काडर रिव्यू में मालामाल, असल में कंगाल

हिमाचल में 153 है आईएएस काडर, वर्तमान में मात्र 86 ही दे रहे सेवाएं

शिमला -काडर रिव्यू से मालामाल हिमाचल हकीकत में आईएएस अफसरों की संख्या को लेकर कंगाल हो गया है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय की ताजा अधिसूचना के तहत हिमाचल का आईएएस काडर 153 का है, लेकिन वर्तमान में मात्र 86 प्रशासनिक अधिकारी ही हिमाचल में सेवाएं दे रहे हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और इंटर स्टेट डेपुटेशन के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। इसके अलावा डायरेक्ट आईएएस अफसरों की भर्ती में हिमाचल को कम पोस्ट मिलना इसकी मुख्य वजह है। मौजूदा समय में हिमाचल के 26 डायरेक्ट आईएएस अफसर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसके अलावा दो प्रशासनिक अधिकारी इंटरस्टेट डेपुटेशन पर सेवाएं दे रहे हैं। पांच साल की प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली निकले हिमाचल काडर के अफसर अब वापस लौटने को तैयार नहीं हैं। सियासी प्रभाव तथा ब्यूरोक्रेटिक जुगाड़ के चलते इन अफसरों ने दिल्ली में डेरा जमा लिया है। इस कारण हिमाचल में आईएएस अफसरों का अकाल पड़ गया है।  गौर हो कि केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय की नोटिफिकेशन के अनुसार हिमाचल काडर में 107 डायरेक्ट आईएएस की स्ट्रेंथ है। हालांकि इस मद में अभी सिर्फ 49 आईएएस ही प्रदेश में सेवाएं दे रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि डायरेक्ट आईएएस काडर की आधी से भी ज्यादा पोस्टें अब भी खाली हैं। खास है कि हिमाचल काडर के 28 अफसर बाहरी राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं। ताजा अधिसूचना के तहत प्रोमोटी आईएएस अफसरों की संख्या अब 44 से बढ़कर 46 हो गई है। इसके विरुद्ध मौजूदा समय में 37 प्रोमोटी आईएएस अफसर ही मौजूद हैं। इस कारण प्रोमोटी अफसरों के नौ पद खाली चल रहे हैं। हालांकि इनमें उपायुक्त लाहुल-स्पीति कमलकांत सरोच तथा मार्केटिंग कमेटी के एमडी नीरज कुमार इसी साल आईएएस काडर में शामिल हो जाएंगे।  इस साल के अंत तक दो और प्रोमोटी आईएएस रिटायर होंगे। इस कारण अगले साल अगस्त माह के आसपास नौ एचएएस अफसर आईएएस काडर में आ जाएंगे। हिमाचल में सेवाएं दे रहे संदीप कदम और ललित जैन सहित कई आईएएस अफसर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते हैं। इसके विपरीत वापस आने को कोई तैयार नहीं है। हालांकि राज्य सरकार को वर्ष 1997 बैच के रजनीश तथा वर्ष 1989 बैच के संजय मूर्थी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस लौटने की पूरी उम्मीद है।

हिमाचली मूल के कई अफसर प्रदेश में ही खुश

हिमाचली मूल के कई अफसरों ने सेंट्रल डेपुटेशन  के ऑफर को ठुकरा कर प्रदेश में ही सेवाएं देने को प्राथमिकता दी है। इनमें अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी धीमान, प्रधान सचिव जगदीश शर्मा और प्रधान सचिव ओंकार शर्मा के नाम शामिल हैं। इसके अलावा मुख्य सचिव डा. श्रीकांत बाल्दी और एसीएस संजय गुप्ता ने भी सेंट्रल डेपुटेशन की बजाय हिमाचल को प्राथमिकता दी है।

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