धर्मशाला अस्पताल बिन विशेषज्ञ चिकित्सक फटेहाल

आधा दर्जन स्पेशिलिस्ट संग 10 डाक्टरों की जरूरत, जिला का दूसरा सबसे बड़े हास्पिटल बन गया है डिस्पेंसरी

धर्मशाला – क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला को विशेषज्ञ डाक्टरों के सख्त जरूरत है। स्मार्ट सिटी का अस्पताल स्पेशलिस्ट डाक्टर न मिल पाने के कारण खुद ही बिमार होने की स्थिति में पहुंच गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई वर्षों से रिक्त चल रहे पदों को भरा गया है, लेकिन आधा दर्जन के करीब मुख्य ओपीडी विभाग में एकमात्र विशेषज्ञ होने के कारण लोगों को भी बड़ी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज का जिम्मा संभालने वाले अस्पताल को अब डिस्पेंसरी के रूप में बदल दिया गया है, लेकिन सरकार व स्वास्थ्य विभाग को बार-बार प्रोपोजल भेजने पर भी विशेषज्ञ डाक्टरों की जरूरत के अनुसार नियुक्ति नहीं की जा रही है। मौजूदा समय में कई विभागों में नियुक्ति के बाद भी अस्पताल में 10 डाक्टरों के पद रिक्त ही चल रहे हैं, जिसमें पांच विशेषज्ञ डाक्टर भी शामिल है। धर्मशाला में महत्त्वपूर्ण ओपीडी गायनी, मेडिसन एमडी, ऑर्थो, चर्म रोग एवं मनोचिकित्सक में विशेषज्ञों की कमी है। साथ ही माइक्रोबायोलॉजी विभाग से भी एक ट्रांसफर कर दी गई है, जिस कारण विशेषज्ञ के अपातकालीन ड्यूटी या फिर अवकाश पर होने के कारण लोगों को बहुत अधिक परेशानियां झेलनी पड़ रही है। धर्मशाला अस्पताल में कुल डाक्टरों के 37 स्वीकृत पद हैं, जिसमें 27 पदों पर चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। कई वर्षों से रिक्त चल रहे विशेषज्ञ चिकित्सकों के पदों को सरकार व स्वास्थ्य विभाग भरने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। जिसके कारण अब जिला का दूसरा सबसे बड़े अस्पताल डिस्पेंसरी बनने की कगार पर पहुंच गया है। इतना ही नहीं अस्पताल में डाक्टरों की कमी के कारण मरीजों के साथ-साथ सेवाएं प्रदान करने वाले चिकित्सकों को भी स्टाफ की कमी के कारण परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।  जिला मुख्यालय धर्मशाला में चलने वाला अस्पताल टांडा के बाद सबसे अधिक क्षेत्रों के मरीजों के लिए सुविधा प्रदान करता है। जिला ही नहीं पड़ोसी जिला चंबा के मरीज भी इलाज करवाने के लिए धर्मशाला में पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ न होने से उन्हें परेशानी झेलनी पड़ती है।

जरूरी ओपीडी राम भरोसे

क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में अति महत्त्वपूर्ण ओपीडी ही राम भरोसे चल रही है। इनमें एक डाक्टर ही अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं और उनके अवकाश व अन्य स्थान पर ड्यूटी होने पर मरीजों को सुविधा नहीं मिल पाती। इनमें मेडिसन ओपीडी में एक, गायनी में एक, आर्थो में एक, चर्म रोग में एक और मनोचिकित्सक विभाग भी एक-एक डाक्टर के सहारे चल रहे हैं।

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