सेवा के जज्बे ने बना दिया आईपीएस अधिकारी

Oct 9th, 2019 12:20 am

प्रोफाइल

नाम- रोहित मालपानी

पद – एसपी बद्दी (पुलिस जिला)

जन्म तिथि – 21 जून, 1986

आईएएस  बैच – वर्ष 2012

शिक्षा – सेंट एसेलम पिंक सिटी स्कूल जयपुर, आईआईटी मद्रास

पत्नी का नाम- डा. छवि

जन्म स्थान- जयपुर, राजस्थान

अब तक किन-किन पदों पर रहे :

एएसपी बिलासपुर, एएसपी शिमला ग्रामीण, एसपी किन्नौर, एसपी सिरमौर तथा वर्तमान में एसपी बद्दी के रूप में कार्यरत।

जब भी कोई युवा आईएएस, आईपीएस में सेलेक्ट हो जाता है, उसकी प्रतिभा पर हर कोई फख्र करने लगता है।  यह कहना गलत होगा कि कामयाबी हासिल करने वालों में ज्यादातर संपन्न परिवारों के ही होते हैं। जब कोई साधारण परिवार का युवा हालात को पछाड़ते हुए देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में काबिज हो जाता है तो पूरे समाज के लिए हीरो बन जाता है। आईपीएस अधिकारी रोहित मालपानी ऐसी ही प्रशासनिक शख्सियतों में से एक हैं, जिनकी मेहनत पत्थर की लकीर बन कर उभर आई। 2012 बैच के आईपीएस रोहित मालपानी वर्तमान में पुलिस जिला बद्दी के एसपी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। राजस्थान के जयपुर में जन्मे रोहित मालपानी की शिक्षा सेंट एसेलम पिंक सिटी स्कूल जयपुर व आईआईटी मद्रास से हुई। शिक्षा के बाद जॉब के दौरान रोहित मालपानी ने सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की और दूसरे ही प्रयास में आईपीएस बन गए। रोहित की माता किरण मालपानी शिक्षक हंै। आईपीएस रोहित मालपानी की शादी वर्ष 2012 में डा. छवि कावरा से हुई।  डा. छवि वतर्मान में पीजीआई चंडीगढ़ में कार्यरत हैं। दरअसल एसपी बद्दी रोहित मालपानी कुशल पुलिस अधिकारी ही नहीं बल्कि आईआईटी मद्रास के होनहार छात्र भी रहे हैं। मूलतः राजस्थान के जयपुर निवासी रोहित का पहला पैशन इंजीनियरिंग था इसलिए उन्होंने आईआईटी से बीटेक करने के बाद वहीं से एमटेक की डिग्री भी पूर्ण की। आईआईटी से पास आउट होने के बाद आईबीएम जैसी मल्टीनेशनल कंपनी ने इन्हें अपने यहां साफ्टवेयर रिसर्चर के पद पर नियुक्ति दी थी, जहां उन्हें अच्छी खासी पगार और व्यक्तिगत तौर पर जिदंगी में सुख-सुविधाओं की ओर बढ़ने के भरपूर अवसर थे। यही नहीं इसी दौरान उन्हें विदेश की नामी कंपनी से भी जॉब आफर हुई, लेकिन तब तक रोहित मालपानी का मन बदल चुका था और समाज के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बे ने उनके कदम सिविल सर्विसेज की तरफ  मोड़ दिए। रोहित अपनी आज तक की कामयाबियों का श्रेय अपने परिवार को देते हैं। रोहित कहते हैं कि चैलेंजिंग करियर में स्पोर्ट सिस्टम न हो तो चुनौतियां बढ़ जाती हैं। परिवार को वक्त न देने  के बाद भी पत्नी का उन्हें भरपूर सहयोग मिलता है।

उपलब्धियां

रोहित मालपानी को एसपी सिरमौर रहते हुए बेहतर कार्य के लिए वर्ष 2018 में डीजीपी डिस्क अवार्ड से नवाजा गया।  इसके अलावा एसपी किन्नौर रहते हुए उन्हें फिक्की स्मार्ट पुलिसिंग अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

अश्विनी कुमार रहे प्रेरणा स्रोत

सीबीआई के पूर्व   निदेशक और हिमाचल के  पूर्व डीजीपी  अश्विनी कुमार आईपीएस अधिकारी रोहित मालपानी के प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं।

मुलाकात :प्रशासन का आईना होता है आईपीएस अफसर…

रोहित मालपानी : एसपी बद्दी

आपके अनुसार आईपीएस अधिकारी होने का मतलब क्या है?

