ऊना का फ्यूचर ब्राइट

Nov 4th, 2019 12:10 am

परीक्षा परिणामों की मैरिट आए और उसमें एजुकेशन हब ऊना के छात्रों का नाम न हो, यह मुमकिन ही नहीं। लाखों छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रहे ऊना जिला के स्कूल ऐसी क्रांति लाए कि शिक्षा के साथ-साथ खुले रोजगार के दरवाजों से प्रदेश ने तरक्की की राह पकड़ ली। हिमाचली ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के होनहारों का कल संवार रहे ऊना में क्या है शिक्षा की कहानी, बता रहे हैं

हमारे संवाददाता — जतिंद्र कंवर, अनिल पटियाल

शिक्षा क्षेत्र में जिला ऊना लगातार नई बुलंदियां छू रहा है। जिला के होनहार विद्यार्थियों ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जिला में शिक्षा के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास हो रहे हैं। ऊना शहर व आसपास के क्षेत्र में करीब दो दर्जन सरकारी और निजी स्कूल बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर इन नौनिहालों का भविष्य संवार रहे हैं। ऊना मुख्यालय पर सरकारी क्षेत्र में कई दशकों से शिक्षा की अलख जगा रहे राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बाल शीघ्र ही भव्य रूप में नजर आएगा। यहां सरकार ने पुराने जर्जर भवन गिराकर नए भवन के निर्माण की मंजूरी दी है। शहर के बीचोंबीच ही राजकीय प्राथमिक स्कूल भव्य भवन में चल रहा है। यह सरकारी स्कूल प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में शहर के टॉप प्राइवेट स्कूलों को टक्कर दे रहा है। यहां बच्चों को स्मार्ट कक्षाओं में प्ले-वे मैथड से शिक्षा दी जा रही है। ऊना मुख्यालय पर ही सरकारी क्षेत्र में कन्याओं के लिए जिला का एकमात्र राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल भी चल रहा है। सरकारी क्षेत्र के ये स्कूल दो दशक पूर्व तक बच्चों के लिए प्रारंभिक व उच्च शिक्षा प्राप्त करने का एकमात्र साधन थे, लेकिन एक दशक से ऊना शहर के पांच से सात किलोमीटर की परिधि में दो दर्जन से अधिक निजी स्कूलों की स्थापना से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में चिंताजनक गिरावट दर्ज हुई है। निजी क्षेत्र में डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल ऊना का इतिहास एक शताब्दी पुराना है, जबकि माउंट कार्मल स्कूल रक्कड़ भी 1982 से लगातार शिक्षा के उत्थान में योगदान दे रहा है।

ये स्कूल संवार रहे कल

ऊना शहर की पांच से सात किलोमीटर की परिधि में माउंट कार्मल सीनियर सेकेंडरी स्कूल ऊना, स्कॉलर्स यूनिफाइड स्कूल, रॉकफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल, डीएवी सेंटनेरी पब्लिक स्कूल ऊना, डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, वशिष्ट पब्लिक स्कूल ऊना, एसएसआरवीएम ऊना, लार्ड कृष्णा पब्लिक स्कूल, जेएस विज्डम स्कूल ऊना, वशिष्ट पब्लिक स्कूल ऊना, कल्याण माउंट शिवालिक स्कूल ऊना, चिल्ड्रन वैली पब्लिक स्कूल ऊना, शिवाजी मॉडल स्कूल कुरियाला, स्वास्तिक पब्लिक स्कूल मलाहत, सरस्वती स्कूल ऊना, डेफोडिल्स स्कूल, किड्जी, शेमरॉक स्कूल नौनिहालों का भविष्य संवार रहे हैं। वहीं, सरकारी क्षेत्र में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छात्र ऊना, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छात्रा ऊना, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टक्का, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बहडाला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला समूरकलां में बेहतर शिक्षा प्रदान की जा रही है।

