जेन कहानियां : पेड़ों की दिव्यता

जेन गुरु शिंकान चीन में बौद्ध मत की तेंदई शाखा का वर्षों तक अध्ययन करने के बाद जापान लौटे थे।

उनसे  मिलने आने वाले उनके सामने अपनी दुर्बोध जिज्ञासाएं रखते, मगर शिंकान कभी-कभार ही किसी एक का जवाब देते।

एक दिन एक पचास वर्षीय साधक ने उनसे कहा, मैंने बचपन में ही तेंदई का अध्ययन कर लिया था।

उसका यह दावा है कि पेड़ों में भी दिव्यता का अनुसंधान किया जा सकता है। क्या यह बात आपको कुछ अजीब नहीं लगती।

पेड़ों में दिव्यता का अनुसंधान करने से क्या होगा? शिंकान ने पूछा, इस सवाल पर कि तुम स्वयं दिव्य कैसे बनो,क्या तुमने कभी विचार किया है?

यह तो मैंने कभी सोचा ही नहीं। जिज्ञासु ने अपने को टटोलते हुए कहा। तो घर जाओ और पहले इस पर विचार करो। शिंकान ने बात पूरी की।

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