जनता पुलिस के पास त्वरित न्याय की उम्मीद के साथ आती है और मेरे मायने में आईपीएस अधिकारी व्यक्ति और समाज को तुरंत व प्रभावी न्याय दिलवाने में अहम कड़ी साबित हो सकते हैं। एक पुलिस अधिकारी सरकार व प्रशासन का आईना होता है, क्योंकि वर्दी में होने की वजह से यह प्रोफेशन सबकी नजरों में रहता है । ऐसे में खाकी पहनने के बाद हमारा दायित्व अन्य प्रोफेशन के मुकाबले काफी बढ़ जाता है।

आपने स्कूली शिक्षा और कालेज व विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

स्कूली शिक्षा सेंट एसेलम पिंक सिटी स्कूल जयपुर से पूर्ण की और उसके बाद बीटेक व एमटेक की पढ़ाई आईआईटी मद्रास से की।

छात्र के रूप में हासिल उपलब्धियों में आप स्वयं को 10 में से कितने अंक देंगे?

8 अंक।

आप प्रशासनिक सेवा में आए, इसके लिए कब सोचा ?

स्कूल के दिनों से ही आसपास देखता था कि लोगों को न्याय पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उस दौरान जहन में आता था कि काश इन लोगों के लिए कुछ कर पाता। दादा जी समाज सेवा से जुडे थे ,उन्हें देख कर भी मन में समाज व जनता से जुड़ कर कुछ कर गुजरने की भावनाएं उमड़ती रहती थी। दादा जी चाहते थे कि मैं स्टेट सर्विसेज में जाऊं। बीतते वक्त के साथ आईपीएस अधिकारी बनने के ख्याल ने कब मन में जड़ें जमा लीं इसका आभास ही नहीं हुआ, हालांकि ग्रजुेएशन के दौरान माता-पिता व दोस्तों ने मुझे सिविल सेवा में जाने के लिए खूब प्रेरित किया । इसी के नतीजतन मुझे आईबीएम सरीखी कंपनी में जॉब होने के बावजूद आईपीएस बनकर समाज से जुड़ कर काम करना बेहतर विकल्प लगा और फिर पूरी लग्र व मेहनत के साथ इसमें जुट गया।

आपने सिविल सर्विस परीक्षा में कौन से विषय चुने और क्यों?

मैंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय का चयन किया था। यह इसलिए क्योंकि इसमें मेरी रुचि थी। सिविल सर्विस परीक्षा में विषयों का चयन सबसे अहम फैसला होता है और किसी भी छात्र को उसी विषय का चुनाव करना चाहिए जिसमें उसकी दिलचस्पी हो। इसके साथ ही सब्जेक्ट का चुनाव करते वक्त हर किसी को उस विषय का पूरा सिलेबस विस्तार से देखना और समझना चाहिए।

आईपीएस बनने के लिए आपको कितने प्रयास करने पड़े। इसके लिए प्रेरणा कहां से मिली?

मैंने आईपीएस बनने के लिए दो प्रयास किए, पहले प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचा था और दूसरे प्रयास में मेरा चयन आईपीएस के लिए हुआ। पहले प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद सफलता नहीं मिली तो मैं निराश नहीं हुआ बल्कि कमी वाले क्षेत्रों को सुधारा। पूरे आत्मविश्वास के साथ दूसरे प्रयास में परीक्षा में सफ लता मिल गई।

आईपीएस के लिए कितने समय तक तैयारी की और रोजाना कितने घंटे पढ़ाई करते थे?

जब सिविल सर्विस परीक्षा दी उस वक्त मैं जॉब में था,दिन में समय कम होता इसलिए रात के समय ज्यादातर पढ़ाई की। हालांकि लंच समय में भी तैयारी के लिए वक्त निकाल लेता था। मैं सोता कम था और रोजाना 8 से 10 घंटे मैं तैयारी के लिए निकाल लेता था। मेरे दोस्तों ने बहुत स्पोर्ट किया, मुझे दिन-रात जब भी जॉब से वक्त मिलता मैं पढ़ाई करता।

सिविल सेवा परीक्षा के लिए क्या पढ़ा जाए, इसका चयन कैसे करें?

