिक्षकों की कमी के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों के छात्रों का भविष्य भी पढ़ाई ठीक से न होने के चलते अधर में लटकी हुई है, जहां छात्रों के हिसाब से शिक्षकों की कमी है, जबकि कुछ स्कूलों में छात्रों की संख्या बेहद ही कम होने पर पूरे स्कूल का जिम्मा ही एक ही शिक्षक के हाथों में है, तो यहां कई स्कूल ऐसे भी सरकारी हैं, जो कि छात्रों की कमी होने पर बंद पड़े हैं और शिक्षक का तबादला अन्य स्कूल के लिए कर दिया गया है। यही नहीं, कुछ सरकारी शिक्षक ऐसे भी हैं, जो पढ़ाने की इच्छा कम रखते हैं। ऐसे में उन्होंने अपना तबादला सिफारिश पर शिक्षा विभाग में करवा रखा है। जहां काम भी न के बराबर रहता है, जबकि वे शिक्षक अच्छे डिग्री होल्डर हैं।

ओएलएस के 50 साल पूरे, केबीएस में पढ़ रहे 1400 छात्र

अपने दौर का सबसे प्रसिद्ध निजी स्कूल ओएलएस आज भी अपने नाम से जाना जाता है। यहां शुरुआती दौर से लेकर अभी तक स्कूल में छात्रों की संख्या बरकरार ही देखने को मिली है। हालांकि वर्तमान में भी स्कूल में छात्रों की संख्या अच्छी खासी है। केबीएस स्कूल की बात करें, तो यहां सबसे अधिक छात्र इसी निजी स्कूल में हैं। यानी 1990 के दशक में खुले स्कूल में जहां 54 छात्र शिक्षा ग्रहण करते थे, आज उस स्कूल में 14 सौ छात्र हैं। स्कूल में 81 शिक्षक हैं। यहां नर्सरी से लेकर 12वीं तक की कक्षाएं बैठती हैं। इसी के साथ भरत-भारती, डीएवी स्कूल, ट्रिनीटी स्कूल, अरुणोदय, नवज्योति, एसएमएस स्कूल ही सबसे पुराने निजी स्कूलों में शामिल हैं, जो कि आज भी बेहतर शिक्षा छात्रों को दे रहे हैं और यहां छात्रों की संख्या में किसी तरह की कोई गिरावट भी नहीं आई है।

पढ़ाई के साथ और भी बहुत कुछ सीख रहे छात्र

शहरी स्कूलों में आधारभूत ढांचा काफी विकसित होता है। पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों की सुविधा भी छात्रों को दी जाती है, जिस क्षेत्र में बच्चे की रुचि दिखती है, उसे उस क्षेत्र में आगे बढ़ने को लेकर और मेहनत उस पर की जाती है। योग्य और अनुभवी शिक्षकों की बदौलत भी शिक्षा का स्तर ऊपर उठाया जाता है

— प्रेम ठाकुर, अभिभावक

शहर के स्कूलों में आधुनिक गतिविधियों को भी अधिमान दिया जाता है, जिस कारण शहरी स्कूल के बच्चों का मानसिक व बौद्धिक स्तर बढ़ता है। प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा से ओत-प्रोत बच्चे अपना सुनहरा भविष्य चुनने के लिए सजग रहते हैं

— प्रेरणा ठाकुर, अभिभावक

शहरी स्कूल में कई बार अभिभावकों पर भी काफी प्रेशर रहता है, जहां शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावक भी बच्चों को पूरी मेहनत करवाते हैं। निजी स्कूलों में प्रतिस्पर्धा के चलते वे भी योग्य शिक्षकों को तरजीह देते हैं, ताकि उनके स्कूल का परिणाम बेहतर हो सके। आज निजी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र भी बोर्ड की परीक्षा में अव्वल रहते हैं

— शांति नेगी, अभिभावक

पर्याप्त संसाधनों के चलते छात्र अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनकर पढ़ते हैं और स्वयं ऊंचाइयां छूते हैं। ग्रामीण स्कूलों की अपेक्षा शहरों के स्कूलों में बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। साथ ही कई तरह की गतिविधियों में उसकी भागीदारी रहती है                             

— मीना पुजारी, अभिभावक

निजी संस्थानों में बेहतर सुविधा मिलने और निजी संस्थानों के खुलने से कहीं न कहीं सरकारी संस्थानों में भी सुधार देखने को मिला है। आज बच्चों को सरकारी स्कूल में बेहतर सुविधा मिलनी शुरू हो गई है। यही नहीं, निजी के मुकाबले में सरकारी स्कूलों में अधिक पढ़े-लिखे शिक्षक छात्रों को तालीम देते हैं                          

— सावित्री देवी, अभिभावक

कैंब्रिज से लेकर ज़ी किड्स स्कूल

कुल्लू शहर व आसपास के पांच किलोमीटर के दायरे में छोटे व बड़े करीब दो दर्जन स्कूल हैं। करीब दस स्कूल ऐसे हैं, जो वरिष्ठ, माध्यम स्तर के हैं, जो कि दशकों से सेवाएं दे रहे हैं। जिला में कुछ समय पहले ही शुरू हुए कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल, साइंस स्कूल, संस्कार स्कूल, साई स्टार, लिटल फ्लावर, कॉन्वेंट स्कूल, बचपन, शेमरॉक, ज़ी किड्स सहित कई शिक्षण संस्थान नर्सी से लेकर उच्च स्तर तक की बेहतरीन शिक्षा बच्चों को दे रहे हैं।

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