नोटबुक नहीं, दिमाग पर रहेगा फोकस

शिमला  – राज्य के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों को नोटबुक भूलनी होगी। नोटबुक पर हर विषय को नोट करवाने की बजाय अब छात्रों का आईक्यू सेट किया जाएगा। यानी  स्कूलों में नोटबुक में कम लिखाया जाएगा, और छात्रों के दिमाग में ज्यादा चीजें डाली जाएंगी। एनसीईआरटी ने यह फैसला लिया है। एनसीईआरटी ने हिमाचल शिक्षा विभाग को इस बारे में आदेश जारी कर दिए हैं। वहीं साफ किया है कि अब छात्रों को कक्षाओं में तय नियमों के तहत पढ़ाया जाए। इस दौरान एनसीईआरटी ने कई नियम तय भी किए हैं, जिसमें छात्रों को कक्षाओं में नोटबुक कम लाने और रिवीजन के तहत ज्यादा पढ़ाने का नियम तय किया गया है। अहम यह है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अगले साल होने वाले नेस के टेस्ट के लिए भी तैयार किया जाएगा। यही वजह है कि एनसीईआरटी ने नया सिलेबस शुरू करने के साथ ही छात्रों को पढ़ाने के तौर-तरीके भी अपने ही अपनाने का फैसला लिया है। एनसीईआरटी के तहत स्कूलों में छात्रों को किस तरह से पढ़ाना है, इसके लिए एनसीआरटी ने हिमाचल के 350 शिक्षकों को टे्रनिंग भी दे दी है। एनसीईआरटी का तर्क है कि इस साल पहली बार हिमाचल प्रदेश में नेशनल लेवल की किताबें कक्षा एक से जमा दो तक शुरू की गई हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि बेहतर ग्रेड के लिए शिक्षक कक्षाओं में छात्रों को पढ़ाने के तौर-तरीकों को भी बदलें। यानी कि अब कक्षाओं में छात्रों से सिलेबस से जुड़ी थ्यौरी कक्षाओं में ज्यादा लिखाई, तो एनसीईआरटी के निर्देशोें के बाद उक्त शिक्षकों से जवाबदेही भी जाएगी। उल्लेखनीय है कि नेस नेशनल अचीवमेंट सर्वे के तहत स्कूली छात्रों का आईक्यू हर साल चैक किया जाता है। नेशनल लेवल तक अगर इस प्रतियोगिता में भाग लेना हो, तो पहले कई टेस्ट पास करने पड़ते हैं। उसके बाद ही हिमाचल से कई छात्रों को इस प्रतियोगिता के लिए चुना जाता है। बता दें कि एनसीआरटी की टीम इन दिनों शिमला में शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग देने के लिए पहुंची है। इस दौरान शिक्षकों को एनसीईआरटी के नियमों के तहत होने वाली पढ़ाई के बारे में बताया जा रहा है। अहम यह है कि एनसीईआरटी ने कक्षाओं में लिखने के बजाय दिमाग के विकास पर फोकस किया है।

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