चुनावों में आचार संहिता का सच

-रूप सिंह नेगी, सोलन

जब से देश में एमएलए के चुनाव शुरू हुए हैं, तब से आज तक आचार संहिता उल्लंघन के हजारों मामले  सामने आए होंगे और यकीनन एफआईआर भी दर्ज हुए होंगे, पर कितने प्रत्याशियों के चुनाव रद् हुए होंगे या सजा मिली होगी? यदि मामलों का यही अंजाम होता रहा होगा तो आगे कहने को क्या बचता है? चुनाव कमीशन एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है और उसे कई  शक्तियां हासिल हैं, देश की जनता को इस संस्था से उम्मीदें होती हैं कि देश में चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्ष हो कर आचार संहिता उल्लंघन करने वाले दलों, उन के नेताओं एवं प्रत्याशियों पर वाजिब कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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