व्यापार में 40 फीसदी तेजी की उम्मीद

अमरीका के साथ ऊर्जा कारोबार पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भरोसा

नई दिल्ली – पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि अमरीका के साथ देश का ऊर्जा कारोबार 2019-20 में 40 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 10 अरब डालर होने की संभावना है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और पश्चिम एशिया के अपने परंपरागत आपूर्तिकर्ताओं के साथ साथ ईंधन के नए स्रोतों की तलाश भी कर रहा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी तेल और गैस उत्पादन में बढ़ोतरी तथा भारत की ऊर्जा की बढ़ती जरूरतें बढ़ रही हैं। इससे दोनों देशों के लिए द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत और अवसर सृजित हुआ है। भारत ने अक्तूबर 2017 में अमरीका से कच्चे तेल का आयात शुरू किया और मार्च 2018 में उसे वहां से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की पहली खेप प्राप्त की। पिछले एक साल में अमेरिकी कच्चे तेल का आयात दोगुना हो गया है और भारत सबसे बड़े दीर्घकालीन एलएनजी आयात सादै की ओर बढ़ रहा है। प्रधान ने अमरीका-भारत रणनीतिक भागीदारी मंच के सालाना शिखर सम्मेलन में कहा कि वर्ष 2018-19 में कच्चे तेल, एलएनजी और रसोई गैस का कुल आयात 7.2 अरब डालर रहा। चालू वित्त वर्ष 2019-20 में यह 10 अरब डालर पहुंच सकता है। बहुत कम समय में भारत के लिए अमेरिका कच्चे तेल का 10 प्रमुख स्रोतों में से एक बन गया है। साथ ही अमरीका एलएनजी के लिए भी आयात का प्रमुख स्रोत बन गया है। अमरीका के लिए भारत कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा और एलएनजी के लिए तीसरा सबसे बड़ा आयातक देश बन गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां अमरीका में तेल एवं गैस संपत्ति में पहले ही निवेश कर चुकी है और हमारी कंपनियों में अमरीका की गैस संपत्ति में निवेश को लेकर रूचि बढ़ रही है।

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