छेड़ेंगे, तो छोड़ेंगे नहीं

यह कथन हमारे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का है। पाकिस्तान और आतंकवाद के संदर्भ में उन्हें ऐसी टिप्पणी करनी पड़ी थी। रक्षा मंत्री ने यहां तक भविष्यवाणी की थी कि एक दिन खुद पाकिस्तान खंड-खंड हो जाएगा। फिलहाल रक्षा मंत्री का कथन प्रासंगिक है, जो 20 अक्तूबर को साकार हो उठा। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से कुछ गरजती हुई आवाजें सुनाई दीं, धुएं के गुब्बार आसमान को काला करने लगे और चीख-पुकार भी मची। यह आतंकवाद पर भारतीय सेना का एक और प्रहार था, एक और पलटवार और शहादतों का प्रतिशोध…। यह दुनिया जानती है कि पाकिस्तानी फौज सीमापार से लगातार युद्ध विराम का उल्लंघन करती रही है। एक हमला कश्मीर के तंगधार इलाके में भी किया गया, जिसमें हमारे दो जवान ‘शहीद’ हो गए और एक मासूम ग्रामीण भी मारा गया। संभवतः इसी बिंदु पर भारतीय सेना का सब्र छलक उठा और तंगधार हमले के करीब तीन घंटे बाद ही पीओके की नीलम घाटी के आतंकी अड्डों को निशाना बनाते हुए तोप के गोलों की बरसात कर दी गई। हमला बोफोर्स तोप के जरिए किया गया, जिन्होंने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के परखचे उड़ा दिए थे। पीओके में तंगधार के करीब ही 24 आतंकी लांच पैड बनाए गए थे, जिनमें करीब 200 आतंकियों की मौजूदगी बताई गई है। हमारे सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने मीडिया को खुलासा किया कि हमले में पाक फौज के 6-10 सैनिक मारे गए और करीब 10 आतंकियों को ढेर कर दिया गया। आतंकियों की संख्या ज्यादा भी हो सकती है, क्योंकि सूचनाएं तब आ रही थीं। सेना प्रमुख ने यह भी पुष्टि की कि नीलम घाटी में जूरा, कुंदलशाही और अथमुकम आतंकी कैंप पूरी तरह तबाह कर दिए गए हैं, जबकि चौथे कैंप को भी भारी नुकसान पहुंचा है। बहरहाल सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद एक बार फिर भारतीय सेना ने पाकिस्तान और आतंकियों की साजिशों की कमर तोड़ दी है। पाकिस्तान की फौज अभी तक युद्ध विराम उल्लंघन को लुका-छिपी का खेल मानती रही थी। चूंकि अक्तूबर महीने के बाद सर्दी बढ़ने लगती है और बर्फबारी की आहट सुनाई देने लगती है, लिहाजा युद्ध विराम उल्लंघन के जरिए आतंकियों की कश्मीर में घुसपैठ की साजिश को समझा जा सकता है। भारतीय सेना ने उस साजिश को बिल्कुल नेस्तनाबूद किया है। अपुष्ट खबरें तो यहां  तक हैं कि इस हमले में करीब 35 आतंकी मारे गए हैं और जो घायल हुए हैं, वे अब आतंकवाद के काबिल नहीं रहेंगे। पाकिस्तान का एक तोपखाना भी तबाह कर दिया गया है और फौज का ब्रिगेड मुख्यालय भी ध्वस्त किया गया है। गौरतलब यह है कि पाकिस्तान फौज के प्रवक्ता ने भी भारत के हमले की पुष्टि की है। अलबत्ता मारे गए जवानों की संख्या कबूल नहीं की है। बहरहाल अब सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान इससे कोई सबक सीखेगा? हमारा मानना है कि पाकिस्तान आतंकवाद को कभी नहीं छोड़ेगा, क्योंकि वहां की फौज के जनरल और खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकवाद को जारी रखने की पैरोकार हैं। आतंकवाद उनके नापाक मंसूबों का जरिया है। चूंकि पाकिस्तान की फौज भारतीय सेना के खिलाफ  सीधी लड़ाई लड़ने में अक्षम है, लिहाजा वह अपने मंसूबे आतंकियों की छुट-पुट लड़ाइयों के जरिए पूरे करती रही है। उसके लिए 25-30 आतंकियों का मरना कोई बड़ा नुकसान नहीं है, लेकिन सीधी लड़ाई में पाकिस्तान का वजूद ही खत्म हो सकता है, यह पाक फौज का एहसास है। लिहाजा पाकिस्तान की तरफ  से लगातार युद्ध विराम उल्लंघन किया जाता रहेगा। इसी साल सितंबर महीने तक पाकिस्तान 2050 बार उल्लंघन कर चुका है। इसी से उसकी रणनीति समझी जा सकती है, लेकिन ऐसे विनाशक पलटवार भी नए भारत की आतंकवाद के खिलाफ  एक ठोस रणनीति है। उसका विस्तार जरूरी है, क्योंकि पूरी दुनिया चाहती है कि अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की जानी चाहिए। बीते कल ही हमने फाट्फ  में पाक परस्त आतंकवाद का विश्लेषण किया था। यदि भारत भी पाकिस्तान की आतंकी साजिशों को फाट्फ  में बेनकाब करता रहे, तो पाकिस्तान का बेड़ा गर्क  होना तय है।

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