नैतिकता का सबक जरूरी

-राजेश कुमार चौहान, जालंधर

सुबह उठकर सबसे पहले अपने बच्चों को अच्छे संस्कारों की शिक्षा दी जाए तो यह बच्चों के सुनहरे भविष्य के निर्माण में संजीवनी का काम होगा। अच्छे संस्कार नैतिकता की राह की ओर अग्रसर करते हैं और नैतिकता की भावना कभी भी बच्चों को जिंदगी में पथभ्रष्ट नहीं होने देती।  हम जिस तरह से बच्चों की परवरिश करते हैं उससे भारत का भविष्य तय होता है’। बहुत  बड़ी चिंता का विषय है कि आज भौतिकतावाद और आधुनिकता की दौड़ ने बच्चों का बचपन छीन लिया है, नैतिकता और अच्छे संस्कारों की शिक्षा उचित रूप से बच्चों को न घर में दी जा रही और न ही शिक्षा संस्थानों में। संस्कारशाला के बिना बच्चे कुंठा, तनाव और अपराध प्रवृत्ति के हो रहे हैं। अगर बच्चों को शिक्षा संस्थानों में भी नैतिकता और संस्कार सिखाए जाएं तो भी बच्चे नैतिकता की राह चलें, अपने गुरुओं, माता-पिता और अपने से बड़ों का सम्मान करें।

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