769 सरकारी स्कूलों में 60739 विद्यार्थी

ऊना जिला के अंतर्गत 769 सरकारी स्कूलों में 60739 स्कूली बच्चों को शिक्षा मुहैया करवाई जा रही है। इन बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में 3147 शिक्षकों की तैनाती की गई है। जिला में 153 सीनियर सेकेंडरी स्कूल, 48 हाई स्कूल, 85 मिडल स्कूल, 499 प्राइमरी स्कूल हैं। उच्च शिक्षा विभाग ऊना में 1145 प्रवक्ता, 90 डीपीई की तैनाती की गई है। इसके अलावा प्रारंभिक शिक्षा विभाग के तहत 229 पद शास्त्री, भाषा अध्यापक 164, ड्राइंग टीचर 133, पीईटी के 166 पद भरे हुए हैं। शास्त्री अध्यापकों के 54, भाषा अध्यापक के 38, ड्राइंग मास्टर के 137, पीईटी के 90 पद खाली चले हुए हैं। इसके अलावा जिला में 128 प्राइवेट स्कूल हैं, जिसमें सैकड़ों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने के लिए अपेक्षानुसार स्कूल स्टाफ तैनात किया गया है।

ऊना में ट्रिप्पल आईटी

ऊना जिला के साथ लगले गांव सलोह में प्रदेश की एकमात्र ट्रिप्पल आईटी (इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नॉलाजी) स्वीकृत हुई है। इसके लिए 60 एकड़ जमीन भी चिन्हित की गई है। वर्ष 2014 से इसकी कक्षाएं एनआईटी हमीरपुर में चल रही थी, वहीं इसी वर्ष से कर्मपुर गांव में एक निजी भवन को किराए पर लेकर इसकी कक्षाएं शुरू की गई हैं।

सरकारी स्कूलों में कार्यक्रमों की भरमार

एक ओर जहां सरकारी स्कूलों में आए दिन कार्यक्रमों की भरमार रहती है। वहीं, दूसरी ओर से निजी स्कूलों में कार्यक्रमों के बजाय बच्चों की शिक्षा की ओर ध्यान दिया जा रहा है। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को शिक्षा के साथ-साथ प्रशिक्षण शिविरों के अलावा अन्य अतिरिक्त कार्यों का बोझ भी डाला जाता है।

प्राइवेट स्कूलों में बच्चों के हिसाब से शिक्षक

जिला में निजी स्कूलों में बच्चों के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती है। अधिकांश निजी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 40ः1 का है। इसके साथ ही निजी स्कूलों में बच्चो को बेहतर ट्रांसपोर्ट सुविधा भी प्रदान की जा रही है, जिसके लिए बसों की फ्लीट करीब-करीब सभी स्कूलों के पास है।

निजी स्कूलों में कितने छात्र

शहर के आसपास करीब दो दर्जन निजी स्कूलों में 20 हजार छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। माउंट कार्मल स्कूल रक्कड़ में करीब 2500, वीपीएस में करीब 1050, रॉकफोर्ड स्कूल में 1150, डीएवी पब्लिक ऊना में 2450, डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल ऊना में 1250, एसएसआरवीएम ऊना में 1400, स्कॉलर्ज यूनिफाइड ऊना में 550, लार्ड कृष्णा पब्लिक स्कूल ऊना में 600, जेएस विस्डम वर्ल्ड स्कूल में 300, किड्जी स्कूल में 200, डेफोडिल्ज स्कूल में 200, चिल्ड्रन वैली पब्लिक स्कूल में करीब 350 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़

ऊना शहर में पिछले डेढ़ दशक में निजी क्षेत्र में स्कूलों की स्थापना का जो क्रम शुरू हुआ, वह अब भी बदस्तूर जारी है। एक के बाद एक निजी क्षेत्र में खुले इन स्कूलों से शिक्षण संस्थानों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का युग भी शुरू हुआ, जिसमें बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अलावा शिक्षा के लिए माकूल वातावरण व आधारभूत ढांचा उपलब्ध करवाने के लिए इन संस्थानों में एक-दूसरे से बेहतर करने की होड़ लग गई है। क्लासरूम को स्मार्ट रूम में तबदील करने के साथ-साथ स्कूलों में लैंग्वेज लैब्स, कम्प्यूटर लैब्स व साइंस लैब्स अपडेट की जा रही हैं। किंडरगार्डन सेक्शन में तो स्कूलों में बच्चों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग शैली व शिक्षा मॉडयूल्स अपनाए जा रहे हैं। किड्जी, यूरो किड्ज, एक्सीड, शेमरॉक जैसे शिक्षा के ब्रांड ऊना में पहुंच गए हैं।

