तो ओके?

Nov 20th, 2019 12:05 am

अशोक गौतम

साहित्यकार

हां तो! मैं देख रहा था कि वे पेड़ की गोस्ठी के लिए सादर आमंत्रित किए जाने वाले क्वियों की लिस्ट बना रहे थे। एक के हाथ में कुचडमुचड़ा फटा हुआ कागज, जबरदस्ती चलने वाला बाप-दादा के वक्त का पेन। तीन चुपचाप बैठे थे। उनके मेज पर वे ही जाने क्या-क्या सजा था! मुझे तो बहुत कुछ दिख रहा था। ‘तो आज तो लिस्ट फाइनल कर ही देते हैं? ऐसा न हो कि हमारे लिस्ट बनाने पर ही इतना खर्च आ जाए जितना कुल क्वि गोस्ठी पर भी न आए, ‘पहले ने कहा और हार्ड ड्रिंक की लंबी सी घूंट ली। ‘पर अबके क्वियों के चयन का मापदंड क्या होगा? हफ्ते से क्वियों की लिस्ट बनाने में लगों के अभी तक मापदंड तय नहीं हुए थे,  कि तभी क्विता का सरकार की ओर से प्राधिकृत अफसर बोला,‘मापदंड! कैसे मापदंड! ये मापदंड क्या होते है। यार! हैं?? मापदंड तो मैं ही हूं जिसके थू्र क्वियों को पेमेंट होनी है। थोड़ा सोडा तो लाना यार! ‘सरकार की ओर से प्राधिकृत अफसर ने कहा तो तीनों ने स्वीकृति में गर्दन हिलाई, ‘हूं ऊं!’ ‘तो सर ऐसा करते हैं कि….‘देखो यार! जो करना है करो! यू आर फुली के फुली आथोराइज्ड। बस, ये पांच मेरे रख लेना। लिखते लुखते तो कुछ नहीं, पर हरदम मेरे साथ खड़े रहते हैं,‘क्विता के सरकारी साहब जी ने  पांच क्वियों के नाम अपनी जेब से निकाले और लिस्ट बनाने वाले को थमा अपने काम में मस्त हो गए। ‘तो पांच नाम आपके हो गए सर! बुरा न मानों तो चार मेरे भी हैं। मैं उनको वचन देकर आया हूं कि मैं हर हाल में अबके तो तुम्हारे नाम लिस्ट में डलवा दूंगा। बेचारों को एक भी पेड क्वि गोस्ठी में आजतक क्विता बकने का मौका नहीं मिला, ‘दूसरे ने उनके गिलास में डालते कहा। ‘तो डाल लो यार! मैं कब इनकार कर रहा हूं। हम तो चाहते ही हैं कि क्विता न लिखने वाले ही…. चल यार! अब इसके वाले चार नाम भी लिख। मेरे क्विता के मापदंड पर ये भी खरे उतरे, ‘कह सरकारी क्विता वाले अफसर बीस साल से नव नवोदित ही बने क्वियों पर मुरीद हुए।  ‘सर! चार मेरे भी थे। उन पर भी आपकी नजरें इनायत हो जाएं तो…..’ लिस्ट बनाने वाले ने सरकारी क्विता साहब के साथ वाले की ओर देखते दीनता से कहा तो सरकारी क्विता साहब के बदले वही बोला, ‘तो लिख दे यार! पर हां! आज हर हाल में पेड गोस्ठी की लिस्ट फाइनल हो जानी चाहिए, बस! अब तो पी-पीकर मन सा भरने लगा है।’ ‘तो अब कितने पेड़ क्वि हो गए सारे?’ ‘सर! पांच आपके! पांच इनके, पांच मेरे और…..’  ‘मतलब अभी पंद्रह और अक्वियों को और पांच-पांच सौ दिए जा सकते हैं?’ ‘तो सर! पांच मेरे भी रख लेते, ‘चौथे ने डरते हुए से कहा। वह इसलिए कि पहले वह हर लिस्ट में दो तीन अपने दोस्तों को ही जगह दिलवाता था। ‘तो अबके पांच इनके भी लिख लो यार! ये भी क्या याद करेंगे कि कोई क्विता के उत्थान वाला भी अफसर था! तो अब कितने क्वि हो गए?’ सर! बजट के हिसाब अभी दस कम हैं आप कहो तो…..? ‘तो ये पैसे कौन देगा? दस के यों ही पारिश्रमिक के फार्म भरवा लेंगे। तो लिस्ट फाइनल न?’ और वे चारों गिरते पड़ते उठे और क्वि कम श्रोता गोस्ठी की अगली तैयारियों की रूपरेखा बनाने सोमवार को फिर यहीं मिलने का वादा कर गिरते पड़ते अपने अपने हो लिए।

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