तीन बार की असफलता भी आईएएस बनने से रोक नहीं पाई

प्रोफाइल

जन्मतिथि : 20 दिसंबर, 1985

शिक्षा      : बीएससी इन बॉटनी एंड जियोलॉजी केएमवी जालंधर, एमबीए मद्रास विश्वविद्यालय

आईएएस बैच         : 2015

पिता       : स्व. जीआर वर्मा

पति        : मोहित भाम्भनी

जन्म स्थान            :  पांगी, चंबा

अब तक किन-किन पदों पर काम

एसडीएम कंडाघाट, एसडीएम बिलासपुर, वर्तमान में एडीसी सिरमौर

जीवन में असफलताओं को सकारात्मक ऊर्जा के साथ कमियों पर फोकस करते हुए उन्हें दूर कर कामयाबी को कैसे पाया जा सकता है, इसका बखूबी उदाहरण पेश किया है प्रियंका वर्मा ने। भारतीय प्रशासनिक सेवा प्रियंका वर्मा जिला सिरमौर के एडीसी पद पर तैनात हैंे। अपने अधिकारी पिता के सपने को जुनून बनाकर भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल कर  प्रियंका वर्मा ने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने परिवार के सपोर्ट को सबसे अधिक दिया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा की सर्विस, जिसमें आप सीधे तौर पर लोगों से जुड़कर उनकी समस्याओं को दूर कर सकते हैं और इसी जज्बे ने उन्हें इस फील्ड से जोड़े रखा। यूपीएससी परीक्षा को कैसे सकारात्मक सोच, सही दिशा, कठिन परिश्रम और लक्ष्य को प्राप्त करने के जुनून के साथ जुट जाना, यही रहे वे मूलमंत्र, जिन्होंने आईएएस अधिकारी प्रियंका वर्मा को इस अहम सेवा के लिए चयनित होने को आगे बढ़ाया।

हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा के पांगी की रहने वाली यंग आफिसर के पिता स्व. जीआर वर्मा के भारतीय राजस्व सेवा में उच्च पदस्थ अधिकारी होने के चलते यूं तो देश के विभिन्न राज्यों में पोस्टिंग की वजह से उन्हें विभिन्न राज्यों में पढ़ाई करने का मौका मिला, मगर सबसे अधिक समय वह गुजरात राज्य में रहीं। पिता का इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज के दौरान भले ही अलग-अलग स्थानों पर स्थानांतरण हुआ, मगर कभी भी बेटी की पढ़ाई और सपने को पूरा करने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी। 2015 में वह दौर भी आया, जब प्रियंका वर्मा ने यूपीएससी का प्रतिष्ठित एग्जाम क्रेक कर दिया, मगर यहां उन्हें थोड़ा अफसोस भी हुआ कि पिता के देखे गए सपने को वह उन्हंे इस पद के इंटरव्यू एग्जाम मंे सफल होकर न दिखा सकी तथा इन तैयारियों के दौरान वर्ष 2014 में उनके पिता का अचानक स्वर्गवास हो गया। हालांकि आईएएस प्रियंका वर्मा ने इसेे किसी सदमे की तरह नहीं लिया, बल्कि पिता के सपने को पूरा करने के लिए ऐसी स्थिति में जी-जान से पढ़ाई पर फोकस कर दिया। वहीं नतीजा जब चौथे प्रयास का आया, तो सफलता कदम चूम रही थी। तीन असफल प्रयासों से आईएएस अधिकारी प्रियंका वर्मा ने अपनी कमियों पर फोकस किया तथा पाया कि समय पर एग्जाम अटेंप्ट न होने के कारण वह सफल नहीं हो पा रही हंै। बस उसके बाद उन्होंने इसी कमी पर फोकस करते हुए इसे दूर  किया तथा चौथे अटेंप्ट में यूपीएससी की परीक्षा क्रेक कर दिखाई।

मुलाकात :असफलताओं में धैर्य न छोड़ें…

सिरमौर की एडीसीः  प्रियंका वर्मा

प्रशासनिक अधिकारी बनने का क्या मतलब होता है?

आप आम जनता से सीधे तौर पर जुड़कर उनकी परेशानियों और समस्याओं को अपने स्तर पर हल कर सकते हैं। लोग हमारे पास अपनी समस्याओं को लेकर बड़ी उम्मीदों से आते हैं। वहीं पर संतुष्टि होती है, जब किसी गरीब, वंचित तथा समस्या से ग्रस्त व्यक्ति की परेशानी हमारे कारण दूर हो जाए।

आपने स्कूली शिक्षा और कालेज व विश्वविद्यालय की पढ़ाई कहां से पूरी की?

स्कूली शिक्षा गुजरात के केंद्रीय विद्यालयों से हुई। केएमवी जालंधर से बीएससी बॉटनी एंड जियोलॉजी में की। एमबीए इन एचआर एंड मार्केटिंग मद्रास विश्वविद्यालय से किया। चंूकि पिता की पोस्टिंग विभिन्न स्थानों पर होती रही, तो विभिन्न राज्यों के स्कूलों और कालेजों में पढ़ाई का मौका मिला।

खुद पर कितना विश्वास है और इसकी ताकत कहां से आती है? पढ़ाई की उपलब्धियां क्या रहीं?

