छोटी काशी बड़े मुकाम पर

Oct 7th, 2019 12:10 am

क्वालिटी एजुकेशन के लिए हिमाचल में तीसरे पायदान पर कब्जा कर शिक्षा का हब बन उभरी छोटी काशी मंडी हर रोज नई बुलंदियां छू रही है। 2448 स्कूलों में 72619 छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रहे मंडी ने इस अरसे में एक ऐसी क्रांति लाई कि शिक्षा के साथ-साथ खुले रोजगार के दरवाजों से प्रदेश ने तरक्की की राह पकड़ ली। हिमाचली ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के होनहारों का कल संवार रहे जिला मंडी में क्या है शिक्षा की स्थिति, बता रहे हैं हमारे संवाददाता —अजय रांगड़ा

छोटी काशी के नाम से प्रख्यात मंडी जिला एक शिक्षा हब के रूप में अलग पहचान के साथ उभर रहा है, जिसके चलते मंडी जिला में इंटरनेशनल व राष्ट्रीय स्तर के शिक्षण संस्थान खुल चुके हैं। जिला मंडी के शैक्षणिक संस्थान गुणात्मक शिक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत रहे हैं। मंडी शहर व आसपास क्षेत्रों में करीब 14 निजी स्कूल शिक्षा क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जिला के दुर्गम क्षेत्रों के लोग अच्छे शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने के लिए मंडी शहर में क्वार्टर लेकर रह रहे हैं। वहीं, शहर में करीब दस से अधिक सरकारी स्कूल भी बच्चों को शिक्षा मुहैया करवा रहे हैं। शहर में मौजूद सरकारी स्कूलों में बड़ी इमारतें व खेल मैदान मौजूद हैं, जबकि शहर में मौजूद कुछ निजी स्कूलों में खेल मैदान नहीं हैं। प्रार्थना सभाएं सहित अन्य गतिविधियां स्कूल के हॉल में आयोजित की जाती हैं, जबकि कुछ स्कूलों में खेल के मैदानों सहित बच्चों को विभिन्न प्रकार के झूले, आलीशान पुस्तकालय, शानदार प्रयोगशाला भी उपलब्ध करवाई गई हैं। 

हिमाचल में तीसरे नंबर पर मंडी

इस बार स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में जिला मंडी प्रदेश में तीसरे स्थान पर रहा। डैश बोर्ड सर्वे में जिला को यह  रैंकिंग प्राप्त हुई है। शैक्षणिक सत्र 2018-19 में जिला मंडी के 2448 स्कूलों में 72619 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। इसमें 54.8 प्रतिशत बच्चों ने ए व बी ग्रेड में कक्षाएं पास की। इन सभी बच्चों के अंक 80 प्रतिशत से ज्यादा हैं। लाहुल-स्पीति व हमीरपुर को छोड़ अन्य सभी जिलों में ग्रेडिंग व अंक प्रतिशत मंडी से कम रही है। इससे पहले शैक्षणिक सत्र 2017-18 में क्वालिटी एजुकेशन में मंडी का रैंकिंग में पांचवां स्थान था। शिक्षा विभाग ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए और मंडी तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान मंडी में ट्रेनिंग दी जाती है।

मंडी ब्वायज स्कूल का इतिहास पुराना

मंडी शहर के सरकारी स्कूलों की बात करें, तो राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मंडी का इतिहास बहुत पुराना है। मंडी के राजा विजय सेन द्वारा स्कूल को वर्ष 1866 में मिडल के रूप में शुरू किया गया था। इस दौरान नाम एंग्लो वर्नाकुलर मिडल स्कूल लिखा था, जिसकी पट्टिका स्कूल में डिटेल सहित मौजूद है। काष्ठकुणी शैली में बने इस स्कूल में पुस्तकालय सहित अन्य सुविधा थी। देश के आजाद होने पर 39 वर्ष बाद इस स्कूल को सीनियर सेकेंडरी का दर्जा मिला था। इसके बाद मंडी स्कूल का विजय हाई के रूप में वर्ष 1921 में दर्जा बढ़ाया गया, जबकि जुलाई,1986 में राजकीय विजय वरिष्ठ माध्यमिक बाल पाठशाला के रूप में स्तरोन्नत हुआ। वर्तमान में स्कूल में करीब 479 छात्र पढ़ रहे हैं, जबकि पाठशाला में शिक्षक 30 सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 1866 से निर्मित ऐतिहासिक धरोहर विजय स्कूल मंडी में छोटी काशी की रिसासत की संस्कृति की झलक दिखेगी। इन दिनों रियासतकालीन के इस स्कूल को पुराने स्वरूप में लाने का कार्य चल रहा है। स्कूल में जल्द ही म्यूजियम, लाइब्रेरी सहित अन्य सुविधा दी जाएगी।

