कालिका सहस्रनाम

-गतांक से आगे…

गृध्र-रूपा शिवा-रूपा चक्रिणी चक्र-रूप-धृव्।

लिंगाभिधायिनी लिंग-प्रिया लिंग-निवासिनी।। 121।।

लिंगस्था लिंगनी लिंग-रूपिणी लिंग-सुंदरी।

लिंग-गीतिमहा-प्रीता भग-गीतिर्महा-सुखा।। 122।।

लिंग-नाम-सदानंदा भग-नाम सदा-रतिः।

लिंग-माला-वंहृठ-भूषा भग-माला-विभूषणा।। 123।।

भग-लिंगामृत-प्रीता भग-लिंगामृतात्मिका।

भग-लिंगार्चन-प्रीता भग-लिंग-स्वरूपिणी।। 124।।

भग-लिंग-स्वरूपा च भग-लिंग-सुखावहा।

स्वयंभू-कुसुम-प्रीता स्वयंभू-कुसुमार्चिता।। 125।।

स्वयंभू-पुष्प-प्राणा स्वयंभू-कुसुमोत्थिता।

स्वयंभू-कुसुम-स्नाता स्वयंभू-पुष्प-तर्पिता।। 126।।

स्वयंभू-पुष्प-घटिता स्वयंभू-पुष्प-धारिणी।

स्वयंभू-पुष्प-तिलका स्वयंभू-पुष्प-चर्चिता।। 127।।

स्वयंभू-पुष्प-निरता स्वयंभू-कुसुम-ग्रहा।

स्वयंभू-पुष्प-यज्ञांगा स्वयंभू-कुसुमात्मिका।। 128।।

स्वयंभू-पुष्प-निचिता स्वयंभू-कुसुम-प्रिया।

स्वयंभू-कुसुमादान-लालसोन्मत्त-मानसा।। 129।।

स्वयंभू-कुसुमानंद-लहरी-स्निग्ध देहिनी।

स्वयंभू-कुसुमाधारा स्वयंभू-वुसुमा-कला।। 130।। 

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