पोल खोलते भुखमरी के अांकड़े

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

हाल ही में वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2019 में हमारा देश 117 देशों में से 102वें स्थान पर है। भारत का कृषि प्रधान होने के बावजूद भुखमरी की श्रेणी में आना बहुत ही शर्मनाक और निंदनीय है। देश को आजाद हुए एक लंबा अरसा बीत चुका है, लेकिन देश में गरीबी, बेरोजगारी, भुखमरी और अपराध जैसी समस्याएं घटने की बजाय बढ़ती ही जा रही हैं। पंचवर्षीय योजनाओं के जरिए विकास और प्रगति की बातें सरकारों ने तो खूब कर लीं मगर गरीब लोगों के लिए रोटी, कपड़ा और मकान का इंतजाम सरकारें उचित तरीके से नहीं कर पा रही हैं। अगर देश में निष्पक्ष और उचित सर्वेक्षण करवाया जाए तो लाखों-करोड़ों गरीब बच्चे ऐसे भी मिल जाएंगे जिन्हें दो वक्त की रोटी भरपेट नहीं मिलती होंगी। सरकारें भी गरीबों के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं घोषित करते हुए देश में गरीबी समाप्त करने की बातें करती हैं, लेकिन वे योजनाएं या तो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं या फिर सरकारी फाइलों तक ही सीमित होकर रह जाती हैं।

            

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