मंडी जिला में कुल स्कूल         2956     

सरकारी स्कूल  2505            प्राइवेट स्कूल          429        सीबीएसई 22

छात्र       125476   छात्र       28561     छात्र       15000

मंडी शहर के निजी स्कूल, जो संवा रहे कल

डीएवी सेंटेनरी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला स्कूल (लोअर खलियार मंडी), डीएवी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (आर्य समाज), स्वामी विवेकानंद वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रामनगर मंडी, दिव्य ज्योति पब्लिक स्कूल मंडी, अल्पाइन पब्लिक स्कूल मंडी, एआरसी स्कूल मंडी, गुरु गोबिंद सिंह वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मंडी, संस्कृत एंग्लो वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नेला (मंडी), इंडस ग्लोबल इंटरनेशनल स्कूल मंडी, फोनिक्स वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मंडी, सनातन धर्म विद्या मंदिर स्कूल मंडी, ओकवुड पब्लिक स्कूल, एनसी मॉडल पब्लिक स्कूल मंडी, विपाशा पब्लिक स्कूल पुरानी मंडी सहित अन्य स्कूल शामिल हैं, जो बच्चों को गुणात्मक शिक्षा देने के लिए अग्रसर हैं।

शहरी माहौल संकरा

मंडी शहर में निजी करीब 14 स्कूल हैं, जबकि दस से अधिक सरकारी स्कूल हैं। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों के भवनों में काफी अंतर है। शहरी क्षेत्र अधिक संकरा होने के कारण भवन के आकार भी संकरे हैं। कुछ स्कूल शहर की तंग गलियों में चल रहे हैं, जबकि कुछ स्कूल राष्ट्रीय उच्च मार्ग के किनारे स्थित हैं। कई स्कूल ऐसे हैं, जो शिक्षा विभाग के नियम पूरा नहीं करते हैं। शहर के अधिकांश स्कूलों में खेल मैदान गायब हैं। प्रार्थना सभा लेकर खेलकूद मात्र एक हॉल में होती है, जबकि शहर के साथ सटे कुछ निजी स्कूलों में खेल मैदान है। वहीं, अगर बात करें तो सरकारी स्कूलों की, तो सरकारी स्कूल चाहे शहर में हो या गांव में जिला के अधिकांश स्कूलों खुला मैदान है, जिसके चलते मैदानों में खेल स्पर्धाओं के लिए अलावा अन्य गतिविधियां बेहतर ढंग से की जा रही हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के निजी स्कूलों के भवन व खेल मैदान बेहतर होते हैं। अगर बात की जाए तो सरकारी स्कूलों के भवनों की, तो सरकारी स्कूल का कैंपस बिलकुल सही होता है। मैदान में ही प्रार्थना सभा, बास्केटबाल मैदान, कबड्डी मैदान सहित समस्त खेलकूद के लिए मौजूद है।    

अभिभावकों से बातचीत

बेसिक एजुकेशन पर फोकस

शहरी स्कूलों में बच्चों को गुणात्मक शिक्षा दी जाती है। बच्चों का बेसिक लेवल बेहतर बनाने के लिए फोकस किया जाता है। अगर बेसिक स्तर बेहतर होगा, तो बच्चे प्रत्येक विषय को आसानी से समझ सकते है। वहीं, योग्यता के अनुसार बच्चों को कंपीटीशन के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए                               रीना कुमारी, अभिभावक

