वादों को हकीकत में बदलें

नितीश धीमान, कांगड़ा

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से चुनावों का सरोकार जनता से ही रहा है। चुनाव के वक्त प्रत्याशियों का जनता से रू-ब-रू होना भी अपरिहार्य है, इसी परिप्रेक्ष्य में धर्मशाला के निचले हिस्से में कहीं रोष पनप रहा है, तो प्रशासन की सीरत की परिचायक बनती लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गगल, मटौर से चैतड़ू तक के लोगों को मांझी और मनूणी खड्ड के मिटते अस्तित्व में अपनी खेतीबाड़ी का धुंधला होता भविष्य नजर आ रहा है। इस बार धान की रोपाई से पहले लोगों ने प्रशासन के समक्ष प्रदर्शन कर इनकी मरम्मत की गुहार लगाई, परंतु लोगों की इस आजमाइश को प्रशासन की बेरुखी ने फिर झुठला दिया। कूहलों की मरम्मत लोगों को गांव में चंदा इकट्ठा करके और दिहाड़ी लगा कर स्वयं करनी पड़ रही है। चुनावों के संदर्भ में हर बार शिकायतकर्ताओं की समस्याओं की सूचियां बनती हैं व वादों की बौछार तो होती है, परंतु जीत की खुमारी में जनता और उसकी समस्याएं कहीं पीछे छूट जाती हैं। आश्चर्यजनक तो यह कि जयराम सरकार हर क्षेत्र में प्रदेश को बुलंदियों पर ले जाने की कोशिशों में जुटी है, तो इस समस्या से प्रशासन अनभिज्ञ कैसे रह गया? उम्मीद है शिकायतों को अनसुना करने के ढर्रे से बाहर निकल प्रशासन लोक भलाई को अपनाएगा।

            

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