पांवटा साहिब में ई-रिक्शा पर प्रशासन का डंडा

परिवहन विभाग ने बंद किए ई-रिक्शा; बाहरी राज्यों के 400 से अधिक अवैध रूप से हो रहे थे संचालित, आगामी निर्णय तक बंद रहेंगे

पांवटा साहिब – पांवटा साहिब में कथित अवैध रुप से चल रहे हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिबंधित ई-रिक्शा को परिवहन विभाग ने बंद कर दिया है। गुरुवार को विभाग की आरटीओ सोना चौहान ने इन्हंे सड़कों से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इससे एक बार ई-रिक्शा संचालकों मंे हड़कंप मच गया लेकिन बाद मे स्थानीय ई-रिक्षा युनियन के प्रधान ने विभाग के सहयोग की बात कहकर मामले को हल्का कर दिया। जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आदेष के बाद हिमाचल सरकार ने यह कार्रवाई की है। हालांकि इसके पीछे बहरी राज्य के ई-रिक्षा की पांवटा मे बाढ़ सी आ गई थी, जिस कारण स्थानीय चालक परेशान थे। गुरुवार को आरटीओ सोना चौहान पुलिस बल के साथ पांवटा साहिब पहुंची और सड़कों पर दौड़ रहे प्रतिबंधित ई-रिक्शा को बंद करने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान ई रिक्शा अध्यक्ष व स्थानीय ई-रिक्शा चालकों को बुलाकर उन्हें सुप्रीम कोर्ट और सरकार के आदेशों से अवगत करवाया गया। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सिरमौर सोना चौहान ने अध्यक्ष ई-रिक्शा नवाब और दर्जनों रिक्शा चालकों को सड़कों से अपने ई-रिक्शा हटाने की गुजारिश की। उन्होंने ई-रिक्शा चालकों को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश है कि हिमाचल प्रदेश में ई-रिक्शा काफी घातक साबित हो सकते हैं। इसलिए वहां ई-रिक्शा नहीं चलाए जा सकते। वहीं सरकार की जांच एजेंसी के दौरान भी पाया गया था कि सड़कों पर दौड़ने वाले ई-रिक्शा मॉडल में बैठी सवारियां कतई सुरक्षित नहीं हैं। छोटी से छोटी दुर्घटना में भी यह जानलेवा साबित हो सकते हैं इसलिए हिमाचल सरकार ने इन्हें तुरंत हटाने के आदेश जारी किए थे। इन आदेशों का पालन करने के लिए परिवहन विभाग और पुलिस ने साझी कार्रवाई की और ई-रिक्शा को पांवटा साहिब की सड़कों से हटाने का काम शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि पांवटा साहिब में दौड़ने वाले अधिकतर ई-रिक्शा चालकों के पास न तो लाइसेंस है और न ही इनके रजिस्ट्रेशन और न ही इंश्योरेंस है। ऐसी स्थिति में हादसे में घायल या मृत्यु व्यक्ति के परिवार को कोई भी सुविधा नहीं मिल पाएगी। वहीं इस बारे में ई-रिक्शा चालक यूनियन के अध्यक्ष नवाब ने बताया कि पांवटा साहिब के स्थानीय 100-150 के करीब ई -रिक्शा हैं जबकि चार सौ से अधिक ई-रिक्शा उत्तर प्रदेश, बिहार उत्तराखंड के चालक संचालित कर रहे हैं।यह भी जानकारी मिली है कि कुछ स्थानीय लोग ठेके पर ई-रिक्शा लाकर यहां पर चला रहे हैं जिसमें यूपी और बाहरी राज्यों के चालक रखे गए हैं। जिनके पहचान पत्र तक पुलिस के पास नहीं है। ऐसे मे इनसे क्रिमिनल एक्टिविटी बढ़ने की भी संभावना बन रही है। दूसरे इनकी दादागिरी के कई लोग शिकार हो चुके हैं। ज्यादातर रिक्शा में नंबर न होने के कारण सवारी इनकी शिकायत भी नहीं कर पाती है। रात के समय 95 प्रतिशत ई-रिक्शा की हैडलाइट बंद रहती है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ रही थी।

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