कंपीटीशन को भी तैयार हों बच्चे

शहरी व ग्रामीण स्कूलों में शिक्षा का स्तर गुणवत्ता से भरपूर होना चाहिए। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ कंपीटीशन के लिए भी तैयार किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों का आगामी दौर में भविष्य उज्ज्वल हो सके

कृष्णा सकलानी, अभिभावक

जांच परख रखे जा रहे शिक्षक

शहरी स्कूलों में बच्चों को तमाम सुविधा मिलती है। शहरी स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज और शिक्षक सही पैमाने पर रखे जाते हैं। पहले के समय स्कूलों में शिक्षकों को डिग्री के आधार पर रख लिया जाता था, लेकिन अब स्कूलों में शिक्षकों को पूरी तरह जांच परख रखा जाता है। शहरी स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों पर फोकस किया जाता है शिवांशु भारद्वाज, अभिभावक

स्कूलों में कई एक्टिविटीज़

मंडी जिला शिक्षा हब के रूप में उभर रहा है। बदलते परिवेश के चलते अब स्कूलों में विभिन्न प्रकार की एक्टिविटीज करवाई जा रही हैं, जिसके चलते बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों के लिए ट्रेंड हो रहे हैं

सुनील कुमार, अभिभावक

मैरिट में चमक रहे छात्र

विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर ही उत्तम, श्रेष्ठ एवं गुणात्मक शिक्षा उपलब्ध हो, इस दिशा में संस्थान प्रदेश व देश के बच्चों को गुणात्मक शिक्षा उपलब्ध करवाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस वर्ष बोर्ड की परीक्षा में बच्चे मैरिट में स्थान प्राप्त कर नाम रोशन कर रहे हैं

विनोद कुमार, अभिभावक   

दुर्गम इलाकों के बच्चों का बढ़ा पढ़ाई में रुझान

काफी बदला शिक्षा का स्तर

मंडी जिला शिक्षा का हब बन गया है, क्योंकि पहले के समय के मुकाबले, अब शिक्षा के स्तर में काफी बदलाव हुआ है। स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज, पढ़ाई को प्रयोगात्मक विधि से सीखना सहित अन्य गतिविधियां करवाई जाती हैं। अब स्कूल से बच्चों के माता-पिता से सीधा संवाद हो जाता है

अंजु शर्मा, प्रधानाचार्य

बाहर जाने से बचे छात्र

शिक्षा के क्षेत्र में मंडी जिला में बहुत शिक्षण संस्थान खुल चुके हैं, जिसका लाभ जिला के युवाओं को मिल रहा है। अब किसी को भी डिग्री व डिप्लोमा के लिए बाहरी राज्यों की तरफ नहीं जाना पड़ रहा, क्योंकि सभी प्रकार के शिक्षण संस्थान, मंडी में व्यापक स्तर खुल चुके हैं

सीता राम वर्मा, राष्ट्रीय पुरस्कृत शिक्षक

घर के पास बेस्ट एजुकेशन

समस्त शिक्षण संस्थान बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। बच्चों को अब उच्च शिक्षा भी घर के नजदीक ही मिल रही है। शैक्षणिक संस्थान बच्चों को गुणात्मक शिक्षा देकर उनका भविष्य उज्ज्वल करने में बेहतरीन योगदान दे रहे हैं

दीनानाथ शास्त्री, सेवानिवृत्त शिक्षक

कड़ी मेहनत का ही नतीजा

शिक्षकों की कड़ी मेहनत के चलते मंडी शिक्षा के क्षेत्र में उभरा। क्योंकि वर्तमान समय में अध्यापक अभिभावकों का ध्यान विभिन्न उत्कृष्ट गतिविधियों के माध्यम से आकर्षित करने में कामयाब हुए हैं। दुर्गम क्षेत्र के स्कूलों में भी बच्चों का पढ़ाई में रूझान बढ़ा है

दलीप चौहान, राज्य शिक्षक अवार्डेड

हर एक्टिविटी ऑनलाइन

बच्चों को गुणात्मक शिक्षा देने के लिए जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, मंडी डाईट व स्कूल मुखिया एकजुट होकर कार्य कर रहे हैं। शिक्षा विभाग की समस्त गतिविधियों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रत्येक विषय को लेकर स्कूलों से सीधे संवाद हो रहा है

