बिलिंग में पर्यटन विभाग ने कतरे मानव परिंदों के ‘पर’

इस साल किसी तरह की अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग प्रतिस्पर्धा न करवाने से विदेशी पर्यटक मायूस, वजूद पर संकट

बैजनाथ –पैराग्लाइडिंग के लिए विख्यात घाटी बिलिंग में इस साल किसी तरह की अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग प्रतिस्पर्धा न करवाना व खाना पूर्ति के लिए निजी संस्था द्वारा मात्र एकुरेसी कप करवाना इस घाटी के पर्यटन के लिए प्रश्न चिन्ह है। अगर सरकार व प्रदेश के पर्यटन विभाग का बिलिंग के प्रति यही रवैाया रहा, तो वह दिन दूर नहीं, जब बिलिंग का वजूद खतरे की जद में आ जाएगा। बिलिंग घाटी क्रॉस कंट्री प्रतिस्पर्धा के लिए विख्यात है, न कि ऐकुरेसी कप के लिए, मगर हैरानी की बात है कि इस साल किसी तरह की पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता करवाने के लिए न तो प्रदेश के पर्यटन विभाग न ही साडा ने दिलचस्पी दिखाई, जिसके चलते इस बार दुनिया भर से आए विदेशी पायलटों को भी मायूसी हाथ लगी। मौजूदा समय में दुनिया भर के करीब 40 देशों जैसे रूस, अमरीका, पोलैंड, कनाडा, बुल्गारिया, आस्ट्रिया, फ्रांस, स्पीडन कताजिस्तान से 500 के लगभग विदेशी पायलट व पर्यटक बीड़, बिलिंग, क्योर व चौगान में डेरा डाले हैं, जो प्रतिदिन बिलिंग  से शौकिया तौर पर उड़ाने भर कर दिलकश घाटी के  नीले आकाश के स्वच्छ वातावरण का आनंद उठा रहे हैं। आजकल बिलिंग घाटी का नीला अंबर रंग-बिरंगी मानव रूपी तितलियों से भरा पड़ा है। हर वर्ष लाखों रुपए खर्च कर  विदेशी पायलट इसी मकसद से बिलिंग का रुख करते हैं कि एक और वह बिलिंग में आयोजित किसी तरह की प्रतिस्पर्धा में भाग ले सकें व अपनी शौकिया उड़ानों का भी लुल्फ  उठा सकें। बिलिंग घाटी इसलिए भी शीर्ष स्थान अर्जित किए है कि बिलिंग से पायलटों को 200 किलोमीटर तक उड़ान भरने के लिए उपयुक्त खुला एरिया मिलता है। इन दिनों में बिलिंग के नीले आकाश में उड़ान भरने के लिए पायलटों को हवा का अच्छा दबाव मिलता है व  मीलों  लंबी  उड़ान भरी जा सकती है।  इस साल भी आठ अक्तूबर से विदेशी पायलटों का आगमन शुरू हो गया है। इस समय बीड़ बिलिंग विदेशी पर्यटकों, पायलटों से भरी पड़ी है, जो दस नवंबर तक अपने अपने घरों के लिए लौट जाएंगे ।  इस साल जब पर्यटन विभाग ने कोई भी दिलचस्पी बिलिंग में किसी तरह की प्रतिस्पर्धा करवाने में नहीं ली, तो बिलिंग ऐडबेंचर पैराग्लाइडिंग एसोशिएशन ने नेशनल एकुरेशी पैराग्लाइडिंग कप करवाने का बीड़ा उठाया, जो संभता 18 से 21 नवंबर तक होना प्रस्तावित है, मगर ध्यान देने वाली बात है कि तब तक बिलिंग घाटी से विदेशी पायलट अपने घरों को रुखसत कर जाएंगे। वैसे भी अब तक चार एक्यूरेसी कप बीड़, सिकिम, उत्तरांचल व मिजोरम में हो चुके हैं। बिलिंग घाटी क्रॉस कंट्री रेस के लिए ही विख्यात है।बीड़, बिलिंग, क्योर, चौगान, घरनाला, भट्टू, गुनेहड़, चौंतड़ा तक का क्षेत्र विकसित हो रहा है। इस बारे प्रशासन का यही तर्क रहा कि एक तरफ  धर्मशाला में हुए उपचुनाव व इंवेस्टर मीट के कारण बिलिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा नही करवाई जा सकती है।।

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