नाहन मेडिकल कालेज को मिले प्रिंसीपल

डा. मुकुंद लाल को सौंपा जिम्मा;पहले शिमला में दे रहे थे सेवाएं, चार साल बाद खत्म हुआ छात्रों का इंतजार

नाहन –सिरमौर जिला के नाहन में खुले प्रदेश के सरकारी क्षेत्र के तीसरे मेडिकल कालेज डा. वाईएस परमार मेडिकल कालेज एवं अस्पताल को आखिरकार चार वर्ष बाद स्थाई प्रिंसीपल मिल गए हैं। प्रदेश सरकार द्वारा एक अधिसूचना जारी कर वर्तमान में इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज शिमला में बतौर प्रधानाचार्य तैनात डा. मुकंद लाल को डा. वाईएस परमार मेडिकल कालेज नाहन का प्रधानाचार्य नियुक्त किया है। इसके अलावा मेडिकल कालेज नैरचौक में बतौर प्रिंसीपल तैनात डा. रजनीश पठानिया को आईजीएमसी शिमला का प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया है। मेडिकल कालेज नाहन में अरसा चार वर्ष बाद स्थायी प्रधानाचार्य मिला है। बीते तीन माह से मेडिकल कालेज नाहन में प्रधानाचार्य का पद रिक्त था तथा मेडिकल कालेज के कार्यवाहक प्रधानाचार्य का जिम्मा डा. एके सहाय को दिया गया था। इससे पूर्व करीब साढ़े तीन वर्ष तक मेडिकल कालेज नाहन के प्रधानाचार्य के पद पर मेडिकल एजुकेशन के निदेशक के पद से सेवानिवृत्ति के बाद एक्शटेंशन पर चल रही डा. जयश्री शर्मा को लगातार सेवा विस्तार मिलता रहा तथा वह करीब साढ़े तीन वर्ष से अधिक समय तक डा. वाईएस परमार मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य के पद पर तैनात रही। 31 अगस्त, 2019 को डा. जयश्री शर्मा प्रधानाचार्य के पद से सेवा विस्तार के बाद सेवानिवृत्त हो गई थी। उसके बाद से नाहन मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य का पद कार्यवाहक के रूप में चल रहा था। गौर हो कि आईजीएमसी शिमला व टांडा मेडिकल कालेज के बाद सिरमौर जिला को प्रदेश का तीसरा सरकारी क्षेत्र का मेडिकल कालेज वर्ष 2016 में मिला था। वर्तमान में मेडिकल कालेज नाहन में एमबीबीएस के करीब 400 प्रशिक्षु चिकित्सक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। स्थाई प्रिंसीपल न होने के कारण मेडिकल कालेज के निर्माण कार्य की गति रूक गई थी। गौर हो कि मेडिकल कालेज नाहन के भवन के निर्माण कार्य का टैंडर करीब 250 करोड़ रुपए की लागत से दिल्ली की शापुरजी पालोनजी कंपनी को अवार्ड हो चुका है। अभी मेडिकल कालेज के निर्माण कार्य की गति आरंभ नहीं हो पाई है। संबंधित कंपनी ने निर्माणाधीन क्षेत्र को अस्थाई रूप से निर्माण के दायरे में तो शामिल कर दिया है तथा कुछ कर्मचारियों व मजदूरों को इक्का-दुक्का निर्माणाधीन स्थल पर देखा जा सकता है, परंतु अभी भी कुछ दस्तावेज की औपचारिकताएं शेष होने के कारण निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ रहा है। संबंधित कंपनी को अढ़ाई सौ करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले मेडिकल कालेज नाहन के भवन का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य वर्ष 2021 तक पूरा करने का दिया गया है। अब मेडिकल कालेज नाहन को स्थाई प्रधानाचार्य के रूप में डा. मुकंद लाल के मिलने से मेडिकल कालेज के निर्माण कार्य को गति मिलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। सरकार द्वारा इस सिलसिले में 16 नवंबर को आदेश जारी किए गए हैं, परंतु मंगलवार देर शाम तक प्रधानाचार्य द्वारा फिलहाल सेवाएं ज्वाइंन नहीं की गई थी। फिर भी मेडिकल कालेज नाहन के तमाम स्टॉफ व प्रबंधन के अलावा जिला के लोगों को उम्मीद है कि प्रदेश के तीसरे सबसे बड़े मेडिकल कालेज को अरसा चार वर्ष बाद स्थायी प्रिंसीपल मिलने से यह मेडिकल कालेज लोगों की कसौटी पर खरा उतरेगा।

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