जेन कहानियां

अनमोल सीख

सोयेन एक अत्यंत प्रतिष्ठित जेन गुरु थे। उनके कुछ शिष्य गर्मी की दोपहरी में सो जाया करते थे। सोयेन उनसे कुछ नहीं कहते, मगर स्वयं सोयेन को एक दिन में नींद लेते किसी ने नहीं देखा था। इसके पीछे उनके गुरु की एक अनमोल सीख थी। सोयेन जब बारह वर्ष के थे, तेंदई विचारों के अध्ययनार्थ एक जेन गुरु के आश्रम में रहते थे। एक गर्र्मी की उमस भरी दोपहर में कहीं से ठंडी हवा का झोंका आया और बालक सोयेन की आंख लग गई। गुरु आसपास नहीं थे। गहरी नींद से जागते ही उन्हें अपने गुरु के कदमों की आहट सुनाई पड़ी। तब तक देर हो चुकी थी। सोयेन नीद में सरक कर दरवाजे तक आ पहुंचे, इसका उन्हें कोई अंदाजा नहीं था। क्षमा करना, मुझे क्षमा करना। सोयेन के गुरु दरवाजे पर पड़ी सोयेन की देह को लांघते हुए ऐसी सावधानी बरत रहे थे, मानो वह आश्रम के किसी अतिथि की देह हो। गुरु की इस अनमोल सीख के बाद सोयेन अपने पूरे जीवन काल में कभी दिन में नहीं सोया।

 

 

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