कुछ नया करने की सोच ने बना दिया आईएएस

Nov 6th, 2019 12:23 am

प्रोफाइल

 नाम : जतिन लाल

जन्म :  25 नवंबर, 1987

आईएएस बैच : 2016

शिक्षा :   मायापुरी दिल्ली स्थित न्यू इरा पब्लिक स्कूल से  प्राथमिक शिक्षा और इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से बीटेक की है।

घर :  मोतीनगर, दिल्ली

पिता : नरेश कुमार (बिजनेसमैन )

माता : कमलेश लाल (गृहिणी )

पत्नी :  रेनू (बैंक अधिकारी)

अब तक किन-किन पदों पर कहां-कहां सेवाएं दीं :

अटेचमेंट असिस्टेंट सेक्रेटरी मिनिस्ट्री आफ  स्पोर्ट्स,

एसडीएम धर्मशाला, बीडीओ इंदौरा, एसडीएम कांगड़ा।

उपलब्धियां

* एसडीएम धर्मशाला रहते 2 दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन कर विदेशी पैराग्लाइडर को सुरक्षित बचाया ।

* चुनावों में युवा मतदाताओं को जागरूक किया

*  हिमाचल प्रदेश में पहली मर्तबा सीएसआर मशीन से आरसी और लाइसेंस पीवीसी कार्ड पर प्रिंट करवाने शुरू करवाए।

प्रशासनिक कामकाज निपटाने के साथ-साथ युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने एसडीएम कांगड़ा जतिन लाल का आईएएस बनने का सफर संघर्षमय रहा है। यही कारण है कि उन्हें जीवन में बहुत कुछ सीखने का मौका मिला है। वह चुनौतियों से लड़ने का बेस्ट तरीका पॉजिटिव रहना मानते हैं। वह युवाओं को संदेश देते हैं कि कंपीटीशन में ईमानदारी से प्रयास करें और फ्री टाइम को कभी वेस्ट न करें । 25 नवंबर, 1987 को मोती नगर दिल्ली में नरेश कुमार लाल व श्रीमती कमलेश लाल के घर जन्मे जतिन लाल ने अपनी प्राथमिक शिक्षा मायापुरी दिल्ली स्थित न्यू इरा पब्लिक स्कूल से ग्रहण की है। बीटेक उन्होंने इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से की है। संघर्षमय जीवन के दौरान उन्होंने छह माह कॉल सेंटर में भी कार्य किया है। दरअसल उन्हें अपने पापा से खर्चा लेना बुरा लगता था। नतीजतन जॉब की तलाश शुरू की। जॉब न मिली, तो कॉल सेंटर में नौकरी कर ली। यह ठान लिया कि जीवन में कुछ बड़ा करना है। कॉल सेंटर में नौकरी के साथ-साथ पढ़ना भी शुरू कर दिया। पीएसयू में चयन हुआ और मिनिस्ट्री ऑफ  इंडिया ब्रॉडकास्टिंग के तहत ब्रॉडकास्ट इंजीनियर कंसल्टेंट की नौकरी कर ली। चार साल नौकरी के दौरान सिविल सर्विस के बारे में पता चला, तो ठान लिया कि सिविल सर्विस में जाना है। दरअसल अन्य बच्चों की तरह जतिन लाल को भी फैमिली के ताने सुनने पड़ते थे, तो चुभन होती थी। ललक थी कि सिविल सर्विसेज में ही जाना है। हालांकि दोस्तों ने मना भी किया कि वह नहीं हो पाएगा, लेकिन जतिन लाल ने सिविल सर्विसेज में जाने की ठान ली। टाइम  बचाया, लंच टाइम और मेट्रो में भी पढ़ाई की। सुबह जल्दी उठकर लाइब्रेरी रेगुलर जाना, कोचिंग के साथ-साथ न्यूज पेपर की आदत भी डाली। इंटरनेट पर आईएएस के बारे में सर्च किया, तो इस बारे में उन्हें समझ आने लगा। सिविल सर्विसेज का टेस्ट दिया और आफिस से भी रिजाइन दे दिया। यह सब उनके जीवन में जल्दबाजी में हुआ। रेलवे की परीक्षा जतिन लाल ने दी, जिसे उत्तीर्ण भी कर लिया और सर्विस भी मिल गई। तब परिवारवालों को भी भरोसा हो गया, लेकिन जतिन लाल ने सर्विस ज्वाइन नहीं की। इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन सर्विस क्लीयर किया। उसके बाद लबासना मंसूरी में एक साल ट्रेनिंग हुई और उसके बाद धर्मशाला  एसडीएम का कार्यभार देखा। दिल्ली में तीन माह की ट्रेनिंग के दौरान अटैचमेंट असिस्टेंट सेक्रेटरी मिनिस्ट्री ऑफ  स्पोर्ट्स में काम किया। हिमाचल रीजन प्राथमिकता में था। लिहाजा बीडीओ इंदौरा साढ़े चार माह तक कार्य किया । 20 फरवरी, 2018 से कांगड़ा में एसडीएम के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। चुनाव में युवा मतदाताओं को मतदान के लिए जागरूक किया। धर्मशाला में एसडीएम रहते यूके के सिटीजन को बैजनाथ में पैराग्लाइडिंग के दौरान बचाया। इस दौरान दो दिन तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान आर्मी व अधिकारियों के सहयोग से विदेशी पैराग्लाइडर को सुरक्षित बचाया। धर्मशाला में एसडीएम रहते लाइसेंस ब्रांच में हिमाचल प्रदेश में पहली सीएसआर मशीन स्थापित की, जिससे एटीएम की तरह पीवीसी कार्ड पर आरसी और लाइसेंस प्रिंट होते हैं। आज पूरे जिला में ऐसे आरसी लाइसेंस उपलब्ध हैं। बीडीओ इंदौरा रहते जतिन लाल ने क्लस्टर वाइज स्टाफ  को सुनियोजित ढंग से कार्य पर लगाया, ताकि जनता को सुविधा हो और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे। जल संरक्षण को भी बढ़ावा दिया, मनरेगा के  कार्य सुदृढ़ हुए। जतिन लाल का परिवार दिल्ली में बसता है। सायं 6.30 बजे तक प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी निभाने के बाद  वह न्यूज पेपर पढ़ते हैं, उसके बाद अढ़ाई घंटे तक जिम जाते हैं। युवाओं को वह संदेश देते हैं कि स्पोर्ट्स व जिम में बिजी रहें, ताकि वे नशे से दूर रह सकें। यूथ के लिए वह सेमिनार लेक्चर व इंटरेक्शन करते हैं, ताकि उन्हें जो जिंदगी मिली है, उसका बेस्ट इस्तेमाल हो, बुरी संगत से बचें। एसडीएम जतिन लाल का जीवन चुनौतीपूर्ण रहा है। 2008 में पिता के साथ दुर्घटना हुई, तो समझ नहीं आया कि क्या करें। वह उनके लिए चुनौती थी, जिसे उन्होंने स्वीकार किया और पिता का इलाज हुआ। एसडीएम जतिन लाल कहते हैं कि जिंदगी में बेस्ट देना पड़ता है। युवाओं को संदेश देते हैं कि टूट जाओगे, तो कहीं नहीं पहुंच पाओगे। अच्छा निकल जाता है और बुरा भी निकल जाता है। मन  शांत रखें, पॉजिटिव सोच लाएं, चुनौतियों से लड़ने का बेस्ट तरीका पॉजिटिव रहना है।

मुलाकात : हर इनसान से कुछ न कुछ सीखा जा सकता है…

एसडीएम : जतिन लाल

आपके अनुसार आईएएस अधिकारी होने का मतलब क्या है?

एडमिनिस्ट्रेटर होने की क्षमता होनी चाहिए। स्टाफ  से काम कैसे करवाना है, उसका नॉलेज होना चाहिए। काम लोगों की भलाई के लिए हो, उसके लाभ जनता को मिलें, सरकार का फायदा हो भ्रष्टाचार न हो। प्रेजेंस ऑफ  माइंड और कॉमन सेंस जरूरी है। विशेषज्ञ नहीं बना जा सकता, लेकिन काम चलाने का तरीका होना चाहिए और वह कार्य लोगों के हित में हो, सरकार के हित में हो, बैलेंस बनाकर चलना होगा।

आपने स्कूली शिक्षा और कालेज व विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

प्राथमिक शिक्षा मायापुरी दिल्ली स्थित न्यू इरा पब्लिक स्कूल से ग्रहण की। बीटेक इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से की है। आत्मविश्वास की अहम भूमिका है। एक्सपीरियंस होना चाहिए। अपडेट रहें, ताकि निर्णय अच्छे से लें। कॉन्फिडेंस होगा, तो कोई गुमराह नहीं कर पाएगा। लिहाजा अपडेट रखने की कोशिश करता हूं, सीखने की भी कोशिश करता हूं। हर इनसान से कुछ न कुछ सीखा जा सकता है, जाहिर तौर पर इससे एक्सपीरियंस बढ़ेगा और काम आएगा।

खुद पर कितना विश्वास है और उसकी ताकत कहां से आती है, पढ़ाई की उपलब्धियां क्या हंै?

योग्यता के बूते आईएएस का पद मिला। इसके पीछे अभिभावकों और दोस्तों की प्रेरणा  थी और खुद का जुनून था कि जीवन में कुछ बड़ा करना है। साथ ही लोगों के हितों को सर्वोपरि रखना है। पेरेंट्स का भी भरोसा जीतना था, ताकि उन्हें मुझ पर गर्व महसूस हो।

कितने प्रयास के बाद आईएएस चुने गए और उसके पीछे प्रेरणा?

कॉल सेंटर में जॉब की, पीएसयू में भी रहा। इसके पीछे अभिभावकों और दोस्तों की प्रेरणा रही, तब यह मुकाम हासिल हुआ।

कब और कैसे सोचा कि आपको आईएएस अफसर ही बनना है?

नौकरी के दौरान ही सिविल सर्विसेज में जाने की ठानी। जब आप किसी जॉब में होते हैं, तो दायरा उतना ही होता है। वह सोच वहीं तक रह जाती है। तब सोचा अधिकारी बन कर जा सकते हैं। इससे परिवार को भी गर्व वाली फीलिंग दे सकते हैं। चुनौतीपूर्ण लाइफ  होनी चाहिए, अन्य जॉब में ऐसा नहीं है। रिस्पेक्टेबल जॉब है, लाइफ  अच्छी है। ऐसे चैलेंज और मौका किसी भी जॉब में नहीं मिल पाएगा।

आपने सिविल सेवा परीक्षा के दौरान कौन से विषय चुने और उसके पीछे का कारण क्या रहा?

फिलॉसफी में परीक्षा पास की। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की शिक्षा के दौरान पेशंस से पढ़ना चाहिए और जो अच्छा लगे उसे चुनना चाहिए। प्री एग्जाम में विषय का कोई महत्त्व नहीं है, जबकि सिविल सेवा परीक्षा के दौरान विषय चुनना होता है।

यहां तक पहुंचने के लिए वैसे दिनचर्या क्या रही? किताबों के अलावा और किस-किस सामग्री का सहारा लिया?

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में न्यूजपेपर का अहम रोल है, इसके अलावा इससे संबंधित बुक्स भी मददगार हैं। मैं इस परीक्षा के दौरान आठ से नौ घंटे तक स्लैब्स में पढ़ा। इस दौरान लंच-डिनर-चाय के अलावा दोस्तों के साथ बातचीत की और उनसे चर्चा भी की। पढ़ाई के दौरान क्वालिटी मैटर करती है। पढ़ाई के बीच-बीच में कुछ अलग करके आप फ्रेश रहते हैं और टैलेंट बना रहता है। ध्यान भी नहीं भटकता। जबरदस्ती पढ़ने से आप खुद को धोखा देते हो।

आजकल कोचिंग क्लासेज का चलन बढ़ रहा है। क्या सफलता पाने के लिए कोचिंग क्लास जरूरी है या हम खुद भी पा सकते हैं?

इसमें जवाब हां भी है और न भी। जहां तक मेरा सवाल है, तो मैंने थोड़ी सी कोचिंग ली थी, क्योंकि मेरे लिए यह नई चीज थी और समय भी कम था। लिहाजा कोचिंग जरूरी थी। जबकि कोचिंग बहुत जरूरी नहीं है। कालेज के साथ पढ़ाई शुरू कर दें, तो सिलेबस वगैरह देखकर मैनेज कर सकते हैं कि क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है। अगर कनफ्यूज हंै, तो कोचिंग ज्वाइन कर सकते हैं, जो अफोर्ड नहीं कर सकते, वे अखबार और बुक्स से जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं, पढ़ाई में भी बैलेंस बनाना जरूरी है।

आपकी कार्यशैली आम आफिसर की तरह ही है या कुछ अलग हट के है?

पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि कोई अंगुली न उठाए। लोगों के हित में काम हो, स्टाफ  को भी ऐसी गाइडलाइंस होनी चाहिए। आपके पास फरियाद लेकर जो आए, वह खाली हाथ न जाए। यह सुनिश्चित हो कि पब्लिक प्राथमिकता है और हम सर्वेंट हैं। यहां भी इस भरोसे के साथ सीधे मिला जा सकता है। दूसरा; विकास हो, चेंज हो, सुधार हो और किसी को असुविधा न हो, यह जरूरी है।

जो युवा आईएएस अफसर बनने का सपना देख रहे हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देना चाहेंगे?

शारीरिक और मानसिक स्वस्थता जरूरी है। इसके लिए अच्छा खाना और एक्सरसाइज करें। सुस्त नहीं होना। घर की समस्याओं और वित्तीय स्थिति को इग्नोर करें। दो नाव में सवार न हों। पेपर मुश्किल है, कंपीटीशन बढ़ गया है, लिहाजा खुद को मोटिवेट करें। कामयाब होंगे। इसके लिए योग को अपनाएं। कोई भी युवा मुझसे कभी भी इस संदर्भ में मिल सकता है।

-राकेश कथूरिया, कांगड़ा

 

 

 

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