कोचिंग इंस्टीच्यूट भी कमा रहे नाम

ऊना शहर में मौजूदा दौर में शिक्षा क्षेत्र की जरूरतें देखते हुए कोचिंग संस्थानों की भी बाढ़ आई है। हालाांकि इसमें कुछेक संस्थान ही अभी तक अपनी विश्वसनियता व नाम बना पाए हैं। एजुपेस कोचिंग संस्थान ने ऊना शहर में पांच साल के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में बच्चों को पारंगत बनाकर बेहतर नाम बनाया है। इसी प्रकार कुछ अन्य कोचिंग संस्थान भी इस क्षेत्र में बेहतर काम कर रहे हैं।

उच्च शिक्षा में भी नंबर वन

ऊना मुख्यालय में राजकीय पीजी कालेज व करीब तीन किलोमीटर दूर कोटलाखुर्द गांव में एलजेएन हिमोत्कर्ष कन्या महाविद्यालय में विद्यार्थियों को स्नातक व स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ-साथ व्यवसायिक व तकनीकी शिक्षा भी प्रदान की जा रही है। राजकीय पीजी कालेज में तीन हजार के करीब छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। यहां बीए, बीकॉम, बीएससी मेडिकल व नॉन मेडिकल, एमबीए, एमसीए, बीबीए, बीसीए, पीजीडीसीए, एमए अंग्रेजी व राजनीति शास्त्र तथा बीवॉक की शिक्षा दी जा रही है। एलजेएन हिमोत्कर्ष कन्या महाविद्यालय जिला का एकमात्र गर्ल्ज कालेज है, जिसमें बीए, बीकॉम, पीजीडीसीए, बीसीए, बीबीए की शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही शिक्षा भारती बीएड कालेज समूर खुर्द प्रदेश भर के विद्यार्थियों के लिए बीएड हेतु बेहतरीन शिक्षा संस्थान बनकर उभरा है।

1908 में शुरू हुआ सनातन धर्म स्कूल

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल ऊना हजारों छात्रों का भविष्य संवार चुका है। ऊना शहर में वर्ष 1908 में सनातन धर्म (एसडी) स्कूल शुरू हुआ। सरकार की ओर से वर्ष 1974 में अपने अधीन ले लिया गया। वर्ष 1989 में स्कूल का दर्जा बढ़ाकर सीनियर सेकेंडरी किया गया। 1991 तक स्कूल का कोई न कोई छात्र बोर्ड परीक्षाओं में प्रदेश की मैरिट सूची में नाम दर्ज करवाता था। वहीं, वर्तमान में तो अभी तक स्कूल के मेन गेट पर, तो अभी तक एसडी स्कूल का ही नाम चला हुआ है। स्कूल में वर्तमान में करीब पांच सौ विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

टेंशन फ्री हैं बच्चों के पेरेंट्स

शहरी स्कूलों को लग रही दौड़

बच्चों को शहरी स्कूलों में बेहतर शिक्षा मिल रही है। हर अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहता है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी रहती है, लेकिन निजी स्कूलों में बच्चों के अनुरूप शिक्षक होते हैं। अभिभावक अपने बच्चों को शहरी स्कूलों में भेजने में ही अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं

डा. जागृति दत्ता, अभिभावक

क्वालिटी एजुकेशन को तरजीह

शहरी स्कूलों में बच्चों को शिक्षा मुहैया करवाने के लिए क्वालिफाइड स्टाफ, स्ट्रक्चर के अलावा अन्य सुविधाएं मिल रही हैं। स्कूलों में शिक्षा के अलावा गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है। निजी स्कूलों में क्वालिटी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है

वंदना ठाकुर, अभिभावक

शिक्षा के लिए सरकार के प्रयास सराहनीय

सरकार सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने में लगातार प्रयासरत है। सरकारी स्कूलों के होनहारों ने भी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वहीं, शहरी स्कूलों में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है

