मॉब लिंचिंग के लिए देश में कोई जगह नहीं

नागपुर – आरएसएस के स्थापना दिवस के मौके पर मंगलवार को सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश के कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात कही। मोहन भागवत का विजयदशमी का भाषण नई सरकार, 370ए मॉब लिंचिंग, चंद्रयान, अर्थव्यवस्था और महिला शक्तिकरण के इर्द-गिर्द रहा। भागवत ने लिंचिंग शब्द का जिक्र करते हुए कहा कि यह शब्द हमारी परंपरा का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल करके भारत को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। संघ प्रमुख ने कहा कि हम जहां भी जाएंगे, वहां की कानून व्यवस्था का पालन करके ही हम रहेंगे। यही संस्कार संघ के स्वयंसेवकों को मिलता है। अब अपना समाज है, अपना देश है, अपने लोग हैं। सारा भारत, सारे भारतीयों का है। सबको कानून का पालन करके ही रहना चाहिए। ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए कानून को सख्त करना चाहिए। इसमें अपना-पराया नहीं देखना चाहिए। स्वयंसेवक सत्ता में है तो उसकी यही सीख है। कहीं मतभेद है, तो संवाद से निर्णय होना चाहिए। तब भी बात न बने तो कानून है। निर्णय मन से स्वीकार नहीं है, तो अपील करने का प्रावधान है। बता दें कि इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह संघ के गणवेश में वहां पहुंचे। एचसीएल के संस्थापक शिव नाडर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। मोहन भागवत ने अपने भाषण में 370 हटाने का जिक्र करते हुए सरकार की जमकर तारीफ  की। उन्होंने कहा कि साहसी और कठोर निर्णय लेने की क्षमता इस सरकार में है, यह भी साफ  हो गया। जनसंघ का पहला आंदोलन 370 हटाने को लेकर ही था। राज्यसभा और लोकसभा में अन्य दलों का सहयोग लेकर इस काम को किया गया। पीएम और गृहमंत्री इसके लिए बधाई के पात्र हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इसरो के चंद्रयान-2 मिशन की तारीफ  करते हुए कहा कि चांद के दक्षिणी ध्रुव को किसी ने छूने का साहस नहीं किया था, हमने किया। पूर्ण सफलता नहीं मिली, लेकिन दुनिया ने हमारी सराहना की। हमारे वैज्ञानिकों के इस साहस के कारण ही देश की जनता में वैज्ञानिकों के प्रति विश्वास बढ़ा है। हमारा देश पहले से अधिक सुरक्षित है, सेना का मनोबल और सीमा बंदोबस्त और बेहतर हुआ है। पिछले दिनों हम सबको इसका आभास हुआ है। पूर्व की सीमा पर और चौकसी की जरूरत है। देश के अंदर होने वाली उग्रवादी घटनाओं में कमी आई है। मोहन भागवत ने कहा कि अपने दुष्कर्मों में सफल नहीं होते तो संघ को रोको, यह बात तो अब इमरान खान भी सीख गए हैं। संघ कहता है हिंदू, तो इसमें मुसलमानों का विरोध की बात कहां से आ गई है। हिंदुओं को संगठित करना, किसी का विरोध करना नहीं है।

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