मुंह की बीमारियां रोकने पर मंथन

यूटी में आंगनवाड़ी वर्कर्ज की वर्कशॉप, बाल विकास-सामाजिक कल्याण के सचिव की बतौर मुख्यातिथि शिरकत

चंडीगढ़  – भारतीय स्वास्थ्य अनुसंधान परिषद (आईसीएम्आर) नई दिल्ली और महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग चंडीगढ़ के सहयोग से ओरल हेल्थ साइंसेज सेंटर लिए एक  ओरिएंटेशन वर्कशॉप का आयोजन किया गया। पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में चंडीगढ़ यूटी के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के 0-6 वर्ष के बच्चों के बीच मौखिक बीमारियों की रोकथाम और कमी के लिए एक महत्त्वपूर्ण बहु-केंद्रित आईसीएमआर टास्कफोर्स परियोजना की शुरुआत की। बाल विकास और सामाजिक कल्याण चंडीगढ़ यूटी के सचिव बीएल शर्मा इस मौके तौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए । इस मौके प्रो. अशिमा गोयल ने उन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना की जो जमीनी स्तर पर काम करती हैं और गर्भवती माताओं, शिशुओं और छोटे बच्चों के सीधे संपर्क में हैं। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के बीच मौखिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। प्रोफेसर ए राजवंशी ने मौखिक स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र को समुदाय में मौखिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए पिछले तीन दशकों से लगातार संरचित तरीके से काम करने के लिए बधाई दी। उन्होंने हरियाणा राज्य के डेंटल सर्जनों, चंडीगढ़ के स्कूली शिक्षकों और वर्तमान में छोटे बच्चों के बीच मौखिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए केंद्र के प्रयासों की सराहना की। पीजीआई के डीन एकेडमिक्स के प्रोफेसर राजेश कुमार ने कहा कि आईसीडीएस टीम के अथक प्रयासों ने वर्तमान में 1000 जीवित जन्मों में 120 से 40 जन्मों में शिशु मृत्यु दर को नीचे लाया है। उन्होंने यह भी महत्त्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ता एक स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में खेलते हैं। उन्होंने कहा कि मौखिक स्वास्थ्य एक उपेक्षित इकाई है और खुशी है कि ओएचएससी पीजीआईएमईआर इस शानदार बहु-केंद्रित परियोजना का नेतृत्व कर रहा है।

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