सेब-अनार के बाद जापानी फल भरेगा जेबें

कुल्लू की मंडियों में फसल के बेहतरीन दाम मिलने से खिले बागबानों के चेहरे

भुंतरसेब-नाशपाती-प्लम और अनार के बाद अब जापानी फल जिला कुल्लू के बागबानों को मालामाल करने लगा है। एक ओर निचले इलाकों के बागबान अनार से जेबें भर रहे हैं, तो साथ ही मध्यम ऊंचाई के बागबान अपने जापानी फलों को मार्केट में उतार रहे हैं। मार्केट में फसल को 50 से 70 रुपए के दाम मिल रहे हैं। लिहाजा, बागबानों के चेहरे ऊंचे दामों के कारण खिले हुए हैं। बता दें कि पिछले कुछ सालों से सेब-अनार के बाद जापानी फल भी कुल्लू जिला के बागबानों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाता आ रहा है। यही नहीं, प्रदेश की मुख्य फसल सेब के समान अच्छी क्वालिटी का जापानी फल 60 से 70 रुपए प्रति किलो भुंतर सहित अन्य मंडियों मंे बिक रहा है। सेब के बाद यदि किसी फल की तुलना रेट को लेकर की जाए तो जापानी फल सेब के बराबर बिक रहा है, जिसका बागबानों को बहुत लाभ हो रहा है। हालांकि मार्केट में इस बार सेब उत्पादकों को निराशा लगी है। बेहतर फसल होने के बावजूद सेब उत्पादकों के चेहरों में उतनी रौनक नहीं है, जितनी अकसर होती है। इसका मुख्य कारण बेहद कम दामों में बिकी फसल है, लेकिन अब जापानी फल बागबानों के घाटे की भरपाई कर रहा है। कुल्लू जिला में मात्र सेब उत्पादन की तुलना मात्र 1.5 फीसदी भूमि पर जापानी फल का उत्पादन होता है, जो कि बहुत ही कम है। बागबानों के अनुसार बाहरी मंडियों में जापानी फल की अच्छी मांग है और मंुहमांगे दाम कारोबारी चुका रहे हैं। बागबानों के अनुसार जब प्रदेश में सारे फल समाप्त हो जाते हैं तो जापानी फल ही बाजार में उपलब्ध होता है। प्रदेश में जापानी फल की फूयू व हैचिया प्रजाति का उत्पादन होता हैै, जिसमें फूयू प्रजाति के फल की मांग बाजार में रहती है और बागबानों का यह फल 60 से 70 रुपए प्रति किलो के भाव से बिकता है। जिला कुल्लू की कृषि उपज मंडी समिति के सचिव सुशील गुलेरिया के अनुसार भुंतर सहित अन्य मार्केट में जापानी फल पहुंच रहा है और इसके अच्छे दाम मिल रहे हैं।

 

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