अशोक शर्मा, उपनिदेशक, उच्च शिक्षा

प्राइवेट स्कूलों में बच्चों के हिसाब से शिक्षक

मंडी जिला में सरकारी स्कूलों की संख्या करीब 2505 है, जबकि 429 के करीब निजी स्कूल है। इसके अलावा जिला में 22 सीबीएसई स्कूलों में करीब 20 हजार छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शहरी स्कूलों में अध्यापकों की संख्या बच्चों की संख्या पर निर्भर करता है, लेकिन शहरी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की संख्या 30-50 तक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की संख्या 15-20 तक है। भले ही जिला में सरकारी स्कूलों की संख्या अधिक हो, लेकिन बोर्ड के परीक्षा परिणाम शिक्षा के हब को निराश कर रहा है। आलम यह है कि सरकारी स्कूलों में किसी न किसी विषय में बच्चों की कंपार्टमेंट रही है, जिसके चलते परीक्षा परिणाम निराशाजनक रहता है, जबकि निजी स्कूलों में कंपार्टमेंट काफी कम रहती है। परिणाम भी शत-प्रतिशत रहता है। निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ प्रायोगिक परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती है, जिसके चलते निजी स्कूलों की तरफ अभिभावकों का रुझान बढ़ रहा है।

1978 से शुरू हुआ निजी स्कूलों का कारवां

मंडी जिला में निजी स्कूलों का कारवां वर्ष 1978 से शुरू हुआ। मंडी शहर के साथ पैलेस कालेनी में स्थित मंडी पब्लिक वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला 41 वर्ष से चल रही है। इस स्कूल में करीब 16 शिक्षकों का स्टाफ है। शुरुआत में मंडी पब्लिक स्कूल मिडल से शुरू हुआ था। इस दौरान शहर में खुले निजी स्कूल में पढ़ने के लिए बच्चों में काफी क्रेज रहा। स्कूल के प्रधानाचार्य डिंपल का कहना है कि स्कूल में मेडिकल व नॉन मेडिकल स्ट्रीम सहित अन्य विषय की सुविधा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में स्कूल में करीब 150 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। मंडी शहर में इस स्कूल के साथ एक अन्य स्कूल सेंट स्टीफन पब्लिक स्कूल खुला था, लेकिन कुछ वर्ष बाद स्कूल बंद हो गया।

सरकारी स्कूलों को कार्यक्रमों से नहीं फुर्सत

वर्ष भर सरकारी स्कूलों में फाइलों के कामकाज के साथ अन्य कार्य काफी बढ़ गए हैं। कभी शिक्षकों की विभागीय ड्यूटी लगा दी जाती है, तो कभी खेलकूद गतिविधियों के अलावा विशेष अभियान के लिए बच्चों को तैयार करने का दौर जारी रहता है। कोई एक ऐसा दिवस नहीं बचता, जिसे बच्चे जागरूकता रैली निकाल नहीं मनाते। आज तक बच्चों द्वारा निकाली गई जागरूकता रैली से मकसद पूरा नहीं हो पाया है। उल्टा नशाखोरी सहित अन्य मामले बढ़ते जा रहे हैं। इसी दौरान स्कूल में खंड स्तरीय, जोनल स्तरीय, जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय खेलकूद का दौर शुरू हो जाता है। समस्त गतिविधियों को सहज ही पता चलता है कि पढ़ाई को बच्चे कितना समय निकाल पाते हैं, जबकि निजी स्कूलों में निर्धारित दिवस ही मनाए जाते हैं। निजी स्कूल उन्हीं दिवसों को मनाते है। जिनसे बच्चों को लाभ पहुंच सके। मंडी जिला के शहरी क्षेत्रों में क्रेच व प्ले-वे स्कूलों का निरंतर प्रचलन बढ़ गया है, जिसके चलते अभिभावक अपने बच्चों को बचपन से ही सीखने के स्तर को मजबूत करना चाहते हैं, ताकि प्रथम कक्षा में पहुंचने से पहले परिपक्व हो सकें, जबकि कुछ अभिभावक जॉब के चलते अपने बच्चों को सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक क्रेच में छोड़ देते हैं।

 

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