गेयटी थियेटर में कै दियों ने दिखाया हुनर 

शिमला में कैदियों के बनाए उत्पादों की सजी प्रदर्शनी; प्रतिभा देख दर्शक दंग, जमकर हो रही खरीददारी

शिमला-जेल एवं कारागार सुधार विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में कैदियों द्वारा निर्मित उत्पादों की 6 दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य कैदियों को समाज की मुख्य धारा के साथ जोड़ना है। सोमवार को गेयटी थियेटर में सजी हाथों से बनी प्रदर्शनी को देखने के लिए काफी संख्या में दर्शक पहुंचे। प्रदर्शनी में आने वाला हर एक व्यक्ति कैदियों द्वारा बनाए गए सामान की खू्रब प्रशंसा कर रहा है। हिमाचल की जेलों में रह रहे कैदी अपने हुनर से विभिन्न उत्पाद तैयार कर जीविका भी कमा रहे हैं। छह दिनों तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में कैदियों के विभिन्न उत्पाद लगे हैं, जिनकी लोग खरीददारी भी कर रहे हैं। कैदियों के हुनर को निखारने और उनके लिए जीविकोपार्जन के अवसर उपलब्ध करवाने के जेल विभाग द्वारा प्रयास किए जा रहे हंै। जेलों में कैदियों द्वारा विभिन्न उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जिससे उनकी अच्छी कमाई भी हो रही है। वहीं गेयटी में इन दिनों सजी प्रदर्शनी दर्शकों द्वारा भी खूब पसंद की जा रही है। हिमाचल में सेंट्रल जेल कंडा के अलावा कई दूसरी जेलों में भी कैदी जीविका कमाने के लिए उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इन जेलों में सूती व ऊनी वस्त्र, शॉल्स, मफलर, जुराबों के अलावा कंबल, दरियां और लकड़ी से बना सजावटी सामान, चीड़ के पत्तों के बने शोपीस जैसे उत्पाद कैदियों द्वारा तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा कंडा जेल व सब-जेल कैथू में कैदी बेकरी तैयार कर अपनी जीविका कमा रहे हैं। इस तरह के कार्यों से कहीं न कहीं कैदी भी समाज के साथ जुड़ रहे हैं। जहां वह अपने हाथों से उत्पाद तैयार कर अपने परिवार का खर्च भी पूरा कर रहे हैं। ऐसे में कैदियों के इन उत्पादों की बिक्री के लिए यह प्रदर्शनी लगाई है। इसमें कैदियों द्वारा तैयार किए गए फर्नीचर भी उपलब्ध हैं।

मिठाइयों की जमकर खरीददारी कर रहे लोग

गेयटी में कैदियों द्वारा अलग-अलग मिठाइयां बनाई गई हैं। कैदियों द्वारा बनाई गई मिठाइयों की खास बात तो यह है कि ये लोगों को बहुत पसंद आ रही हैं। ऐसे में लोग देखते ही मिठाइयों की खरीददारी कर रहे हैं। मिठाइयों में खोया जो 400 रुपए किलो, मिल्क केक 400 रुपए किलो, कलाकंद 400 रुपए किलो में खरीदा जा रहा है।

कै दियों द्वारा तैयार किया गया फर्र्नीचर

गेयटी में इन दिनों लकड़ी के फर्नीचर जो देखने में काफी सुंदर हैं वे कैदियों द्वारा निर्मित हैं। कैदियों द्वारा बहुत ही सुंदर लकड़ी के फर्नीचर जिसमें डाइनिंग टेबल, कुर्सियां, सजावट का सामान दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हंै। गेयटी में सजा समान दर्शकों को इतना पसंद आ रहा है कि वे खरीददारी भी कर रहे हैं। कैदियों द्वारा बनाए गए सामान को लोग अपने घर ले जा रहे हैं। कैदियों द्वारा खड़ी से बनी पट्टु, शाल, मफलर, कंबल बनाए गए हैं, जो देखने में काफी सुंदर हैं और दर्शक भी इन्हें देखते ही खरीद रहे हैं।

 

प्लास्टिक का उपयोग न करने के लिए किया प्रेरित

कैदियों द्वारा लोगों को पर्यावरण को साफ-सुधरा रखने व जूट सहित कपड़े के थैलों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके लिए कैदियों ने हाथों से बने कपड़े व जूट के थैले को बढ़ावा देने की बात कही। इसके साथ ही पर्यावरण को साफ रखने के लिए गोबर व खाद के गमले बनाए गए हैं, जो देखने में काफी सुंदर हंै। इन गमलों की खास बात तो यह है कि ये गोबर व खाद्य से बनाए गए हैं, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा।

कैदियों ने तैयार किए चंादी के आभूषण

कैदियों द्वारा चंादी के सुंदर आभूषण भी तैयार किए गए हैं। जिन्हें देख कर महिलाएं खरीददारी कर रही हैं। महिलाओं को आभूषण बहुत प्रिय होते हैं। वहीं कैदियों द्वारा भी इस बात का खास ख्याल रखा जा रहा है। ऐसे में लेटेस्ट डिजाइन के गहने बनाए गए हंै, जिसमें कानों के झुमके, हाथों के लिए सुंदर अंगूठियां बनाई गई हैं। शिमला में बाहरी राज्यों से आए सैलानी गेयटी में सजी प्रदर्शनी को खूब पसंद कर रहे हैं। 

परिवार की जरूरतें कर रहे पूरी

गेयटी में सजी कैदियों द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रदर्शनी दर्शकों को खूब पसंद आ रही है। इसी के साथ ही कैदियों को समाज के साथ जोड़ने व उनके द्वारा किए गए कार्यों को लोगों के सामने लाया जा रहा है। ऐसे में कैदियों को समाज के साथ जोड़ा जा रहा है। साथ ही उनकी सोच व उन्हेें सुधरने का एक मौका दिया जा रहा है। खास बात तो यह है कि कंडा जेल में कैदियों द्वारा जो भी उत्पाद तैयार किया जाता है। उस सामान से प्राप्त होने वाले पैसों को वे अपने परिवार को भेजते हैं। इससे उनके परिवार की छोटी बड़ी जरूरतें पूरी हो जाती हैं।

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