फूड कमिश्नर की तैनाती पर रोक

हिमाचल सरकार ने कुछ आपत्तियों के आधार पर फिलहाल रोकी प्रक्रिया, 30 सितंबर तक मांगे थे आवेदन

शिमला  – हिमाचल प्रदेश में खाद्य सुरक्षा के लिए फूड कमिश्नर की नियुक्ति की प्रक्रिया पर रोक लग गई है। राज्य में गठित खाद्य सुरक्षा नियामक आयोग में चेयरमैन और सदस्य के दो पदों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी। इसके लिए पिछले माह तक मांगे गए आवेदनों के आधार पर नियुक्ति के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई थी। इस दौरान राज्य सरकार ने कुछ आपत्तियों के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। हालांकि सरकार ने पिछले डेढ़ माह में फूड कमिश्नर की नियुक्ति के लिए तेजी से प्रक्रिया अपनाई थी। इसके चलते यह अंदेशा जताया जा रहा था कि दिवाली से पहले फूड कमिश्नर के पद पर पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा की ताजपोशी हो सकती है। चेयरमैनशिप के लिए सरकार के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी मनीषा नंदा सहित 13 पूर्व अफसरों ने आवेदन किए हैं। आयोग में चेयरमैन और सदस्यों के दो पद भरने के लिए प्रदेश सरकार ने 30 सितंबर तक आवेदन आमंत्रित किए थे। इसमें चेयरमैन पद के लिए 13 ने आवेदन किए, जबकि सदस्यों के दो पदों के लिए 20 ने आवेदन किए हैं। फूड कमिश्नर के अध्यक्ष पद के लिए पूर्व  मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने आवेदन किया था, लेकिन आवेदन के तीन दिन बाद उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया था। वरिष्ठता और अनुभव के लिहाज से विनीत चौधरी आयोग के अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे थे। राज्य सरकार से मिले संकेत के बाद उन्होंने खाद्य आपूर्ति विभाग को अपना नाम वापस लेने की सूचना दे दी है। इस पद के लिए पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा, पीसी धीमान, केआर भारती, सुनील चौधरी, महेंद्र पठानिया, ईं रणवीर पाल वर्मा, सुरेंद्र धोकरोक्टा, बीसी बडालिया, डा. अश्वनी शर्मा, हरनाम ठाकुर सहित कुल 13 आवेदन आए हैं। आयोग में दो सदस्य पद के लिए 20 आवेदन आए हैं।

पूर्व आईएएस अफसर की राह आसान नहीं

फूड कमीशनर के पद के लिए पूर्व आईएएस अधिकारी मनीषा नंदा की ताजपोशी तय मानी जा रही थी। अचानक नियुक्ति प्रक्रिया रोक देने के कारण अब मनीषा नंदा की राह आसान नहीं होगी। माना जा रहा है कि इसके लिए संघ तथा पार्टी के प्रमुख नेताओं ने भी कुछेक अधिकारियों को ही रेवडि़यां बांटने पर आपत्ति जताई है। यही कारण है कि फूड कमिश्नर की इस सप्ताह प्रस्तावित नियुक्ति लटक गई है।

रिटायर्ड को घर भेजने के हक में

पुख्ता सूचना के अनुसार संघ तथा पार्टी के प्रमुख नेता रिटायर्ड अफसरों को घर भेजने के हक में हैं। सीएम आफिस तथा महत्त्वपूर्ण पदों पर तैनाती वाले अफसरों को रिटायरमेंट के बाद मलाइदार पद देने की खिलाफत हो रही है। इस कारण पूर्व मुख्य सचिव विनीत चौधरी की नाव किनारे नहीं लग रही है। पूर्व एसीएस मनीषा नंदा की नियुक्ति में यही पेंच आड़े आ रहा है।

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