राज्यसभा में मार्शलों की वर्दी पर विवाद

पूर्व सैन्य अधिकारियों की आपत्ति पर सभापति वेंकैया नायडू ने दिया विचार का आदेश

नई दिल्ली – राज्यसभा के 250वें सत्र के प्रारंभ होने पर मार्शलों की एकदम नई ड्रेस के कारण आसन का नजारा कुछ बदला सा लग रहा था। सेना की वर्दी से मिलते परिधान के कारण कुछ सदस्यों और पूर्व सैन्य अधिकारियों ने भी इस पर आपत्ति की थी। मंगलवार को राज्यसभा की कार्रवाई के दौरान चेयरमैन वेंकैया नायडू ने सदस्यों की आपत्ति को देखते हुए इस पर फिर से विचार करने का आश्वासन दिया। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि राज्यसभा सचिवालय ने कई तरह के सुझाव लेने के बाद मार्शलों की वर्दी बदली है। कुछ सदस्यों और अन्य गणमान्य लोगों से भी मुझे इस वर्दी को लेकर कुछ आपत्तियों की सूचना मिली है। मैं बताना चाहता हूं कि सचिवालय से मैंने एक बार फिर से नई वर्दी के फैसले से जुड़ी आपत्तियां साझा की हैं और विचार करने के लिए कहा है। गौरतलब है कि इन मार्शलों के सिर पर पगड़ी की बजाय नीले रंग की पी-कैप थी। साथ ही उन्होंने नीले रंग की आधुनिक सुरक्षाकर्मियों वाली वर्दी धारण कर रखी थी। राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि इस बारे में किए गए उच्चस्तरीय फैसले के बाद मार्शल के लिए जारी ड्रेस कोड के तहत सदन में तैनात मार्शलों को कलगी वाली सफेद पगड़ी और पारंपरिक औपनिवेशिक परिधान की जगह अब गहरे नीले रंग की वर्दी और कैप पहननी होगी। राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार पिछले कई दशकों से चल रहे इस ड्रेस कोड में बदलाव की मांग मार्शलों ने ही की थी। गौरतलब है कि सभापति सहित अन्य पीठासीन अधिकारियों की सहायता के लिए सदन में लगभग आधा दर्जन मार्शल तैनात होते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि मार्शलों ने उनके ड्रेस कोड में बदलाव कर ऐसा परिधान शामिल करने की मांग की थी जो पहनने में सुगम और आधुनिक लुक वाला हो। इनकी मांग को स्वीकार कर राज्य सचिवालय और सुरक्षा अधिकारियों ने नई ड्रेस को डिजायन करने के लिए कई दौर बैठकें कर नए परिधान को अंतिम रूप दिया। सूत्रों के अनुसार मार्शलों ने इस बदलाव पर खुशी जाहिर की है। गौरतलब है कि पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) वीपी मलिक ने मार्शल की वर्दी बदलवाने के निर्णय पर ट्वीट कर कहा कि असैन्यकर्मियों द्वारा सैन्य वर्दी पहनना गैर कानूनी एवं सुरक्षा के लिए खतरा है। मुझे उम्मीद है कि उपराष्ट्रपति सचिवालय, राज्यसभा और राजनाथ सिंहजी इस पर जल्द कार्रवाई करेंगे। सेना के एक अन्य पूर्व शीर्ष अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल  (सेवानिवृत्त) एचएस पनाग ने भी ट्वीट कर राज्यसभा के मार्शल की वर्दी बदले जाने के निर्णय पर अपनी असहमति जताई थी।

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