जमीन नहीं, मस्जिद ही चाहिए

Nov 19th, 2019 12:05 am

अयोध्या विवाद पर सौहार्द और सद्भाव के दावे करने और सर्वोच्च न्यायालय के किसी भी फैसले को कबूल करने वाले अब शरियत की दुहाई दे रहे हैं। वे अयोध्या का मसला शरियत का ही मान रहे हैं। उन्हें पांच एकड़ जमीन की पेशकश कबूल नहीं है। उन्हें तो मस्जिद वाली जगह ही चाहिए। शरियत के मुताबिक, मस्जिद के एवज में सौदेबाजी नहीं की जा सकती और मस्जिद की बुनियादी जमीन कहीं और शिफ्ट नहीं की जा सकती। कुल मिलाकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए सर्वोच्च अदालत से भी ‘सुप्रीम’ शरियत है। क्या अदालत इस संविधानेतर दलील को स्वीकार करेगी? मुस्लिम सांसद ओवैसी को बाबरी मस्जिद ही वापस चाहिए। मुस्लिम बोर्ड के सदस्य जफरयाब गिलानी का कहना है कि मस्जिद की जमीन दूसरों को (यानी रामलला विराजमान को) देने का फैसला ही गलत है। इन्हीं साहब का मानना है कि कई मुद्दों पर फैसला समझ के परे है। कुछ मुट्ठी भर मुस्लिम नेता अब भी दलील दे रहे हैं कि मस्जिद के नीचे मंदिर नहीं था। जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? अब भी आरोप यह है कि संविधान पीठ ने आस्था के आधार पर फैसला दिया है, जबकि पांचों न्यायाधीशों का फैसला तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर लिया गया है। मुस्लिम बोर्ड अदालत की अवमानना की हद तक पहुंच गया है। उसकी कोई संवैधानिक वैधता नहीं है। वह पूरे मुस्लिम समुदाय की प्रतिनिधि संस्था नहीं है, लिहाजा उसके निर्णय और अनाप-शनाप आरोपों को खारिज करना चाहिए। बोर्ड के भीतर ही असहमतियां थीं और कुछ सदस्य बहिष्कार कर बाहर निकल आए। बेशक मुस्लिम बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार याचिका डालना तय किया है। हालांकि इस केस में बोर्ड पक्षकार नहीं था, लेकिन दावा किया जा रहा है कि तीन पक्षकारों के अलावा सुन्नी वक्फ  बोर्ड का समर्थन भी हासिल है। यह मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का संवैधानिक अधिकार है कि यदि वह फैसले पर ‘असंतुष्ट’ है, तो उसे चुनौती दे सकता है। बोर्ड के मुट्ठी भर सदस्य साबित करने में जुटे हैं कि वे तमाम मुसलमानों के पैरोकार हैं, लिहाजा अयोध्या विवाद को नए सिरे से खोलने की अपील की जा रही है, लेकिन संविधान व्याख्या करता है कि यदि कोई महत्त्वपूर्ण गलती रह गई है, कोई नई खोज या तथ्य सामने आए हैं, उसी सूरत में पुनर्विचार याचिका स्वीकार की जा सकती है। सवाल है कि क्या सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम बोर्ड की अपील को सार्वजनिक सुनवाई के लायक समझेगा अथवा इसका निपटारा नए प्रधान न्यायाधीश जस्टिस शरद बोबडे़ के चैंबर में ही कर दिया जाएगा? बहरहाल अंतिम निर्णय सर्वोच्च अदालत का ही विवेक है, लेकिन सामाजिक-सांस्कृतिक और राष्ट्रीय तौर पर माहौल सबसे ज्यादा मायने रखता है। संविधान पीठ के फैसले के बाद आज तक देश भर में एक पत्ता तक नहीं खड़का, सांप्रदायिक दंगे-फसाद के हालात तो बहुत दूर की बात हैं। ज्यादातर मुसलमानों ने राहत की सांस ली है कि इतना गंभीर और पुराना विवाद, अंततः सुलझ गया है। वे अयोध्या को प्रभु राम से ही जोड़कर देखते रहे हैं। वे मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने के न्यायिक पीठ के फैसले से भी संतुष्ट थे। हालांकि जावेद अख्तर सरीखे प्रगतिशील और रचनाकार मुसलमानों का मानना है कि पेशकश वाली जमीन पर अस्पताल बनाया जा सकता है। स्कूल-कालेज स्थापित किया जा सकता है। कमोबेश वे इस पेशकश को ‘खैरात’ करार देने वालों में शुमार नहीं हैं। दलील यह भी दी गई है कि यदि हिंदू पक्ष अदालत में याचिका दे कि वह अयोध्या में बाबर के नाम पर किसी भी मस्जिद को बनाए जाने की इजाजत नहीं देगा, लिहाजा पांच एकड़ जमीन की पेशकश वापस ली जाए अथवा अयोध्या के बाहर दिए जाने का बंदोबस्त किया जाए। उस स्थिति में हालात कैसे होंगे? देश में आपसी भाईचारा तनाव में तबदील हो सकता है। मुस्लिम बोर्ड का यह फैसला भी मुसलमानों के एक तबके को उकसा सकता है। इकबाल अंसारी के परिवार ने यह केस दशकों तक लड़ा है, लेकिन अब वह संतुष्ट है और मुल्क के कानून को मानते हुए अपील के पक्ष में नहीं है। निर्मोही अखाड़ा भी पुनर्विचार याचिका के पक्ष में नहीं है। कानून के साथ-साथ इतिहास को भी कबूल करना सीखे मुस्लिम बोर्ड। इस मसले पर लंबी सुनवाई के दौरान तर्कबाजी हो चुकी है। फैसले के बाद अब गुंजाइश नहीं है, लिहाजा अपील का फैसला रद्द कर देना चाहिए।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या सरकार को व्यापारी वर्ग की मदद करनी चाहिए?

View Results

Loading ... Loading ...


Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV Divya Himachal Miss Himachal Himachal Ki Awaz