गंगाराम राजी पर हिमाचल के साहित्यकारों के विचार

Nov 10th, 2019 12:04 am
  1. डा. सुशील कुमार फुल्ल

निरंतर सार्थक लिखने वाला कथाकार राजी। दीपावली की पूर्व संध्या पर अकादमी द्वारा पुरस्कारों की घोषणा हिमाचल के साहित्यिक जगत में व्याप्त सन्नाटे को तोड़ने का प्रशंसनीय प्रयत्न है। अकादमी की प्रासंगिकता सकारात्मक भावानुभूति की पर्याय है। डा. गंगा राम राजी उन संत लेखकों की परंपरा के प्रतिनिधि हैं, जो चुपचाप नए-नए विषय लेकर अपने रचना कर्म में व्यस्त रहते हैं। सन् 1970 से वह निरंतर कथा लेखन में अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं। रानी खैरीगढ़ी उपन्यास ऐतिहासिक परंपराओं का रोचक उपन्यास है।

  1. बद्री सिंह भाटिया

हि.प्र कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के साहित्य पुरस्कारों की घोषणा हुई है। कहानी, नाटक एवं उपन्यास विधा में 2017 के लिए वरिष्ठ लेखक गंगा राम राजी के उपन्यास ‘‘एक थी रानी खैरीगढ़ी’’ का चयन हुआ है। गंगा राम राजी बड़े समय से लिख रहे हैं और सक्रिय हैं। उनकी कहानियों, उपन्यासों के विषय आम आदमी के संघर्ष और जिजीविषा को लेकर हैं।

  1. मुरारी शर्मा

हिमाचल के वरिष्ठ साहित्यकार डा. गंगाराम राजी को उनके ऐतिहासिक उपन्यास ‘एक थी रानी खैरागढ़ी’ पर हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी की ओर से साहित्य पुरस्कार-2017 के लिए चयनित किया गया है, जिसके लिए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। डा. गंगाराम राजी मूलतः उपन्यासकार हैं जिन्होंने हिंदी के प्रगतिशील कवि बाबा नागार्जुन के साहित्य पर शोध किया है। डा. गंगाराम के अब तक 15 कहानी संग्रह और सात उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। हिमाचल में सबसे अधिक उपन्यास लिखने का रिकार्ड डा. गंगाराम राजी के नाम है।

  1. डा. हेम राज कौशिक

कथाकार गंगाराम राजी की कथा यात्रा का समारंभ सन् 1973 में प्रकाशित मनमंथन उपन्यास और युगों पुराना संगीत कहानी संग्रह से होता है। एक सुदीर्घ अंतराल के अनंतर कथा यात्रा में तीव्र गति से कदम बढ़ाए जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने डेढ़ दर्जन कहानी संग्रहों का सृजन किया है। उनके पांच उपन्यास इस शताब्दी के दूसरे दशक में प्रकाश में आए। उनके उपन्यासों की संवेदना भूमि बहुआयामी है, हिमाचल प्रदेश का सामाजिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य विविध रूपों में उपस्थित है। उनके सभी उपन्यास चर्चित रहे हैं।

  1. कृष्ण चंद्र महादेविया

स्वच्छ मनोरंजन और ज्ञान तंतु खोलता उपन्यास मैंने पूरे मनोयोग से पढ़ा है। यह ऐतिहासिक उपन्यास उस समय के सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, आर्थिक, पारिवारिक, स्त्री-पुरुष के संदर्भ में अत्यंत सुंदरता से स्थिति के दिग्दर्शन कराता है। मेरा सौभाग्य है कि इस उपन्यास के तथ्यों की खोज करने के लिए एक-दो ऐतिहासिक यात्रा में मैं भी राजी के साथ रहा।

  1. सुदर्शन वशिष्ठ

राजी जी बहुत लंबे समय से लेखन में सक्रिय हैं। सहत्तर और अस्सी के दशक में ये एक कथाकार के रूप में जाने जाते थे। बीच में कुछ समय तक इस कर्म से दूर रहने के बाद अब पुनः सक्रिय हुए हैं और उपन्यास हो या कहानी, लगातार इनकी पुस्तकें आ रही हैं और चर्चित हो रही हैं। इनको हिमाचल अकादमी का पुरस्कार मिलने की हार्दिक बधाई।

  1. गणेश गन्नी

हिमाचल प्रदेश में जब कभी भी साहित्यिक कार्यक्रमों, चर्चाओं और छोटी-छोटी गोष्ठियों की बात चलेगी तो कथाकार-उपन्यासकार गंगाराम राजी का जिक्र आना ही है। राजी ने न केवल साहित्यिक अलख जगाए रखी है, बल्कि निरंतर लिख भी रहे हैं। इनकी पुस्तकें देश-प्रदेश में चर्चित रहती हैं और पाठकों को आकर्षित करती हैं। उपन्यास के लिए हिमाचल साहित्य अकादमी पुरस्कार की घोषणा के बाद गंगाराम राजी की लोकप्रियता और बढ़ेगी तथा जिम्मेदारी भी।

  1. पवन चौहान

हाल ही में घोषित हिमाचल के अकादमी पुरस्कारों में वरिष्ठ कथाकार गंगाराम राजी के उपन्यास ‘एक थी रानी खैरीगढ़ी’ पर वर्ष 2017 का पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। यह एक अच्छा व उचित निर्णय है। यह ऐतिहासिक उपन्यास जिला मंडी की वीरांगना रानी खैरीगढ़ी की पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। नारी शक्ति के पराक्रम पर रचा गया यह उपन्यास पठनीय है। गंगा राम राजी जी को पुरस्कार मिलना हमारे लिए खुशी का विषय है।

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