भारत का कारोबार 87 फीसदी सिकुड़ा

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से सितंबर के दौरान आई कमी

नई दिल्ली – बैंकों का क्रेडिट कमजोर होने के साथ ही वित्त वर्ष 2019 में सितंबर के मध्य तक भारत का कारोबार 87 फीसदी तक सिकुड़ गया। रिजर्व बैंक की ओर से जारी विस्तृत आंकड़ों से इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में आर्थिक मंदी पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज है। आरबीआई के अनुमान पर भरोसा करें, तो इसका वृद्धि दर 6.9 फीसदी से घटकर 6.1 फीसदी के बीच रहेगी। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 में सितंबर के मध्य तक बैंकों, पूंजी बाजार और गैर-बैंकिंग क्षेत्र के ऋणदाताओं का कुल कोष करीब 7.4 लाख करोड़ रुपए था, जो वित्त वर्ष 2019-20 के इसी अवधि में यह घटकर 90995 करोड़ रुपए हो गया। इस अंतर का एक बड़ा हिस्सा बैंक ऋण वृद्धि में 3.1 लाख करोड़ रुपए की गिरावट को दर्शाता है। पिछले साल के 1.85 लाख करोड़ रुपए के क्रेडिट ग्रोथ के मुकाबले इस साल की पहली छमाही में बैंकों का ऋण नकारात्मक क्षेत्र में 1.28 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसके साथ ही, दूसरी बड़ी गिरावट गैर-बैंकों के प्रवाह में है, जो 3.3 लाख करोड़ से गिरकर 5.5 लाख करोड़ रुपए से 2.2 लाख करोड़ रुपए हो गई। यह गिरावट इसलिए दर्ज की गई, क्योंकि वित्त कंपनियों और म्यूचुअल फंड ने वाणिज्यिक पत्र (सीपी) और व्यवसायों द्वारा जारी किए गए अन्य ऋणों में निवेश नहीं किया। आरबीआई ने अभी हाल ही में जारी अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और निजी क्षेत्र के बैंकों की ओर से कर्ज में कमी की गई, जबकि हाल के दिनों में विदेशी बैंकों की ऋण की वृद्धि मामूली रही। इसके विपरीत, कृषि और व्यक्तिगत ऋणों में ऋण वृद्धि पिछले एक साल में व्यापक रूप से अपरिवर्तित रही।

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