तत्तापानी के गर्म चश्मे बने बेगाने

धार्मिक पर्यटक स्थल की कोई नहीं ले रहा सुध, जिला परिषद सदस्य निर्मला चौहान ने उठाया मसला

करसोग – विश्व विख्यात धार्मिक तीर्थ एवं पर्यटक स्थल तत्तापानी में मकर संक्रांति लोहड़ी का ऐतिहासिक मेला तथा पवित्र स्नान जहां लगभग दो महीने बाद आयोजित होने वाला है वही तत्तापानी में इस शुभ घड़ी में प्रदेश तथा पड़ोसी राज्यों से आने वाले हजारों लाखों पर्यटकों को प्राकृतिक गर्म पानी के चश्मों में स्नान के लिए कोई विशेष सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। यह आरोप संबंधित क्षेत्र के जिला परिषद सदस्य निर्मला चौहान ने लगाते हुए कहा कि मकर संक्रांति लोहड़ी के मेले पर टूटे-फूटे स्नानागार से श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों को कोई सुविधाएं नहीं दी जा सकती हैं। तत्तापानी के विकास को करोड़ों रुपए खर्च करने की बात कही जाती है परंतु हैरानी की बात है कि सालों से कोई सुविधाजनक स्नानागार तक नहीं बन पाए हैं। प्रदेश तथा पड़ोसी राज्यों से मकर सक्रांति के दिन हजारों लोग पवित्र स्नान व पूजा-अर्चना के लिए तत्तापानी पहुंचते हैं परंतु मात्र दिखावे के लिए कुछ स्नानागार बने हुए हैं वह भी टूटे-फूटे बहुत ही दयनीय हालत में हैं, स्नानागार में हालात ये हैं कि मात्र कुछ लोग ही नहा सकते हैं जबकि खुले में बने हुए स्नानागार भी कोई सुविधाजनक नहीं है। जिस पर गौर किया जाना चाहिए। एनटीपीसी द्वारा आम लोगों को सुविधाएं मिल सके इसको लेकर कोई प्रयास नहीं हो रहे। ततापानी के सौंदर्यीकरण को लेकर कुछ तो प्रयास मूर्त रूप दिए जांए। तत्तापानी में प्राकृतिक स्नानागार सुविधाजनक बनने चाहिए। विशेष तौर पर महिलाओं के लिए तो तिरपाल छत डाल कर स्नानागार दिखाना हास्यास्पद बन चुका है। महिलाओं के लिए जो स्नानागार बना हुआ है उसकी हालत देखकर कोई भरोसा ही नहीं है कि वह कब धराशायी हो जाए। धार्मिक स्थल पर जिस प्रकार सुविधाओं की घोषणा की जा रही है उसी प्रकार उन्हें मूर्त रूप दिया जाए तभी तीर्थ स्थल का रूप तत्तापानी के नाम से प्रख्यात होगा अन्यथा सुविधाओं की कमी के चलते आम लोग निराश हैं। जिस पर गौर किया जाना चाहिए। शौचालय निर्माण किए जाने चाहिए ताकि वश्वविख्यात लोहड़ी मकर सक्रांति मेला तत्तापानी प्रदेश तथा पड़ोसी राज्यों से आने वाले सभी लोगों को इस स्थान का अच्छा संदेश मिले।

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