लावारिस छोड़ा हमीरपुर-नादौन एनएच…गड्ढे दे रहे टेंशन

हमीरपुर से नादौन तक एनएच पर गड्ढों की भरमार; हर रोज हो रहे हादसे, नेशनल हाई-वे ऑफ अथॉरिटी नहीं करवा पाई टेंडर प्रक्रिया

हमीरपुर –प्रदेश में फोरलेन बनने की योजना बनी तो नेशनल हाई-वे के रखरखाव का जिम्मा भी नेशनल हाई-वे ऑफ अथॉरिटी (एनएचएआई) को यह सोचकर दे दिया गया कि अथॉरिटी समय पर हर काम करवाएगी, लेकिन मटौर-शिमला एनएच की हमीरपुर से नादौन तक करीब 21 किलोमीटर मार्ग की हालत देखकर तो ऐसा लगता है कि एनएचएआई ने इस सड़क को लावारिस ही छोड़ दिया है। देखकर लगता ही नहीं कि यह नेशनल हाई-वे है। रोजाना इस मार्ग पर सफर करने वाले लोग सरकार को कोस रहे हैं। इस सफर के दौरान लोग भगवान का नाम जप रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सड़क की टेंडर प्रक्रिया बरसात में हो जानी चाहिए थी, वो आज तक पूरी नहीं हो पाई। फाइनांशियल बिड तो दूर की बात अभी जो दो टेंडर ठेकेदारों ने लगाए हैं, उसकी टेक्निकल बिड भी अथॉरिटी नहीं खोल पाई है। अब तो आरोप यहां तक लगना शुरू हो गए हैं कि अथॉरिटी में बैठे उच्चाधिकारी जानबूझकर बिड नहीं खोल रहे, क्योंकि वे बाहरी राज्यों के ठेकेदारों को काम देना चाहते हैं। जानकारों की मानें तो यदि एक सप्ताह के भीतर पूरा टेंडर प्रोसेस नहीं हुआ तो इस सीजन में काम शुरू नहीं हो पाएगा और फिर बात मार्च तक चली जाएगी, क्योंकि अमूमन 15 नवंबर के बाद टायरिंग का काम बंद कर दिया जाता है। अगर मौसम थोड़ा साथ दें, तो 30 नवंबर तक टायरिंग हो सकती है, क्योंकि सड़क से बिटुमन को चिपकने के लिए जमीन में हीट होना जरूरी है, लेकिन एनएचएआई के रवैये को देखकर लग रहा है कि वह इस सीजन में काम करवाने के मूड़ में नहीं है। ऐसे में यदि काम मार्च के लिए चला गया तो एनएच की क्या हालत होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। आजकल ही इस एनएच में इतने गड्ढे पड़े हुए हैं कि आए दिन दोपहिया वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। यही नहीं, कुछ माह पूर्व तो इन्हीं गड्ढों की वजह से एक महिला की मौत तक हो गई थी। छोटी-मोटी दुर्घटनाएं तो यहां आम बात हो गई हैं।

एक्सीडेंटल प्रो-जोन बन गई सड़क

लगभग 26 किलोमीटर लंबे हमीरपुर से नादौन तक नेशनल हाई-वे का एरिया पक्काभरो से सलासी अमरोह चौक, पंचवटी से आगे जलाड़ी, भंूपल, भट्ठा तक एक्सीडेंटल प्रो-जोन बनकर रह गया है। सड़क पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे पड़े हैं कि देखकर लगता ही नहीं कि यह नेशनल हाई-वे है। इस सड़क पर केवल पांच किलोमीटर में टायरिंग हो पाई है, बाकी 21 किलोमीटर की हालत बेहद बदतर है।

 

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