स्टाल लगाने के लिए अभी देरी

चंडीगढ़ – चंडीगढ़ की विभिन्न मार्किटों त्योहारों के मौसम में दुकानों के आगे दुकानदारों द्वारा स्टाल्स लगाए जाने की अनुमति दिए जाने का मामला सोमवार को भी नहीं सुलझा। दुकानदार दिवाली से तीन दिन पहले निगम से पर्ची कटा कर अपनी दुकानों के आगे स्टाल लगाते हैं। इस संबंध में सोमवार को नगर निगम ने अधिकारियों की बैठक बुलाई हुई थी, जिसमे स्टाल्स लगाए जाने संबंधी फैसला लिया जाना था, लेकिन निगम कोई फैसला नहीं ले सका। दिवाली को अब केवल 13 दिन बचे हैं। निगम ने अब इस संबंध में मुख्यवास्तुकार से राय मांगी है। इससे पूर्व स्टैंडिंग काउंसिल ने स्टाल लगाने की अनुमति दिए जाने का मामला निगम पर छोड़ दिया था। निगम मुख्य वास्तुकार से यह जानना चाहता है कि क्या बाजारों में लगे हुए पेवर ब्लॉक पर स्टाल की मंजूरी दी जा सकती है। वहीं कानूनी राय में भी पार्किंग और दुकानों के कॉरिडोर में स्टाल को मंजूरी न देने के लिए कहा गया है। उल्लेखनीय है कि करवाचौथ के लिए मेंहदी के स्टाल सामुदायिक केंद्रों में लगाए जाने का निर्णय निगम ले चुका है। इससे पूर्व दशहरा पर भी स्टाल्स नहीं लगाए गए थे, जिससे न केवल वेंडर्स, व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा, बल्कि निगम को भी वित्तीय नुकसान हुआ।  निगम हर वर्ष त्योहारों के मौसम में स्टाल्स लगाने के एवज में पैसे लेकर स्टाल्स लगाए जाने की अनुमति देता आया है, लेकिन इस बार मामला हाई कोर्ट में  होने के चलते वो किसी किस्म का रिस्क नहीं लेना चाहता। पहले व्यापार मंडल के चेयरमैन चरणजीव सिंह ने अपने बयान में कहा था कि बाजारों में स्टाल लगाने की मंजूरी न मिलने से इस बार व्यापारी काफी परेशान हैं। कई व्यापारियों ने माल मंगवा लिया है पर अब उन्हें नुकसान होने का खतरा है। कई व्यापारी ऐसे भी हैं, जिन्होंने माल नहीं मंगवाया है। वहीं व्यापार मंडल के महासचिव संजीव चढ्ढा ने कहा था कि व्यापारियों को गैर-रजिस्टर्ड वेंडर्स नहीं माना जा सकता है। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने गैर रजिस्टर्ड वेंडर्स को हटाने के निर्देश दिए हैं ऐसे में व्यापारियो को अपनी दुकानों के बाहर स्टाल लगाने की मंजूरी देनी चाहिए। ऐसा न करके नगर निगम खुद ही फेस्टिवल मौसम को खत्म कर रहा है।कांग्रेसी पार्षद व निगम में  विपक्ष के नेता देवेंद्र सिंह बबला ने भी प्रशाशक को पत्र लिख कर स्टाल्स लगाने दिए  जाने की अनुमति मांगी है। 

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