गुरु तेग बहादुर जी का अद्वितीय बलिदान

Nov 30th, 2019 12:30 am

नवम गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी महान आध्यात्मिक चिंतक तथा गंभीर धर्म साधक थे। सन् 1621 वैशाख माह में आपका जन्म पिता श्री हरगोबिंद जी तथा माता बीबी नानकी के घर हुआ था। आपकी आध्यात्मिक रुचियां एवं वैरागी प्रवृत्ति बचपन से ही प्रफुल्लित होने लगी थीं। आप संत स्वभाव के थे, परंतु आप में योद्धा के सभी गुण मौजूद थे। आपने शस्त्रविद्या का प्रशिक्षण लिया और गुरु पिता के साथ अनेक बार शिकार पर गए। सन् 1634 में मात्र 13 वर्ष की आयु में करतारपुर के युद्ध में आपने अद्भुत वीरता दिखाई। गुरु पिता ने आपकी तेग (कृपाण) की बहादुरी से प्रसन्न होकर आपका नाम ‘त्यागमल’ से बदलकर तेग बहादुर करके सम्मानित किया। गुरु तेग बहादुर जी ने गुरमत के प्रचार-प्रसार के लिए अनेक यात्राएं कीं। इस सिलसिले में आप सुदूर उत्तर पूर्व के राज्यों तक गए। इसी दौरान सन् 1666 में पटना में दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ। यात्राओं के दौरान वे लोगों को मिलजुलकर प्रेम से रहने की, बुरी आदतें छोड़ने की,मिल बांटकर खाने की और सदा ईश्वर को याद करने की शिक्षाएं देते थे। उन दिनों पानी का अभाव था अतः कई स्थानों पर आपने कुएं खुदवाए,सरोवर बनवाए। उन दिनों मुगल शासक औरंगजेब का साम्राज्य था। उसकी धार्मिक कट्टरता और अत्याचार शिखर पर थे। बात सन् 1675 की है। कश्मीरी पंडितों का एक दल पंडित किरापाराम के नेतृत्व में गुरु तेग बहादुर जी  के दरबार में कीरतपुर आया और फरियाद की कि बादशाह औरंगजेब को खुश करने के लिए कश्मीर का सूबेदार हिंदुओं को जबरन मुसलमान बना रहा है आप हमारी रक्षा करें। यह सुनकर गुरु जी चिंतित हो उठे। इतने में नौ वर्षीय गुरु गोबिंद सिंह बाहर से आए पिता को चिंताग्रस्त देख कारण पूछा। गुरु पिता ने कश्मीरी पंडितों की व्यथा कह सुनाई। साथ ही कहा धर्म की रक्षा तभी हो सकती है जब कोई महापुरुष बलिदान करे। गोबिंद सिंह जी बोले आपसे महान और कौन हो सकता है। गुरु जी ने पंडितों को आश्वासन देकर भेजा कि अगर कोई तुम्हारा धर्म परिर्वतन करने आए, तो कहना पहले गुरु तेग बहादुर को इस्लाम कबूल करवाओ फिर हम मुसलमान हो जाएंगे। उन्होंने बालक गोबिंदराय को गुरुगद्दी सौंपी और औरंगजेब से मिलने के लिए दिल्ली रवाना हो गए। औरंगजेब से अच्छे व्यवहार की कोई उम्मीद नहीं थी। वही हुआ, उसने गुरु जी को गिरफतार करके काल कोठरी में बंद कर दिया। जब गुरु जी ने धर्म परिर्वतन से स्पष्ट इंकार कर दिया तथा कहा कि किसी को जबरन धर्म परिर्वतन कराना पाप है, तो उन्हें यातनाएं दी जाने लगीं। उनके सामने ही उनके तीन शिष्य भाई मतिदास,भाई दयालाजी तथा भाई सतिदास को तड़पाकर शहीद कर दिया गया। आठ दिन आपको चांदनी चौक की कौतवाली में रखा गया। जब आप अचल, अडोल रहे, तो 24 नवंबर, 1675 के दिन चांदनी चौक में आपको शीश काटकर शहीद कर दिया गया। आज उस स्थान पर गुरुद्वारा सीसगंज है। गुरु तेग बहादुर जी ने कुल 59 शब्दों तथा 57 श्लोकों की रचना की, जो गुरु ग्रंथ साहिब में 15 रागों के अंतर्गत दर्ज है। उनकी समस्त बाणी वैराग्यमयी है। संसार की नश्वरता,माया की क्षुद्रता,सांसारिक संबंधों की असारता, जीवन की क्षणभंगुरता गुरु जी की बाणी भले वैराग्यमयी है, परंतु आपका वैराग्य संसार त्याग वाला नहीं है,बल्कि संसार में रहकर ही समस्त जीवन बिताने वाला है। उनकी सारी बाणी व्रज भाषा में है। गुरु जी ने जैसा आदर्श जीवन जिया वैसा ही आदर्श आपकी बाणी में भी प्रतिबिंबित किया।

– नरेंद्र कौर छाबड़ा, औरंगाबाद

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या आप स्वयं और बच्चों को संस्कृत भाषा पढ़ाना चाहते हैं?

View Results

Loading ... Loading ...

Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV