केंद्र सरकार ने रोके मनरेगा के 50 करोड़

हिमाचल में रोजगार गारंटी योजना का निकला दम, लाखों लाभार्थियों को दो माह से नहीं मिली दिहाड़ी

शिमला- हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के लाखों मजदूरों को दो माह से मजदूरी नहीं मिल पाई है। दरअसल ये लाखों मजदूर वे हैं, जो विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्य कर रहे है। जानकारी मिली है कि कुछ अनियमितताओं के कारण केंद्र सरकार ने मनरेगा का 50 करोड़ तक का बजट दो माह से रोक रखा है। मनरेगा के तहत लगे लाखों मजदूरों के अकाउंट में दो माह से दिहाड़ी नहीं आ रही है। इस वजह से पंचायतों के माध्यम से मनरेगा में रजिस्टर हुए मजदूर परेशान हो गए हैं। ये मजदूर पंचायतों से भी इस बारे में जानकारी मांग रहे हैं, लेकिन हैरानी है कि पंचायत प्रधान से लेकर कोई भी ब्लॉक अधिकारी दो माह से इस समस्या का समाधान नहीं निकाल पा रहे हैं। अब जब मनरेगा के तहत लगे मजदूरों की यह समस्या पंचायती राज विभाग में पहुंची है, तो सामने आया है कि मजदूरों ने अपने अकाउंट नंबर ही गलत लिखे हैं। बता दें कि लाखों मजदूरों के केंद्र सरकार की मनरेगा वेबसाइट पर अकाउंट नंबर गलत पाए गए हैं। बताया जा रहा है कि अकाउंट नंबर लिखते समय एक व दो अंकों में गलती पाए जाने पर केंद्र सरकार ने मनरेगा के तहत लगे मजदूरों के आवेदनों को रिजेक्ट कर दिया है। फिलहाल मामला बहुत बड़ा है, इसको लेकर ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायतों से भी जानकारी मांगी है। बताया जा रहा है कि ग्रामीण विकास विभाग ने केंद्र सरकार को प्रोपोजल भेजा है और दो माह से मजदूरों का रुका पैसा देने की बात रखी है। इसके साथ ही विभाग ने पंचायत प्रधान व अन्य सदस्यों को मजदूरों के अकाउंट नंबर डालने से पहले चैक करने को लेकर निर्देश जारी किए हैं। दरअसल मनरेगा के तहत लगे लाखों मजदूरों का पैसा सीधे केंद्र सरकार उनके खाते में डालती है। केंद्र सरकार ने यह फैसला इस वजह से लिया है, ताकि मनरेगा के तहत बजट का कोई दुरुपयोग न हो सके। विभागीय सूत्रों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों की संख्या में जिन मजदूरों के खाते में पैसे नहीं आए हैं, उन्होंने विभाग से इस समस्या का समाधान निकालने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि पहले भी मनरेगा के तहत केंद्र सरकार ने हिमाचल का बजट रोका है। एक बार फिर ऐसा हुआ है कि बजट न मिलने की वजह से मनरेगा का कार्य प्रभावित हो रहा है। कई क्षेत्रों में दिहाड़ी न मिलने की वजह से मजदूरों के लिए रोजी-रोटी का संकट हो गया है। हैरानी है कि मजदूरों के अकाउंट नंबर कैसे ऑनलाइन गलत डाले जा रहे है। इस पर भारत सरकार ने हिमाचल सरकार को भी फटकार लगाई है और मनरेगा के तहत कार्य करने वाले मजदूरों को इस बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार ने साफ किया है कि गलत अकाउंट नंबर पर किसी को पैसा नहीं डाला जा सकता। ऐसे में पंचायती राज विभाग को ही लाखों मजदूरों के हित के लिए ऑनलाइन आवेदन करने से पहले ध्यान देना होगा।

हिमाचल में 33 लाख से ज्यादा मनरेगा मजदूर

हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत 33 लाख से ज्यादा मजदूर रजिस्टर्ड हैं। ये मजदूर अपनी-अपनी पंचायतों में मनरेगा के तहत 120 दिनों में कार्य कर अपनी आजीविका कमा रहे हैं। दिहाड़ी न मिलने की वजह से इन मजदूरों के लिए रोजी-रोटी का संकट हो गया है।

मनरेगा कार्यों की क्वालिटी होगी चैक

अब केंद्र सरकार मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों पर भी नजर रखेगी। पंचायतों व वार्डों में मनरेगा के कार्य की क्वालिटी सही है या नहीं, इस पर केंद्र की टीम कभी भी निरीक्षण कर सकती है। बता दें कि प्रदेश में मनरेगा के कार्यों की शिकायतें आने के बाद केंद्र ने यह फैसला लिया है।

मनरेगा के तहत लाखों मजदूरों के वेतन न मिलने की जानकारी है। राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र को प्रोपोजल भेजा गया है। जल्द मजदूरों को वेतन मिल जाएगा

अनिल शर्मा, संयुक्त निदेशक, ग्रामीण विकास विभाग

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