अयोध्या पर फैसले से पहले…

Nov 9th, 2019 12:05 am

प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया है कि अयोध्या पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला कुछ भी हो, लेकिन देशवासी शांति और सद्भाव बनाए रखें। उधर लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के डीएम और एसएसपी से बातचीत की और कहा कि अयोध्या में हेलीकाप्टर से पेट्रोलिंग की व्यवस्था की जाए। सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करें और धर्मगुरुओं से शांति व्यवस्था की अपील कराएं। अयोध्या की किलेबंदी की जा रही है। वहां पहुंचने वाली तमाम सड़कें बंद की जा रही हैं। अयोध्या में 4000 अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं। पीएसी, आरएएफ  और सिविल फोर्स ने अपने-अपने मोर्चे संभाल लिए हैं। ड्रोन से अयोध्या की निगरानी जारी है और प्रशासन मुस्तैद है। अयोध्या में 14 कोसी के बाद पंचकोसी परिक्रमा के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद हैं, लिहाजा कार्तिक पूर्णिमा के तहत विभिन्न चरणों में होने वाले धार्मिक आयोजन बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। इन व्यवस्थाओं से गौरतलब यह है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को अलर्ट जारी किया है। आखिर सभी सद्भावी बयान और बेहद कड़े बंदोबस्त किस यथार्थ के संकेत हैं? क्या अयोध्या में तनाव या दंगे फसाद के आसार हैं? क्या अयोध्या पर सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद सद्भाव का माहौल सवालिया है? या ये तमाम बंदोबस्त एहतियातन हैं? बहरहाल अब अयोध्या विवाद पर फैसले की तारीख बेहद करीब आ रही है। 17 नवंबर को प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई सेवानिवृत्त होंगे। उससे पहले 16 नवंबर को शनिवार है। उस दिन अवकाश होता है, लेकिन अदालत चाहे, तो उस दिन भी फैसला सुना सकती है। इस सप्ताह 9, 10 नवंबर को अवकाश है। कार्तिक पूर्णिमा के कारण 11-12 नवंबर को भी सर्वोच्च न्यायालय में अवकाश है, लिहाजा मात्र तीन दिन-13,14,15 नवंबर ही शेष हैं। इन तारीखों पर संविधान पीठ कभी भी ऐतिहासिक फैसला सुना सकती है। अब राम मंदिर या मस्जिद के पक्ष में फैसला आए, लेकिन यह अंतिम और समग्र होना चाहिए। अब यह विवादास्पद मुद्दा समाप्त होना ही चाहिए। संवेदनशीलता की पराकाष्ठा है कि रेलवे पुलिस बल ने सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत 78 प्रमुख रेलवे स्टेशनों की पहचान की गई है, जहां अधिक सुरक्षा तैनात की जा रही है। परमाणु बिजली केंद्र और एयरफोर्स स्टेशन को भी संवेदनशील माना गया है। अयोध्या पर संविधान पीठ का फैसला आने की आड़ में ही माहौल खराब करने के इनपुट खुफिया एजेंसियों ने दिए हैं। मेरठ-हापुड़ में सेना की छावनी है। गाजियाबाद, सहारनपुर और बागपत में सैन्य संस्थान हैं। यहां आतंकी हमले की आशंका जताई गई है। बहरहाल फैसले से पहले माहौल सामान्य नहीं लग रहा है, लेकिन मंदिर-मस्जिद से ज्यादा कीमती यह देश है। ईश्वर या अल्लाह यह नहीं पूछेगा कि आप मंदिर-मस्जिद बनाने में नाकाम क्यों रहे, लेकिन किसी इनसान का लहू बहा और लाशें बिछीं, तो उस कलंक, पाप का हिसाब जरूर देना पड़ेगा। हम सभी हिंदू और मुसलमान एक ही देश के संवैधानिक नागरिक हैं। यदि हम ही नहीं रहेंगे, तो इस देश का अस्तित्व भी सवालिया होगा। ऐतिहासिक अतीत में असंख्य मंदिर कमोबेश भारत के मुसलमानों ने नहीं तोड़े। उनमें ज्यादातर खुद को बाबर या औरंगजेब की पीढि़यां नहीं मानते। वे उन मुगल आक्रांताओं को खारिज भी करते हैं। फिर भारतीय मुसलमानों के साथ कैसा तनाव और कैसा टकराव…! हिंदू-मुस्लिम के प्रमुख धर्मगुरु संयुक्त रूप से यकीन दिला रहे हैं कि जो भी फैसला होगा, वह मान्य और स्वीकार्य होगा, लेकिन सतही तौर पर यह यकीन आम आदमी को क्यों नहीं है? विश्व में अयोध्या का महत्त्व इसी से है कि यह भगवान श्री राम की जन्म भूमि है। क्यों न इसी विचार के तहत विवादास्पद भूमि राम मंदिर वालों को दे दी जाए और सरयू के उसी सांस्कृतिक शहर में एक खूबसूरत मस्जिद का भी निर्माण हो। यदि ऐसा होता है, तो धर्मनिरपेक्षता, सदाशयता और भाईचारे की वह ऐतिहासिक मिसाल होगी।

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