और जम गई मानतलाई झील…

भुंतर – जिला कुल्लू में स्थित पार्वती ग्लेश्यिर सहित तमाम ऊंची पर्वतमालाओं पर हुई बर्फबारी से तापमान में आई भारी गिरावट से सबसे दुर्गम व मशहूर मानतलाई झील जम गई है। भारी बर्फबारी ने मानतलाई पहुंचने वाले रास्ते को भी पूरी तरह से बंद कर दिया है। लिहाजा प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से खीरगंगा, मानतलाई समेत अन्य ऊंचे इलाकों के लिए साहसिक यात्रा करने वाले ट्रैकरों को अलर्ट कर दिया है। मौसम को देखते हुए यहां पर आने वाले दिनों में और ज्यादा बर्फ की संभावना है और ऐसे में आने वाले चार से पांच माह के लिए मानतलाई के रास्ते फिलहाल ट्रैकिंग के लिए बंद हो गए हैं और यहां पर किसी भी प्रकार मानवीय गतिविधियां नहीं होंगी। तापमान के शून्य से नीचे जा गिरने से जहां घाटी के गलेशियर जम गए हैं, वहीं यह ऐतिहासिक मानतलाई झील बर्फ के बड़े प्लेटफार्म में तबदील हो गई है। इसके अलावा घाटी की अन्य छोटी-छोटी झीलों ने भी जमकर ठोस रूप धारण कर लिया है। इन झीलों के जम जाने से नदियों के जल स्तर में भारी कमी हुई है, जबकि यहां की विद्युत परियोजनाओं का उत्पादन भी काफी नीचे गिरना आरंभ हो गया है। जानकारी के अनुसार हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद गुरुवार को हुए ताजा हिमपात से तापमान शून्य से काफी नीचे लुढ़क जाने के चलते मानतलाई की झील बर्फ की सिंगी रूपी प्लेट में बदल गई है और शीशे की तरह चमकने लगी हैं। इसके साथ सराऊ मंगा, मानतलाई टॉप वासुकी नाग, बड़ा शिंगरी तथा छोटा शिंगरी गलेशियर भी बर्फ के पहाड़ों में बदल गए है और मशहूर कुगू के ऊपरी क्षेत्रों के झरनें भी बर्फ की सिंगिंयों में तबदील हो गए हैं। इन झीलों के जम जाने से ब्यास और पार्वती के नदियों के जलस्तर में भारी गिरावट आ गई है। गलेशियरों पर बर्फबारी तथा झीलों के जम जाने से ट्रैकिंग रूट पांच महीनों के अंतराल के लिए लिए बंद हो गए है। प्रशासन ने भी इन ट्रैकिंग रूटों पर साहसिक यात्रियों को अलर्ट करते हुए न जाने की हिदायत दी है। मणिकर्ण के प्रसिद्ध ट्रैकर योग राज, रूप लाल ने बताया कि ट्रैकिंग रूट बर्फबारी के कारण बंद हो गए हैं।

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