पाएं मानवीय करियर का अधिकार

लोगों के हक के लिए लड़ने और समाज में हो रहे भेदभाव को दूर करने में अगर आपकी रुचि है, मानव अधिकार संरक्षण के लिए तत्पर रहने की आदत और मानव हित के लिए कुछ कर गुजरने की चाहत है, तो ह्यूमन राइट्स की फील्ड जॉब के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। बेहतर भविष्य निर्माण के साथ-साथ जरूरतमंद को अधिकार दिलाने पर जो सुकून मिलेगा, वह किसी और फील्ड में नहीं मिल सकता…

इस पूरी दुनिया में कई ऐसे अधिकार हैं, जो जरूरी तौर पर विश्व के नागरिकों को मिलने चाहिए, लेकिन अभी भी कई जरूरी अधिकारों का उल्लंघन होता रहता है। ऐसे में कई ऐसे सरकारी गैर सरकारी संगठन हैं, जो मानव अधिकारों की रक्षा करने के लिए काम करते हैं। इन संगठनों में काम करने वाले को मानवाधिकार कार्यकर्ता कहा जाता है। मानवाधिकार के क्षेत्र में भारत का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और संयुक्त राष्ट्र संघ ने कई कानून बना रखे हैं, जिनका इस्तेमाल अधिकारों की रक्षा करने के लिए होता है। मानवाधिकार उल्लंघन आज के समय में अंतरराष्ट्रीय चुनौती बन गया है। हर पल, हर समय कहीं न कहीं मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ मानवाधिकारों का उल्लंघन रोकने और मानवाधिकार संरक्षण के लिए सरकारों और संस्थाओं द्वारा तेजी से प्रयास भी हो रहे हैं। मानवाधिकार संरक्षण के लिए काम करने वाली देश की प्रमुख सरकारी संस्था नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन में पिछले एक-दो दशक में सिविल, पॉलिटिकल, सोशल और इकॉनोमिक राइट्स उल्लंघन के काफी मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें भी खाने के अधिकार, स्वास्थ्य के अधिकार, शिक्षा के अधिकार, महिला सुरक्षा, जाति, धर्म और संप्रदाय के नाम पर होने वाले अधिकारों के उल्लंघन के ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। जागरूकता बढ़ने की वजह से लोग अब अपने अधिकारों के संरक्षण के प्रति कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं। लोगों के इन्हीं मूलभूत अधिकारों के संरक्षण का काम करते हैं मानवाधिकार कार्यकर्ता और मानवाधिकार से जुड़ी संस्थाएं। वर्तमान में यह क्षेत्र अपने विकास के चरम पर है और इस क्षेत्र में स्किल्ड प्रोफेशनल की काफी डिमांड है। अगर आपकी भी दिलचस्पी इस फील्ड में है, तो आवश्यक योग्यता हासिल कर इस क्षेत्र में कदम बढ़ा सकते हैं।

वर्क प्रोफाइल

ह्यूमन राइट्स यानी की मानव अधिकार, जैसा नाम है वैसा ही इसका काम है। मानवाधिकार से संबंधित कोर्स करने के बाद इस क्षेत्र में आने वाले प्रोफेशनल्स पूरी तरह से मानवाधिकार के संरक्षण के लिए ही काम करते हैं। यह काम चुनौतीपूर्ण है, लेकिन चुनौती के साथ-साथ काम पूरा होने पर आनंद व सुकून भी मिलता है। सामान्य तौर पर ह्यूमन राइट्स वर्कर सोशल जस्टिस, जेंडर जस्टिस, कस्टडियल जस्टिस से संबंधित काम देखते हैं। इनके अलावा ह्यूमन राइट्स से संबंधित कामों की देखरेख और उसकी समीक्षा करना, रिपोर्ट तैयार करना, मानवाधिकार उल्लंघन होने की स्थिति में उसके खिलाफ  रिपोर्ट दर्ज कराने और उसके लिए ठोस कदम उठाने से लेकर इसे रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने के काम को भी अंजाम दिया जाता है।

आवश्यक स्किल्स

* लोगों के अधिकार के लिए काम करने का जज्बा

* टीम के साथ सामंजस्य बैठाने में सक्षम

* कम्युनिकेशन स्किल

* प्रबंधन क्षमता

* लीगल नॉलेज

* राइटिंग स्किल

* रिसर्च करने की क्षमता

* अच्छा वक्ता और श्रोता।

सैलरी पैकेज

कोर्स के बाद फ्रेशर के रूप में किसी एनजीओ से जुड़ने पर 15 से 18 हजार रुपए प्रतिमाह आसानी से मिल जाते हैं। वहीं सरकारी संस्थान से जुड़ने पर सैलरी 25-30 हजार रुपए तक मिलती है। अगर यूनाइटेड नेशंस या उसकी सहयोगी संस्था या किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था में मौका मिलता है, तो सैलरी पैकेज काफी आकर्षक होगा।

