बगदादी खत्म, हाफिज-मसूद कब?

इंसान के रूप में वह दरिंदा था। वह क्रूर, बर्बर हत्यारा और जालिम था। वह इनसान नहीं, शैतान था। उसके आतंकियों ने 30 से ज्यादा देशों पर 150 से ज्यादा आतंकी हमले किए थे। वह और उसके दरिंदों ने 70,000 से अधिक हत्याएं की और कराई थीं। किसी का सिर कलम कर दिया गया, किसी को पिंजरे में कैद कर आग की लपटों के हवाले कर दिया गया, तो कहीं विस्फोटक धमाके कर इनसानी लाशें बिछा दी गईं। उसने खुद को ‘खलीफा’ घोषित किया था, लेकिन वह आतंक और पाशविक हत्याओं का ‘खलीफा’ जरूर था। अंततः उसकी भी मौत आई, तो उसकी आंखों में भी खौफ  था, दहशत थी। उसने भी जिंदगी की भीख मांगी। कौन उस ‘जल्लाद’ को माफ  करता? अमरीकी राष्ट्रपति टं्रप के बयान के मुताबिक, वह रोया, चीखा-चिल्लाया, गिड़गिड़ाया। जब कोई चारा शेष नहीं था, तो उसने आत्मघाती जैकेट के जरिए खुद को उड़ा लिया। वह कुत्ते और कायर की मौत मरा। अमरीका की ‘डेल्टा फोर्स’ के कमांडोज ने दो घंटे के आपरेशन में ही आईएसआईएस के सरगना अबू बकर बगदादी को ‘खाक’ कर दिया। इसमें प्रशिक्षित कुत्तों की भी भूमिका शानदार रही, जिन्होंने बगदादी की घेरेबंदी की। इस बार खबर सौ फीसदी पक्की है, क्योंकि अमरीकी राष्ट्रपति पूरे आपरेशन के चश्मदीद रहे और पहली बार ‘व्हाइट हाउस’ ने खुलासा किया है। अमरीका के प्रशिक्षित, हुनरमंद, साहसी कमांडो की टीम ने अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को मौत के घाट उतारा था और अमरीका ने ही दुनिया के सबसे  खौफनाक और दरिंदे आतंकी को चिथड़े-चिथड़े होने पर विवश किया। आपरेशन में बगदादी की दो बीवियां और तीन बच्चे भी विस्फोटक धमाकों ने भस्म कर दिए। अपनी जिंदगी के आखिरी पलों में बगदादी कितना डरा हुआ और कांपता हुआ होगा, उसके ब्यौरे खबरों में स्पष्ट हो चुके हैं, लेकिन हमारे लिए यह सवाल सबसे गौरतलब है कि पाकपरस्त बगदादी-हाफिज सईद और मसूद अजहर बगैरह-कब समाप्त होंगे? बगदादी खत्म हुआ है, लेकिन आतंकवाद का खात्मा कब होगा? हाफिज और मसूद ने भी बगदादी की तरह आतंकवाद की एक जमात खड़ी की है, कई आतंकी हमले कराए हैं, सीमापार से जारी आतंकवाद और छाया-युद्ध के विशेष सूत्रधारों में भी वही हैं। उन्हें कब ढेर किया जा सकेगा? क्या हम भी अमरीकी रणनीति की तर्ज पर कोई घेराबंदी कर, हमला कर सकते हैं? क्या हमारे कमांडो और व्यूह-रचना की व्यवस्था भी इतनी सक्षम है? हमें अपनी सेना और सरकार पर कोई भी संदेह नहीं है। अमरीका ने भी पलक झपकते बग़दादी को नहीं धर दबोचा। बीते 5 साल से उसके ‘साम्राज्य’ और लड़ाकों पर हमले जारी थे। बगदादी के मारे जाने की खबर कई बार आई, लेकिन वह जिंदा रहा। इस बार उसके करीबी, भरोसेमंद राजदार ने ही उसे मौत की दहलीज तक पहुंचा दिया। हाफिज और मसूद की सक्रियता और ठिकाने हमसे छिपे नहीं हैं। संभव है कि हमारी सरकार और सेना किसी रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रही होंगी! उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट सरीखे हमले करके हमने साबित किया है कि हमारी वायुसेना और कमांडो किसी भी आपरेशन में सक्षम हैं। अमरीका ने भी एक लंबे अंतराल तक ड्रोन, सेटेलाइट के जरिए बगदादी की सक्रियता पर निगरानी रखी। बेशक हमारी और अमरीकी एजेंसियों की खुफिया सूचनाओं में बहुत फर्क है, लेकिन जो आतंकवाद हमारे पड़ोस में मौजूद है, पाला-पोसा जा रहा है, उसका खात्मा तो हमारी प्राथमिकता है। उधर बगदादी कांड किया गया, इधर कश्मीर के सोपोर इलाके के बस अड्डे पर ग्रेनेड से हमला किया गया, जिसमें 20 मासूम लोग जख्मी हो गए। कुछ की स्थिति गंभीर बताई गई है। बहरहाल यह अच्छा संकेत है कि जो देश अभी तक आतंकी संगठनों के कथित जेहाद का समर्थन किया करते थे, उनमें से ज्यादातर की सेनाएं अब आतंकियों के खिलाफ  मोर्चेबंद हैं। सऊदी अरब की फौज यमन में, तुर्की की सेना सीरिया में हमलावर हैं। ईरान भी जंग में उतर चुका है। बेशक आईएसआईएस कमजोर हुआ है और अब बगदादी के बाद उसके टुकड़े भी संभव हैं, लेकिन ये जेहादी मुहिम एक तरह की मानसिकता फैलाते रहे हैं। हमारे देश से तो कुछ सौ नौजवान प्रभावित होकर आईएसआईएस में शामिल हुए हैं, लेकिन अमरीका, यूरोप और अरब देशों से हजारों युवा आईएस की वैचारिकता से प्रभावित होकर उससे जुड़े हैं। ऐसे ही हाफिज और मसूद के पैरोकार कश्मीर में मौजूद हैं। लिहाजा इन सरगनाओं के खिलाफ  आपरेशन कर उनका वजूद ही खत्म करना होगा।

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