सुरेंद्र शर्मा, अभिभावक

मैरिट में चमके शहरी स्कूलों के होनहार

वर्तमान में शहरी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है। ऊना शहर में भी ऐसे स्कूल हैं, जहां बच्चे मैरिट में स्थान हासिल कर रहे हैं। शहरी स्कूलों में और अधिक सुविधा मुहैया करवाई जाए, तो इन स्कूलों के बच्चे भविष्य में और बेहतर परिणाम दे सकते हैं

डा. कपिल भरवाल, अभिभावक

पढ़ाई के साथ हर एक्टिविटी पर फोकस

शहरी स्कूलों में बच्चों को अच्छी शिक्षा मुहैया करवाई जा रही है। शहरी स्कूलों में शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की जा जाती हैं, जो कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक होती हैं। इसके चलते शहरी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है

रघु पुरी, अभिभावक

जी-तोड़ मेहनत कर रहे शिक्षक

अब तो घरद्वार ही हर सुविधा

एक समय था, जब शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूर-दूर जाना पड़ता था, लेकिन वर्तमान में तो शिक्षा ग्रहण करने के लिए अब बच्चों को घरद्वार ही यह सुविधा मिल रही है। हालांकि सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में शिक्षा के रूप में बच्चों को बेहतर सुविधा मिल रही है, लेकिन सरकारी ढांचा अभी भी कई खामियों से भरा हुआ है।  वहीं, निजी क्षेत्र में शिक्षा को नए रूप से ढाला गया है 

 — शमशेर सिंह, शिक्षाविद

निजी क्षेत्र में हो रहे बेहतर प्रयास

शिक्षा को लेकर हर ओर उचित कदम उठाए जा रहे हैं, जिसका लाभ बच्चों को मिल रहा है। शिक्षा के उत्थान के लिए सरकार भी प्रयास कर रही है, लेकिन बढ़ती जरूरत के अनुसार शिक्षा के उत्थान के लिए निजी क्षेत्र में भी बेहतर प्रयास किए गए हैं, जिसके चलते आज बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है                                      —  दीपशिखा कौशल, प्राचार्य, डेफोडिल पब्लिक स्कूल 

बाहर जाने की जरूरत नहीं

शिक्षा के क्षेत्र में जिला में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। पहले जहां जिला के बच्चों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ता था। वहीं, अब बच्चों को उच्च व व्यवसायिक शिक्षा भी अपने जिला में ही मिल रही है। उच्च शिक्षा के लिए कालेज में विद्यार्थियों की सुविधानुसार नए कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। वर्तमान में कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है कि वहां के बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए दस से बारह किलोमीटर तक का सफर करना पड़ता हो, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है। भविष्य में इसमें और बढ़ोतरी होगी

—  डा. त्रिलोक चंद, प्राचार्य, पीजी कालेज ऊना

राष्ट्र स्तर तक चमके होनहार

शिक्षा के क्षेत्र में जिला में बेहतर प्रयास किए गए हैं, जिसके चलते बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है। बेहतर शिक्षा मिलने के चलते जिला के कई होनहार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। सरकार और शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयासों से ही साकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। स्कूलों की बढ़ती संख्या से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला शिक्षा का हब बन चुका है। अब यहां से बच्चों के उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए भी बाहरी राज्यों में नहीं जाना पड़ रहा है। शिक्षा के उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं

—  राममूर्ति लट्ठ, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य

मिल रहा स्पेशल बजट

ऊना जिला लगातार शिक्षा के क्षेत्र में वृद्धि दर्ज कर रहा है। सरकार की ओर से लगातार जिला के बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने के लिए स्पेशल बजट प्रदान किया जा रहा है। स्कूलों में इन्फ्रास्टक्चर मुहैया करवाया जा रहा है। हालांकि इससे पहले बच्चों को इस तरह की बहुत कम सुविधाएं ही मिल पाती हैं, लेकिन आए दिन हो रहे बदलाव के चलते ये सुविधाएं भी अब बच्चों के पास पहुंच रही हैं, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके

— देवेंद्र चौहान, प्रधानाचार्य डाइट, ऊना

 

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