ज्यादा टैरिफ के फेर में फंसी लूहरी परियोजना

रामपुर बुशहर – 21 पंचायतों को लाभान्वित करने वाली लूहरी परियोजना पर बढ़ा हुआ टैरिफ भारी पड़ता नजर आ रहा है। भारत सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक इस परियोजना का प्रति यूनिट टैरिफ साढ़े चार रुपए से कम नहीं आता, तब तक इस परियोजना को स्वीकृति नहीं दी जा सकती। यानी महंगी बिजली खरीदने को भारत सरकार राजी नहीं है। जानकारी के मुताबिक मौजूदा समय में लूहरी परियोजना की तरफ से जो टैरिफ प्लान प्रति यूनिट गया है, वह पांच रुपए 80 पैसे के लगभग है, जो काफी ज्यादा है। ऐसे में इस बढ़े हुए टैरिफ प्लान को कम करना अब परियोजना प्रबंधन के लिए चुनौती है। परियोजना के बढ़े हुए टैरिफ में प्रभावित पंचायतों की भूमि खरीद अहम रोल अदा कर रही है। ऐसे में जब तक प्रभावित पंचायतों की जमीन खरीद का मूल्य कम नहीं होता, तब तक टैरिफ नीचे आना मुश्किल है। इसके अलावा परियोजना के डिजाइन व अन्य खर्चों को कम करना परियोजना प्रबंधन का आंतरिक मामला है। इस पर परियोजना प्रबंधन ने काम करना शुरू कर दिया है। अब परियोजना प्रबंधन प्रभावित पंचायतों के उन ग्रामीणों को समझाने में जुटा है, जो इस परियोजना से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। यानी जो जमीन परियोजना में आ रही है, उसकी बाजार कीमत कम होनी चाहिए। इसके लिए परियोजना प्रबंधन उन प्रभावितों को यह समझाने में जुटी है कि यह परियोजना अगर बनती है, तो उनका ही क्षेत्र विकसित होगा। ऐसे कई कार्य, जो सीएसआर के तहत इन पंचायतों में शुरू किए जाएंगे। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। वहीं, परियोजना प्रबंधन का कहना है कि उनका प्रभावितों को समझाना रंग ला रहा है। कई प्रभावितों ने अपनी जमीन के रेट कम करने पर सहमति व्यक्त कर दी है। अगर प्रभावितों ने परियोजना प्रबंधन का इस समय साथ दिया तो निश्चित तौर से इस परियोजना के शुरू होने में वक्त नहीं लगेगा।

तीन चरणों में होना है परियोजना का निर्माण

इस परियोजना का निर्माण तीन चरणों में होना है। इसमें स्टेज-1 नीरथ के पास प्रस्तावित है, जो 210 मेगावाट की बननी है। वहीं, स्टेज-2 नांच के पास बननी है। यह 172 मेगावाट की है, जबकि तीसरी स्टेज सुन्नी के पास बननी प्रस्तावित है। यह 370 मेगावाट की है। प्रोजेक्ट से कुल 21 पंचायतें प्रभावित होंगी। इनमें शिमला, मंडी व कुल्लू शामिल हैं।

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