ईमानदारी की दुकान…बच्चे खुद ले रहे सामान, पैसों का भी रख रहे हिसाब

गर्ल्ज स्कूल चंबा में अनोखी पहल; विद्यार्थियों को ईमानदार बनाने के लिए बिना दुकानदार की खुली दुकान, पढ़ाई-लिखाई की सभी वस्तुएं उपलब्ध

चंबा –यह बाजार, गली-मोहल्लों एवं चौराहों पर बनी आम दुकान नहीं हैं.. ये ईमानदारी की दुकान (पाठशाला) है। जी हां! राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक गर्ल्ज (मॉडल) स्कूल चंबा में ईमानदारी की दुकान (पाठशाला) खुली है। बिना दुकानदार के चलने वाली इस दुकान में पढ़ाई लिखाई का सब सामान उपलब्ध होगा, जहां छात्र खुद सामान खरीद कर उसका बिल अदा करेंगे। स्कूल के शारीरिक शिक्षक मोहम्मद आजम शेख द्वारा शुरू की गई इस अनोखी पहल से छात्रों को स्कूल में इस्तेमाल होने वाली पढ़ाई-लिखाई की जरूरतमंद वस्तुएं उपलब्ध हो रही हैं, साथ ही छात्र इस पाठशाला के माध्यम से ईमानदारी के गुण भी सीख रहे हैं। शिक्षक मोहम्मद ने बताया स्कूल में खोेले गए ईमानदारी की पाठशाला के स्टोर में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी हुई वस्तुएं जैसे कॉपी, पेन, पैंसिल, गम, फाइल कवर, कला विषय के लिए रंग, शीट्स, लड़कियों के लिए सैनिटरी नैपकीन इत्यादि पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी सभी तरह की वस्तुएं रखी गई है।  ईमानदारी की पाठशाला स्टोर में सामान देने वाला भी कोई नहीं होेगा और पैसे लेने वाला भी कोई नहीं। इस स्टोर का सारा संचालन स्वयं बच्चे कर रहे हैं। छात्र स्टोर से बिना किसी से पूछे एवं इंतजार किए जरूरत की चीजें लेते हैं, वस्तुओं की कीमत उस पर पहले ही अंकित है, जो कि बाजार से कम है, जिसके हिसाब से छात्र उसकी कीमत अदा कर रहे हैं। दुकान में कैश बॉक्स भी बिना लॉक के ही है, ताकि छात्र खुले पैसों का हिसाब-किताब भी इस पाठशाला में सीख सकें।  ईमानदारी की पाठशाला में गरीब तबके से संबंध रखने वाले छात्रों के लिए बहुत बड़ा सहारा बनी है। गरीब तबके के छात्रों को पढ़ाई लिखाई की वस्तुएं लेने पर केई पैसा नही नहीं खर्च नहीं करना पड़ता। तथा उसकी पढ़ाई के लिए जरूरी सामान फ्री दिया जाता है उस सामान की कीमत संचालक शिक्षक स्ंवय चुकाते है ताकि वह बचे हुए धन का उपयोग पढ़ाई के अन्य चीजों के लिए खर्च कर सकें।

सुबह खुद दुकान खोल रहे बच्चे

ईमानदारी की पाठशाला के संचालक शिक्षक मोहम्मद शेख का कहना है कि इस ईमानदारी की पाठशाला (दुकान) का संर्पूण संचालन बच्चों द्वारा किया जाता है। सुबह स्टोर का सामान गिनना, उसे लगाना, कम हुए सामान की सूची बनाना, जो बच्चों की और जरूरतें हैं उनकी सूची बनाना व छुट्टी के समय स्टोर को बंद करना इत्यादि सभी तरह के कार्य स्कूल छात्रों की तरफ से ही निपटाए जा रहे हैं। इससे इमानदारी के अलावा जिम्मेदारी के कार्य भी छात्र सीख रहे हैं। उन्होंने बताया कि ईमानदारी की पाठशाला के संचालन के लिए स्कूल की प्राधानाचार्य का भी अहम योगदान है। 

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