‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ के विवाद पर संसद में बोली सरकार, ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं, संविधान में सभी भाषाएं एक समान

नई दिल्ली  –  देश का संविधान सभी भाषाओं को एक समान मानता है और ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ के किसी भी प्रावधान पर विचार नहीं किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने एक सवाल के जवाब में बुधवार को संसद में यह जानकारी दी। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि देश का संविधान सभी भाषाओं को एक समान मानता है और एक देश, एक भाषा जैसे किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं चल रहा है। बता दें कि हिंदी दिवस के मौके पर गृह मंत्री अमित शाह ने ‘एक देश, एक भाषा’ की बात करते हुए हिंदी को अपनाने पर जोर दिया था। इस पर कर्नाटक, तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत के राज्यों ने विरोध किया था। हालांकि इसके बाद होम मिनिस्टर ने सफाई देते हुए कहा था कि मैंने हिंदी को थोपने की बात नहीं की बल्कि यह कहा कि हमें अपनी मातृभाषा के बाद हिंदी भी सीखनी चाहिए। इसी को लेकर संसद में एक सवाल के जवाब में जी. किशन रेड्डी ने यह जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि देश की सभी भाषाओं को संविधान एक समान मानता है। गृह राज्य मंत्री ने कहा, ‘भाषाओं का मसला संविधान की अनुसूची में है। इसका पालन केंद्र और राज्य सरकारें करती हैं।’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से भी अलग-अलग भाषाओं को लेकर अनुदान जारी नहीं किया जाता।

अमित शाह ने दी थी सफाई, थोपने की नहीं सीखने की बात कही
14 सितंबर के अपने बयान पर विवाद के बाद होम मिनिस्टर अमित शाह ने कहा था, ‘मैंने कभी किसी क्षेत्रीय भाषा पर हिंदी थोपने की बात नहीं की थी। मैंने एक मातृभाषा सीखने के बाद दूसरी भाषा के तौर पर हिंदी सीखने का आग्रह किया था। मैं खुद एक गैर हिंदी भाषी राज्य गुजरात से आता हूं। अगर कोई व्यक्ति इसपर राजनीति करना चाहता है तो वह उसकी इच्छा है।’

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