हमीरपुर अस्पताल में 25 लाख की गड़बड़

विभागीय जांच में गड़बड़झाले की पुष्टि, प्रदेश सरकार को सौंपी रिपोर्ट, जल्द होगा फैसला

शिमला -क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर में 25 लाख का गबन हुआ है। ऑडिट पैरा के आधार पर बिठाई गई विभागीय जांच में इस घोटाले की पुष्टि हुई है। हमीरपुर मेडिकल कालेज के ज्वाइंट डायरेक्टर की तीन सदस्यीय कमेटी ने इस घोटाले की जांच रिपोर्ट गुरुवार को सरकार को सौंप दी है। कमेटी ने इस मामले में एजी ऑफिस से स्पेशल ऑडिट की सिफारिश भी की है। सूचना के अनुसार कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर के तत्कालीन दो चिकित्सा अधिकारियों (एमएस) सहित संबंधित कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उल्लेखनीय है कि क्षेत्रीय अस्पताल अब राधाकृष्णन मेडिकल कालेज बन चुका है। जांच में कहा गया है कि क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर में यूजर चार्जेज फंड में 24 लाख, 64 हजार का गबन हुआ है। अस्पताल के यूजर चार्जेज की यह राशि अप्रैल, 2015 से अप्रैल, 2017 के बीच डकारी गई है। यह गबन मेडिकल कालेज के प्रिंसीपल अनिल चौहान ने क्षेत्रीय अस्पताल के ऑडिट पैरा की रिपोर्ट में पकड़ा था। ऑडिट पैरा में कहा गया था कि दो साल में हमीरपुर क्षेत्रीय अस्पताल को विभिन्न यूजर चार्जेज से दो करोड,़ 13 लाख, 36 हजार, 237 रुपए की राशि प्राप्त हुई, लेकिन बैंक में सिर्फ एक करोड़, 89 लाख 72 हजार 378 रुपए ही जमा हुए। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि रोजाना प्राप्त हुई यूजर चार्जेज की राशि व बैंक डिपोजिट में भारी अंतर है। यूजर चार्जेज की राशि का ब्यौरा रोगी कल्याण समिति के कैशियर द्वारा रखा जाता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राप्त यूजर चार्जेज राशि और बैंक में डिपोजिट राशि के बीच 25 लाख 40 हजार 159 रुपए का भारी अंतर है। दो सालों की तुलनात्मक रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ है कि यूजर चार्जेज की प्राप्त राशि और कुल डिपोजिट में 23 लाख 63 हजार 859 रुपए का अंतर है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015-16 में यूजर चार्जेज की कुल राशि 97 लाख 96 हजार 59 रुपए प्राप्त हुई। इसके विरुद्ध बैंक में 86 लाख 60 हजार 66 रुपए जमा किए गए। इस प्रकार से प्राप्त राशि और जमा राशि में 12 लाख 71 हजार 61 रुपए का अंतर दर्ज है। रिपोर्ट के अनुसार बैंक में एक लाख 35 हजार 058 रुपए ज्यादा जमा किए गए हैं। इसके चलते अप्रैल, 2015 से अप्रैल 2016 तक 11 लाख 36 हजार तीन रुपए का गबन हुआ है। इसी तरह वर्ष 2016-17 में यूजर चार्जिस की कुल राशि एक करोड़ 15 लाख 40 हजार 168 रुपए प्राप्त हुई। इसके विरुद्ध बैंक में एक करोड़ तीन लाख 12 हजार 312 रुपए जमा किए गए। इससे प्राप्त राशि और जमा राशि में 12 लाख 69 हजार 98 रुपए का अंतर दर्ज है। वहीं, बैंक में 41 हजार 212 रुपए ज्यादा जमा किए गए। इसके चलते अप्रैल, 2016 से अप्रैल, 2017 तक 14 लाख 42 हजार 136 रुपए का गबन हुआ है। बहरहाल ऑडिट पैरा रिपोर्र्ट के इन आरोपों की विभागीय जांच में पुष्टि हुई है। इसके चलते अब राज्य सरकार इस पर बड़ा फैसला ले सकती है।

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