कोर्सेज

* सर्टिफिकेट इन ह्यूमन राइट्स

* डिप्लोमा इन ह्यूमन राइट्स

* बैचलर इन ह्यूमन राइट्स

* पीजी डिप्लोमा इन ह्यूमन राइट्स

* मास्टर्स इन ह्यूमन राइट्स

अधिकार एवं दायित्व दोनों

मानवाधिकार अधिकार तथा दायित्व दोनों को अपरिहार्य बनाते हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विधि के अंतर्गत दायित्वों तथा कार्यों को मानवाधिकारों को आदर देने, उनकी रक्षा करने तथा उन्हें पूरा करने वाला मानते हैं। आदर देने के दायित्व का अर्थ है कि राष्ट्रों  को मानवाधिकार के प्रयोग में हस्तक्षेप करने से अथवा उसके प्रयोग को घटाने से बचना चाहिए। रक्षा के दायित्वों के संबंध में राष्ट्रों को मानवाधिकारों के दुरुपयोगों से व्यक्तियों या समूहों की रक्षा करनी चाहिए। पूरा करने के दायित्व का अर्थ है कि राष्ट्रों को मूल मानवाधिकारों के प्रयोगों को कारगर बनाने के लिए सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए। व्यक्तिगत स्तर पर जब कि हम अपने मानवाधिकारों के हकदार हैं, हमें अन्य के मानवाधिकारों का भी सम्मान करना चाहिए। हमें अपने अधिकार दूसरों को अधिकार देने से ही मिलेंगे।

पद और अवसर

* ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट

* ह्यूमन राइट्स प्रोफेशनल

* ह्यूमन राइट्स एनालिस्ट

* ह्यूमन राइट्स डिफेंडर

* ह्यूमन राइट्स वर्कर

* ह्यूमन राइट्स प्रोग्रामर

* ह्यूमन राइट्स कंसल्टेंट

* ह्यूमन राइट्स कैंपेनर

* ह्यूमन राइट्स फंड रेजर

* ह्यूमन राइट्स मैनेजर

* ह्यूमन राइट्स टीचर

* ह्यूमन राइट्स प्रोफेसर

शैक्षणिक योग्यता

देश की कई यूनिवर्सिटीज में ह्यूमन राइट्स से संबंधित कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। सरकारी विश्वविद्यालयों के अलावा डीम्ड यूनिवर्सिटी और निजी शैक्षणिक संस्थान भी ह्यूमन राइट्स में विभिन्न तरह के कोर्स संचालित कर रहे हैं। सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्स में नामांकन लेने के लिए किसी भी विषय में बारहवीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है, जबकि मास्टर डिग्री और पीजी डिप्लोमा में नामांकन लेने के लिए 50 प्रतिशत अंकों के साथ बैचलर डिग्री आवश्यक है।

संभावनाएं

यूनाइटेड नेशंस के प्रयासों के बाद से ह्यूमन राइट्स के संरक्षण के लिए काफी तेजी से काम हुए हैं। देश में नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (एनएचआरसी) के अलावा राज्य स्तर पर ह्यूमन राइट्स कमीशन और ढेर सारी सरकारी-गैर सरकारी संस्थाएं इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। जागरूकता बढ़ने से लोग अपने हक के लिए तेजी से आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में उनकी आवाज को मजबूत करने और उन्हें हक दिलाने के लिए ह्यूमन राइट्स वर्कर व एक्सपर्ट की काफी मांग है। सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों के अलावा दुनिया के तमाम देशों में भी इनकी काफी डिमांड है। ऐसे में इस क्षेत्र को करियर विकल्प चुनकर बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

कहां मिलेंगी नौकरियां

देश-विदेश में ढेरों सरकारी, गैरसरकारी, समाजसेवी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं मानवाधिकार संरक्षण के लिए काम कर ही हैं। सरकारी स्तर पर देश में नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन, स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन, ह्यूमन राइट्स ट्रिब्यूनल, नेशनल एंड स्टेट कमीशन ऑन वूमन, नेशनल एंड स्टेट कमीशन ऑन चिल्ड्रन, लेबर वेलफेयर डिपार्टमेंट, माइनॉरिटी कमीशन, एससी एंड एसटी कमीशन, पुलिस डिपार्टमेंट आदि कमीशन, एससी एंड एसटी कमीशन, पुलिस डिपार्टमेंट आदि में नौकरियां मिल सकती हैं।

विदेश में संभावनाएं

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूनाइटेड नेशंस, यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स कमीशन (यूनएचआरसी) यूनाइटेड नेशंस डिवेलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) यूएनडीईएस, यूनिसेफ, यूएनईपी,आईएलओ आदि में आपके लिए ढेर सारे मौके हैं। इनके अलावा एमनेस्टी इंटरनेशनल, रेडक्रॉस क्राई, ह्यूमन राइट्स वॉच, कॉमनवैल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशिएटिव, साउथ एशियन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स डाक्यूमेंटेशन सेंटर, एशियन सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स में भी ह्यूमन राइट्स एक्सपर्ट के लिए हमेशा मौके रहते हैं। इन सबके अलावा एनजीओ से भी जुड़ सकते हैं। चाहें तो खुद का एनजीओ रजिस्टर्ड करा कर स्वतंत्र रूप से भी काम कर सकते हैं। मानवाधिकार के क्षेत्र में आपके लिए विदेश में रोजगार की संभावनाएं बनने के ज्यादा स्कोप बन जाते हैं।

कहां से करें कोर्सेज

* भारतीय मानवाधिकार संस्थान, नई दिल्ली

* इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, दिल्ली

* बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी

* मुंबई यूनिवर्सिटी, मुंबई

* राष्ट्रीय भारतीय विधि विश्वविद्यालय, बंगलूर

* मैसूर विश्वविद्यालय, मैसूर

* एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय, मुंबई

* नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में अभी मानवाधिकार विषय शुरू नहीं हो पाया है। हालांकि इस विषय को शुरू करने की योजना है। हां, विधि संकाय के छात्रों को यह विषय जरूर पढ़ाया जाता है।

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