एक अभ्यर्थी अपने पठन-पाठन तथा उसकी विषयवस्तु की समझ व आधारभूत आवश्यकताओं का पालन करे। यदि ऐसा हो तो इस परीक्षा में सफलता मिलने की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। प्रारंभ मे अभ्यर्थी को समाचार पत्रों,  सामान्य ज्ञान व प्रतियोगी पत्रिकाओं के अलावा एनसीईआरटी की किताबों का अध्ययन करना होगा, जिससे छात्र अपनी आधारभूत, विश्लेषणात्मक व भाषा की समझ और क्षमता का भी विकास कर पाएगा। साथ ही साथ सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम का अध्ययन भी इस परीक्षा की तैयारी की दृष्टि से अति आवश्यक है। याद रहे कि योजना और रणनीति के अनुसार ही सभी प्रकार के अध्ययन कार्य का अनुपालन करना होता है। गत वर्षों में प्रारंभिक परीक्षा प्रश्नपत्र में समसामयिक मुद्दों से संबंधित प्रश्नों का अच्छा अनुपात रहा है । कुल मिलाकर जिसे पढ़ना अच्छा लगे और जो बोझ न लगे, उसे पढ़ें।

कंपीटीटिव एग्जाम के लिए आजकल कोचिंग का चलन बढ़ रहा है। क्या यह उपयोगी है?

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि एक अच्छे मार्गदर्शन से मिलने वाले स्पष्ट ज्ञान से अभ्यर्थी को सफलता प्राप्त करने मेंं मदद मिलती है, लेकिन कोचिंग एक सीमा तक ही मार्गदर्शन कर सकती है। असल में अपनी मेहनत (सेल्फ स्टडी) ही काम आती है। जब आप आश्वस्त हों कि आप कंपीटीटिव एग्जाम के पेटर्न को अच्छी तरह समझते हैं और तदनुसार रणनीति बनाकर अध्ययन कर सकते हैं तो कोचिंग की आवश्यकता न के बराबर हो जाती है।

आपका काम सामान्य अफसरों से किस प्रकार अलग है?

इस पद को पाने में जितनी मेहनत लगती है उससे कहीं ज्यादा बड़ी इस पद से जुड़ी गरिमा व जिम्मेदारियां होती हैं । आईपीएस आफिसर की वर्दी के साथ जो मान-सम्मान और इज्जत मिलती  है, उस मान-सम्मान और इज्जत का मोल चुकाना उतना ही मुश्किल भी होता है। मेरा मानना है कि पुलिस के पास जनता त्वरित न्याय के विश्वास से आती है, इसलिए मेरा भी प्रयास रहता है कि पुलिस के पास आने वाली हर जायज शिकायत पर प्राथमिकता के आधार पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई हो और पीडि़त पक्ष को न्याय मिले। मेरी पहल मित्रवत प्रशासन की रही है, इसके लिए नित नए सुधार की कोशिश करता रहता हूं।

आम व्यक्ति के नजरिए से कहें, तो एसपी की नौकरी में तनाव। क्या सचमुच ऐसा है?

तनाव हर जवाबदेह प्रोफेशन का हिस्सा है, इसे अलग नहीं माना जा सकता । बस इसे अधिकारी किस तरह से लेते हैं यहां यह मायने रखता है। एक पुलिस अधीक्षक होने के नाते मेरी जिम्मेदारी जहां कानून की पालना करवाना है वहीं समाज में शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखना भी प्राथमिकता है।

अधिकारी बनने का सपना संजोए युवाओं को किस सोच के साथ सेवा में आना चाहिए?

सिविल सर्विसेज में तभी आएं जब आप में सेवा भाव हो , बिना सेवा भाव के न तो जॉब के साथ न्याय होगा, न जनता के साथ और न ही अपनी आत्मा के साथ। आज प्रशासनिक अधिकारियों के पास कार्य करने की व्यापक शक्तियां हैं जिस कारण कई बार उनकी आलोचना भी की जाती है, लेकिन, यदि इस शक्ति का सही इस्तेमाल किया जाए तो वह देश की दशा और दिशा दोनों बदल सकता है। यही वजह है कि बड़े बदलाव या कुछ अच्छा कर गुजरने की चाह रखने वाले युवा इस नौकरी की ओर आकर्षित होते हैं और इस बड़ी भूमिका में खुद को साबित भी करते हैं।

विपिन शर्मा, बीबीएन

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