पद्मनाभ मंदिर  में लक्षदीपम पर्व

तिरुवनंतपुरम के श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर में 21 नवंबर से मुरजपम एवं लक्षदीपम पर्व का आयोजन शुरू हो गया है, जो कि 15 जनवरी तक चलेगा। मकर संक्रांति पर 1 लाख दीपक जलाकर इसका समापन किया जाएगा। यह सदियों पुराना अनुष्ठान है, जो हर 6 साल में एक बार आयोजित किया जाता है। 56 दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है। यह परंपरा 18वीं शताब्दी के राजा मार्तंड वर्मा के समय से चली आ रही है…

260 साल पहले हुई थी इस पर्व की शुरुआत

18वीं शताब्दी के त्रावणकोर राजा मार्तंड वर्मा द्वारा अनुष्ठान की शुरुआत की गई। इन दिनों में भगवान पद्मनाभ की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। राजा मार्तंड वर्मा ने केरल और दक्षिण भारत के सभी हिस्सों से वैदिक विद्वानों की भागीदारी के साथ पहली बार 56 दिवसीय मुरजपम आयोजित करने के बाद लक्षदीप मनाया। राजा वर्मा ने 3 जनवरी, 1750 को भगवान पद्मनाभ स्वामी के चरणों में अपने मुकुट, तलवार और त्रावणकोर के पूरे देश का आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद उन्होंने मकर संक्रांति पर लाखों दीप प्रज्वलित किए और लक्षदीपम पर्व मनाया। तब से इस परंपरा की शुरुआत हुई।

मुरजपम का अर्थ है वैदिक मंत्रों का जाप

मुरजपम का अर्थ है परिक्रमा करते हुए वैदिक मंत्रों का जाप करना। मुरजपम वैदिक विद्वानों द्वारा चार वेदों के मंत्रों का अनुष्ठान है। जो आठ मुरों यानी राउंड में किया जाता है। जिनमें से प्रत्येक सात दिन की अवधि का होता है। मुरजपम की 56 दिनों की अवधि के दौरान वेदों के मंत्रों का लगातार आठ चक्रों या मुरों में जप किया जाता है। प्रत्येक चक्र आठवें दिन पवित्र जुलूस के साथ समाप्त होता है, जिसमें भगवान की मूर्ति को ले जाया जाता है।

200 से ज्यादा वैदिक विद्वान शामिल होते हैं

मंदिर के प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार वैदिक मंत्रों का जाप करने के लिए कांचीकामकोटी पीठ, अजवनचेरी मठ और देश के अन्य हिस्सों से मूक एवं प्राचीन तांत्रिक परिवारों से संबंधित लगभग 200 से ज्यादा वैदिक विद्वान शामिल होते हैं। इन विद्वानों द्वारा ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के मंत्रों का जाप किया जाता है।

सोने से कवर होगी मुख्य मंदिर की पूरी छत

मंदिर प्रशासन के अनुसार मुरजपम के दिनों में प्रमुख देवता भगवान पद्मनाभ की मूर्ति को कमलामाला और सरपॉलिमला के रूप में पारंपरिक सोने के आभूषणों से सजाया जाता है। इस साल मुरजपम एवं लक्षदीपम उत्सव में श्री पद्मनाभ स्वामी मुख्य मंदिर एवं गर्भगृह की छत को सोने से कवर किया जा रहा है। जिसमें करीब नौ करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

You might also like