गर्भ में पल रहे शिशु पर भी प्रदूषण का हमला

तेल अवीव विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया दावा

दुनियाभर में बढ़ता वायु प्रदूषण न सिर्फ लोगों को बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी नुकसान पहुंचा रहा है। वायु प्रदूषण के सूक्ष्म कण जब हवा के साथ मिलकर व्यक्ति के फेफड़ों में प्रवेश करते हैं तो यह न सिर्फ सेहत पर बुरा असर डालते हैं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के भी स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाते हैं। जिसकी वजह से जन्म के समय से ही बच्चे में विकृति भी पैदा हो सकती है। हाल ही में तेल अवीव विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के द्वारा किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि वायु में जितना अधिक प्रदूषण होगा गर्भ में पल रहे शिशु के विकृति के साथ पैदा होने की उतनी ही आशंका ज्यादा होती है। गंगाराम अस्पताल के फेफड़ों के सर्जन डा. अरविंद कुमार के मुताबिक धूम्रपान न करने वाले 28 वर्ष की उम्र के लोगों में भी चौथे चरण का कैंसर देख रहे हैं। 1988 में 90त्न फेफड़े के कैंसर धूम्रपान करने वालों में होते थे। अब गैर-धूम्रपान वालों में 50 प्रतिशत मामले देखे जा रहे हैं।

अपंग पैदा हो सकता है बच्चा

गंगाराम अस्पताल के डा. धीरे गुप्ता ने कई शोध के हवाले से बताया कि गर्भवती महिलाएं जब प्रदूषित हवा में सांस लेती हैं तो यह फेफड़ों से आगे जा कर प्लेसेंटा तक पहुंच सकती है। वहां श्वेत रक्त कणिकाएं बढ़ जाती हैं। वहां जमावट हो जाने पर बच्चे तक रक्त प्रवाह में रुकावट होने लगती है। इससे विकास रुक जाता है। बच्चा शारीरिक या मानसिक रूप से अपंग हो सकता है। प्लेसेंटा ठीक से रक्त प्रवाह नहीं कर पाती तो समय पूर्व प्रसव, जन्म से ही शारीरिक या मानसिक दोष और मृत्यु तक हो सकती है।

वक्त से पहले हो रही मौत

पर्यावरण थिंक टैंक सीएसई के स्टेट ऑफ इंडियाज इन्वायरन्मेंट (एसओई) रिपोर्ट के मुताबिक प्रदूषित हवा के कारण भारत में 10,000 बच्चों में से औसतन 8.5 बच्चे पांच साल का होने से पहले मर जाते हैं।

बुजुर्गों पर आफत

एम्स के बुजुर्गों के डाक्टर विजय गुर्जर का कहना है कि प्रदूषण से बुजुर्ग भी परेशान हैं। बुजुर्गों को दिल, मधुमेह, उच्च रक्तचाप एवं सांस की दिक्कतें अधिक होती हैं। लंबे समय तक प्रदूषण में रहने से उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ने का भी खतरा अधिक होता है।

 

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