काम के प्रति जुनून और सेवा भाव से ही ताकत और आत्मविश्वास के सोपान हैं। पढ़ाई  कभी बोझ समझ कर नहीं की और यही सबसे बड़ी उपलब्धि साबित हुई।

कितने प्रयास के बाद आईएएस के लिए चुने गए और इसके पीछे प्रेरणा क्या रही?

चौथे प्रयास में। तीन बार की असफलताओं का पॉजिटिव सोच से आकलन किया, तो पाया कि यूपीएससी की मेन परीक्षा तक पहुंचने में ही सफलता क्यों नहीं मिल रही है, तो देखा कि समय से पेपर पूरा नहीं हो रहा है। कमियों पर फोकस करते हुए सकारात्मक ऊर्जा के साथ चौथे प्रयास में सफलता हासिल हो गई। कमियों का आकलन और फोकस प्रेरणा रहे।

यह कब और कैसे सोचा कि आपको आईएएस अफसर ही बनना है?

पिता जी का बचपन से ही मेरे लिए देखा गया सपना था, जो बाद में मेरा भी सपना और लक्ष्य बन गया।

आपने सिविल सेवा परीक्षा के दौरान कौन से विषय चुने और इसके पीछे का कारण?

सिविल सेवा परीक्षा के लिए ग्रेजुएशन में सब्जेक्ट कंबीनेशन से हटकर ऑप्शनल विषय ज्योग्राफी रखा, जोकि स्कोरिंग माना जाता है। जबकि स्नातक की पढ़ाई विज्ञान विषयों के साथ की थी। यह ज्योग्राफी अलग सब्जेक्ट था, मगर मेरी रुचि के इस विषय ने हमेशा ही अच्छे अंक दिए।

सामान्यतः यहां तक पहुंचने के लिए आपकी दिनचर्या क्या रही?

सामान्य दिनचर्या के साथ ही दृढ़निश्चय तथा गंभीरता से टाइम को मैनेज कर पढ़ाई की गई। जबरदस्ती की पढ़ाई बैठकर न कर केवल एकाग्रता से फोकस करते हुए पढ़ाई के समय को तवज्जो दी। यूपीएससी की पढ़ाई में पढ़ाई के अधिक घंटों की बजाय सही और एकाग्रता से लगाया गया समय अधिक महत्त्वपूर्ण है।

वैसे तैयारी में किताबों के अलावा और किस-किस सामग्री का सहारा मिला?

यूपीएससी के लिए शंकर आईएएस अकादमी चेन्नई से एक वर्ष की कोचिंग लेकर तैयारियां कीं। एनसीईआरटी की प्राइमरी से लेकर स्नात्तक स्तर की किताबों को दोबारा से रिवीजन किया, जो कि जरूरी भी है। वहीं लगातार समाचार पत्र, टीवी न्यूज सुनना, ज्ञानवर्धक वेबसाइट का अध्ययन, करंट अफेयर्स इत्यादि साम्रगी काम आई।

आजकल कोचिंग क्लासेज का चलन बढ़ रहा है। क्या सफलता पाने के लिए कोचिंग क्लास जरूरी है या हम खुद भी सफलता पा सकते हैं?

भले ही कोचिंग क्लासेज का यूपीएससी की परीक्षा को क्रेक करने के लिए चलन बढ़ रहा हो, मगर ऐसा भी जरूरी नहीं है कि कोचिंग के बिना इस परीक्षा को पास नहीं किया जा सकता है। ऐसे बहुत से उदाहरण हैं, जिन्होंने आईएएस अथवा भारतीय सिविल परीक्षा को पहले ही प्रयास में बिना किसी कोचिंग के क्रेक किया हो। स्वयं सही दिशा में अध्ययन करने वाला भी इस परीक्षा में सफलता के झंडे गाड़ सकता है।

किसी भी परीक्षा के लिए आज कोचिंग/ ट्यूशन का फैशन बढ़ रहा है, क्या यह सब जरूरी है?

मैंने पहले कहा न कि इस परीक्षा के लिए भले ही ट्यूशन और कोचिंग का फैशन बढ़ गया हो, मगर सेल्फ स्टडी वाले उम्मीदवार भी  बहुत ज्यादा सफल होते हैं।

आपकी कार्यशैली आम आफिसर की तरह ही है या कि कुछ हटके है?

मुस्कराते हुए, यह तो लोग व जनता ही बताएगी। प्रयास जरूरतमंदों की समस्याओं को दूर करने के लिए हमेशा से ही रहे हैं।

जो युवा आईएएस अफसर बनने का सपना देख रहे हैं, उन्हें कोई सलाह?

जो युवा आईएएस आफिसर बनने का सपना देख रहे हैं या तैयारी के लिए सोच रहे हैं, वे सबसे पहले इस परीक्षा के लिए जुनून पैदा करें। पॉजिटिव सोच बेहद जरूरी है, वहीं कठिन परिश्रम के अलावा कोई भी शॉर्टकट नहीं। हां, सबसे अधिक जरूरी है असफलताओं में धैर्य न छोड़ें। कमियों का आकलन कर उन्हें दूर करने के लिए जुनून से जुट जाएं। तैयारियों को बोझ मत समझिए। इस तैयारी को एंज्वॉय करेंगे, तो सफलता आपके कदम चूमेगी और हां, स्वस्थ शरीर, मन से आगे बढि़ए। तैयारियों के दौरान उकता गए हैं, तो ब्रेक ले लीजिए। दोस्तों से बात करिए, टहलिए व स्वस्थ खाइए।

सुभाष शर्मा, नाहन

 

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