कहानी : समझ आ गई बात

Nov 13th, 2019 12:20 am

गांव के सरकारी स्कूल में कक्षा सात में पढ़ने वाला तरुण रोज अपनी घर की पगडंडी से होता हुआ स्कूल पहुंचता था। पिछले कुछ दिनों से उसे रास्ते में पड़ने वाले खेत के साथ लगते पेड़ पर रोज एक प्यारी-सी रंग-बिरंगी चिडि़यां दिखाई पड़ रही थी। वह चिडि़या शायद पहली बार ही इस इलाके में आई थी। उस प्यारी सी सुंदर चिडि़या ने अपनी खूबसूरती से तरुण का मन मोह लिया था। वह रोज स्कूल जाने से पहले कुछ देर के लिए उसकी हरकतों को देखता रहता और फिर स्कूल के लिए निकल जाता। चिडि़या भी भोली-सी सूरत वाले तरुण को टहनी पर बैठी-बैठी निहारती रहती। ऐसा रोज ही होता। दोनों में जाने कब ऐसी गहरी दोस्ती होे गई कि दोनों एक-दूसरे के आसपास ही रहते थे। अगर कभी तरुण को घर से आने में देरी हो जाती तो चिडि़या उसे लेने उसके घर तक आ जाती और चीं-चीं की आवाज करते हुए उसके साथ-साथ स्कूल तक चलती रहती। इस दौरान वह कभी उसके कंधे पर तो कभी उसके सिर पर बैठकर उसके अपने लगाव को जाहिर करती थी। तरुण अब जैसे उसकी आवाज की भी आवाज को भी समझने लगा था। वह अपने हाथों और मुंह के इशारों से उसकी चीं-चीं का जवाब देने की कोशिश भी करता था। दोनों में एक प्यारा-सा रिश्ता जुड़ गया था। तरुण चिडि़या को रोज दाने खिलाता और उसके साथ खूब मस्ती करता।  तरुण के न चाहते हुए भी इस खूबसूरत चिडि़या और तरुण की दोस्ती की चर्चा पूरे स्कूल में होने लगी थी। यह सबके लिए सच में ही हैरान करने वाली बात थी। चिडि़या का तरुण के प्रति इस लगाव की अध्यापक भी प्रशंसा करते थे। चिडि़या को देखने की सबकी जिद पर एक बार तरुण चिडि़या को अपने स्कूल भी ले गया, लेकिन उसकी कक्षा के अमित ने चिडि़या को पंखों से उठाकर ऐसे अजीब से तरीके से उठाया और हवा में लहरा दिया कि चिडि़या के पंख टूटते-टूटते बचे। डर के मारे चिडि़या स्कूल से इतनी तेजी के साथ उड़ी कि उसने एक बार भी पीछे पलटकर नहीं देखा। उसे समझ आ गया था कि सभी बच्चे तरुण की तरह नहीं होते। इस घटना के बाद तरुण चिडि़या को कभी स्कूल नहीं ले गया और न ही चिडि़या स्कूल के रास्ते तरुण के साथ स्कूल की सीमा तक साथ गई। अमित तरुण के गांव में ही रहता था। वह तरुण की ही कक्षा में पढ़ता था। वह बहुत ही शरारती और ईर्ष्यालु किस्म का लड़का था। वह पक्षियों व अन्य जीवों को तंग करने के मजे लेता था। पक्षियों के घोंसले ढूंढ-ढूंढ कर उन्हें गिरा देता या फिर उनके अंडों को फोड़ देता था। इस आदत के लिए उसके सहपाठी और घर वाले उसे डांटते, लेकिन उसके कान में जूं तक न रेंगती। अमित ने अपने घर में मुर्गियों को भी पाल रखा था। उसे मूर्गियों के चूजे बहुत प्यारे लगते थे। यह उसके लिए एक अच्छी बात कही जा सकती थी। वह स्कूल जाने से पहले और स्कूल से आन के बाद उनकी खूब देखभाल करता था, लेकिन अमित ने जब से तरुण और चिडि़या की दोस्ती के बारे में सुना तो उसे बहुत ईर्ष्या होने लगी थी। वह इस चिडि़या को तरुण के पास नहीं बल्कि अपने पास पकड़कर रखना चाहता था। वह सोचता यदि उसने ऐसा कर लिया तो पूरे स्कूल में उसकी बल्ले-बल्ले हो जाएगी। बस, फिर क्या था। वह अब हर रोज उस चिडि़या को पकड़ने की कोशिश में लगा रहता। वह स्कूल के बाद चिडि़या वाले पेड़ के पास पहुंच जाता और दाना, रोटी आदि डालकर उसे रिझाता, लेकिन चिडि़या जरा भी उसके फेंके गए दानों के पास नहीं आती थी। स्कूल में उसके साथ किए गए अमित के व्यवहार को वह अभी तक नहीं भूल पाई थी। अमित उस खूबसूरत चिडि़या को पकड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ जाता, लेकिन चिडि़या वहां से डर के मारे उड़ जाती। अमित की सारी योजनाएं धरी की धरी रह गई थीं। जब काफी कोशिश के बाद भी वह चिडि़या उसकी पकड़ में नहीं आई तो एक दिन उसने अपनी असफलता के गुस्से में चिडि़या को एक जोर का पत्थर दे मारा। चिडि़या को पत्थर लगते-लगते बचा। जब उससे कुछ न बन पड़ा तो उसने थक- हार कर पेड़ के पास जाना ही छोड़ दिया। तरुण को जब अमित की चिडि़या को पकड़ने की बात का पता चला तो उसने अमित को समझाते हुए कहा, ‘ अमित, पशु-पक्षी भी हमसे प्यार की उम्मीद करते हैं। यूं गुस्से से या अन्य फिजूल कारण दिमाग में लिए तुम उनका दिल नहीं जीत सकते। तुम प्यार से उनके साथ बर्ताव करोगे तो वे अवश्य ही तुम्हारे करीब आएंगे’। अमित ने तरुण की बात को मजाक में लेते हुए जवाब दिया, अपने सुझाव तुम अपने पास ही रखो। इस मामले में मेरे तरीके तुमसे थोड़े अलग ही हैं। गर्मियों के दिन आ गए थे। तरुण ने देखा कि चिडि़या रोज तिनके इकट्ठे करके घोंसले में अंडे दिए हैं, तो अमित का शैतान दिमाग फिर से जाग उठा। उसे पता था कि यदि चिडि़या ने अंडे दिए हैं, तो वह फिर अपने घोंसले में ही मिलेगी। अमित ने एक पत्थर उठाया और चिडि़या पर दे मारा। चिडि़या डर के मारे अपने घोंसले से उड़ गई और पास के दूसरे पेड़ पर बैठ गई। उसने देखा कि अमित उसके घोंसने की ओर बढ़ रहा है। वह समझ गई कि अमित उसके अंडों और घोंसले को नुकसान पहुंचा सकता है। वह डर के मारे सीधे तरुण के घर की तरफ उड़ी और घर पहुंच कर चीं-चीं की आवाज और चोंच से उसकी कमीज की बाजू को पकड़कर उसे चलने के लिए कहने लगी। तरुण समझ गया कि कोई खतरा जरूर है।

-पवन चौहान, सुंदरनगर

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